सूचना का अधिकार (Right to Information) Part 20

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सूचना के अधिकार को बेहतर रूप से लागू करने के सुझाव-

सूचना के अधिकार कानून के बेहतर क्रियान्वयन के लिए निम्नलिखित पहलुओं एवं सुझावों को ध्यान में रखे जाने की आवश्यकता है-

  • संविधान समीक्षा आयोग और दव्तीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने सिफारिश की कि लोक पदाधिकारियों को गोपनीयता के स्थान पर पारदर्शिता की शपथ दिलाई जाए।

  • वह निजी क्षेत्र जो महत्वपूर्ण रूप से राज्य से कार्य लेता है उसमें भी सूचना के अधिकार कानून लागू किया जाए।

  • मौलिक अधिकारों के अंतर्गत अनुच्छेद 19 में सूचना के अधिकार के प्रावधान किये जाएँ।

  • इलेक्ट्रॉनिक (विद्युत) माध्यमों से सूचना लेने की प्रवृत्ति बढ़े इसके लिए कंम्यूटर (परिकलक) साक्षरता बढ़ाई जाये।

  • सूचना के अधिकार के काननू के अनुरूप सिविल (नागरिक) सेवाओं की आचार संहिताओं को बदला जाये।

  • सूचना के अधिकार के संदर्भ में शिक्षा और जागरूकता को लाने के लिए गैर सरकारी संगठनों की भागीदारी बढ़ाई जाये।

  • दव्तीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने लोक सूचना अधिकारियों के अतिरिक्त अन्य कार्मिकों को भी सूचना के अधिकार के संबंध में प्रशिक्षण देने की सिफारिश की है।

  • सुशासन के संदर्भ में राज्य सरकार रिपोर्ट (विवरण) से पारदर्शिता एक महत्वपूर्ण मुद्दा हो।

  • अधीनस्थ और संलग्न संस्थाओं में भी इसे लागू करने के लिए संबंधित मंत्रालय या विभाग प्रयास करें।

  • िदव्तीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने सरकार के अभिलेखों या सूचना रखरखाव के आधुनिकीकरण के लिए विशेष कार्यक्रम की सिफारिश की है।

  • दव्तीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने एकल खिड़की एजेंसी (शाखा) के प्रयोग एवं स्वतंत्र लोक अभिलेख कार्यालय की सिफारिश की है जिससे पारदर्शिता बढ़ाने के प्रावधान प्रभावी हो सके।

  • दव्तीय प्रशासनिक आयोग ने केन्द्रीय और राज्य समिति में नियुक्ति के लिए सिफारिश के संदर्भ में) में एक कैबिनेट (मंत्रिमंडल) मंत्री के स्थान पर क्रमश: उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को सम्मिलित करने की सिफारिश की है।

सूचना के अधिकार किसी भी रूप में होने वाले सत्ता के निरंकुश प्रयोग को पूर्णतया निरुत्साहित करता है। यह हमारे देश की लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को सही अर्थो में न्यायपूर्ण, कार्यकुशल, जनता के प्रति संवदेनशील, पारदर्शी व उत्तरदायित्व की भावना से अनुपूरित करने की दिशा में एक गंभीर प्रयास है। जनमानस जब सूचना के अधिकार को एक साधन के रूप में प्रयुक्त करते हुए शासन की प्रत्येक इकाई से जवाबदेही की मांग कर सकता है। इस कानून के दव्ारा लोक सेवकों की जवाबदेही सुनिश्चित करके उनकी अकर्मण्यता, अकुशलता, पक्षपातपूर्ण व्यवहार, निरंकुशता, अनुशासनहीनता एवं भ्रष्टाचार की मनोवृत्ति पर एक प्रकार का प्रभावी अंकुश लगा दिया गया है। इसी व्यवस्था का परिणाम है की आज देश का साधारण से साधारण नागरिक भी शासकीय व्यवस्था में व्याप्त त्रुटियों को दूर करने में सक्षम हो गया है।