सूचना का अधिकार (Right to Information) Part 23

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भाग दो

अधिकार और दायित्व

  • सीआईसी की चयन समिति (प्रधानमंत्री, विपक्ष का नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश के साथ) गठित करने के लिए अधिनियम की धारा 12 को संशोधित किया जाना चाहिए। इसी प्रकार, राज्य का मुख्यमंत्री, विपक्ष का नेता और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के साथ चयन समिति गठित करने के लिए धारा 15 को संशोधित किया जाना चाहिए।

  • भारत सरकार को सभी राज्यों में 3 माह के अंदर एसआईसी का गठन सुनिश्चित करना चाहिए।

  • सीआईसी को 4 क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित करने चाहिए जिनमें प्रत्येक का अध्यक्ष एक आयुक्त होना चाहिए। इसी प्रकार बड़े राज्यों में एसआईसी के क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित किये जाने चाहिए।

  • सूचना आयोग के कम से कम आधे सदस्य गैर सिविल सेवा पृष्ठभूमि वाले होने चाहिए। केन्द्रीय सरकार दव्ारा अधिनियम के अंतर्गत नियमों में ऐसा प्रावधान किया जा सकता है जो सीआईसी और एसआईजी दोनों पर लागू हो।

  • एक से अधिक पीआईओ वाले सभी मंत्रालयों/विभागों/एजेंसियों (शाखाओ)/कार्यालयों का एक नोडल (केन्द्रीय) सहायक लोक सूचना अधिकारी हो। समुचित सरकारों दव्ारा नियमों में ऐसा प्रावधान शामिल किया जा सकता है

  • केन्द्रीय सचिवालयों में पीआईओ कम से कम उप सचिव स्टार (प्रसिद्ध व्यक्ति) का होना चाहिए। राज्य सचिवालय में ऐसे ही रैंक के अधिकारियों को पीआईओ के रूप में अधिसूचित किया जा सकता है। सभी अधीनस्थ एजेंसियों और विभागों में रैंक में पर्याप्त रूप से वरिष्ठ अधिकारियों को, किन्तु जो जनता के लिए सुलभ हों, पीआईओ के रूप में पदनामित किया जा सकता है।

  • सभी अधिकारियों को भारत सरकार दव्ारा सलाह दी जा सकती है कि लोक सूचना अधिकारियों के साथ-साथ अपीलीय अधिकारी पदनामित किये जा सकते हैं।

  • प्रत्येक सार्वजनिक प्राधिकारी के लिए अपीलीय प्राधिकारियों का मनोनयन और अधिसूचना या तो नियमों के तहत अथवा अधिनियम की धारा 30 का इस्तेमाल करके की जा सकती है।

  • सूचना को सरकारी भाषा में मुद्रित समूल्य प्रकाशन के रूप में स्वमेव प्रकटन के लिए उपलब्ध होना चाहिए जिसे समय-समय पर संशोधित किया जाना चाहिए। इसके लिए एकल पोर्टल (दव्ार) की व्यवस्था हो।

  • भारत सरकार दव्ारा एक स्वतंत्र प्राधिकरण रूप में तथा सभी राज्यों दव्ारा वर्तमान में अभिलेख पालन में लगी अनेक एजेंसियों को एकीकृत करके 6 महीने के अंदर सार्वजनिक अभिलेख कार्यालय स्थापित करना चाहिए।

  • यह अभिलेख कार्यालय सीआईसी एसआईसी के समग्र पर्यवेक्षण और मार्गदर्शन के अधीन कार्य करेगा।

  • भारत सरकार को अभिलेखों की अद्यतन बनाने अवस्थापना सुधारने, संहिताएं तैयार करने तथा सार्वजनिक अभिलेख कार्यालय स्थापित करने के लिए पांच वर्ष तक की अवधि के लिए सभी अग्रणी कार्यक्रमों की निधियों का प्रतिशत सुनिश्चित करना चाहिए और इसकी अधिकतम 25 प्रतिशत राशि का उपयोग जागरूकता सृजन के लिए किया जाए।

  • भारत सरकार सभी भूमि अभिलेखों के सर्वेक्षण और उन्हें अद्यतन बनाने के लिए एक भू अभिलेख आधुनिकीकरण निधि कायम कर सकती है।

  • जिलो में 2001 के अंत तक डीजीटीकरण की प्रक्रिया पूरी कर ले और उप जिला स्तर के संगठन 2011 तक यह कार्य कर लें।

  • सभी सरकारी कार्मिकों को आरटीआई का वर्ष में कम से कम एक दिन का प्रशिक्षण दिया जाये।

  • जागरूकता अभियान राज्य स्तर पर एक विश्वसनीय गैर लाभकारी संगठनों को सौंपे जाएँ, बहु मीडिया (संचार माध्यम) अभियान हो जो की स्थानीय भाषा में हो।

  • सरकारों को गाइड (दिशा निर्देश) और समझ-योग्य सूचना सामग्री प्रकाशित करनी चाहिए।

  • राज्य, क्षेत्रीय, जिला और उप-जिला स्तर पर उपयुक्त मानिटरिंग (जांच) प्राधिकारी दव्ारा जहाँ कहीं आवश्यक हो, एक नोडल (प्रधान) अधिकारी विनिर्धारित किया जाना चाहिए।

  • प्रत्येक सरकारी प्राधिकरण, अपने कार्यालय के साथ ही अधीनस्थ सरकारी प्राधिकरणों में एक्ट (अधिनियम) के प्रावधानों के अनुपालन के लिए जिम्मेदार हो।

  • मुख्य सूचना आयुक्त की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय समन्वय समिति गठित की जाए। समिति राष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करेगी, भारत व अन्यत्र सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रलेख्बध्य व प्रसारित करेगी, राष्ट्रीय पोर्टल (दव्ार) के सृजन और कार्यकरण की मॉनिटरिंग करेगी, अधिनियम के अंतर्गत उपयुक्त सरकारों दव्ारा जारी नियमों और कार्यकारी आदेशों की समीक्षा करेगी।