सूचना का अधिकार (Right to Information) Part 6

Download PDF of This Page (Size: 178K)

भारत में सूचना का अधिकार लागू हाेेने के विविध चरण-

  • भारत में 1989 में प्रधानमंत्री बने श्री वीपी सिंह ने 3 दिसंबर, 1989 को देश के नाम अपने पहले संदेश में संविधान संशोधन करके सूचना का अधिकार प्रदान करने तथा शासकीय गोपनीयता कानून में संशोधन की सर्वप्रथम घोषणा की थी। हालांकि सरकार इसे लागू नहीं कर पायी।

  • 1 मार्च, 1990 को केन्द्र सरकार ने शासकीय गोपनीयता कानून में संशोधन संबंधी बिन्दुओं पर अर्द्धशासकीय पत्र निर्गत करके जानने का प्रयास किया कि शासकीय गतिविधियों में गोपनीयता को किस तरह कम किया जा सकता है।

  • अक्टूबर, 1995 में लालबहादुर शास्त्री नेशनल (राष्ट्रीय) एकेडमी (शिक्षाविदों) ऑफ (का) एडमिनिस्ट्रेिशन (शासन प्रबंध), मसूरी में सूचना का अधिकार पर कार्यशाला हुई। इसमें सूचना का अधिकार पर आंदोलनरत प्रमुख लोगों तथा अधिकारियों ने विचार-विमर्श करके सूचना का अधिकार का एक प्रारूप तैयार किया।

  • 24 मई,1997 को नयी दिल्ली में मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन हुआ। इसका विषय था-’प्रभावी और उत्तरदायी सरकार के लिए कार्य-योजना का निर्माण’ इससे सूचना का अधिकार कानून बनाने पर सहमति हुई। कार्मिक एवं लोक-शिकायत मंत्रालय ने अपनी 38वीं रिपोर्ट (विवरण) में भी ऐसे कानून की सिफारिश की।

  • 1996 में गांधीशांति प्रतिष्ठान नई दिल्ली) में नेशनल (राष्ट्रीय) कैम्पेन (अभियान) फॉर (के लिये) पीपल्स(लोग) राइट (सही) इनफॉरमेशन (सूचना) (एनजीपीआरटी) का गठन हुआ। एनसीसीआरआई तथा भारतीय प्रेस परिषद ने जस्टिस (न्याय) पी बी सावंत के नेतृत्व में मसविदा दस्तावेज तैयार किया तथा इसे भारत सरकार को सौपा गया।

  • सरकार की पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाये रखने के लिए एच.डी. शौरी की अध्यक्षता में समिति गठित की गयी। शौरी समिति ने मई 1997 में सूचना स्वातंत्रय विधेयक का प्रारूप प्रस्तुत किया। एच.डी. शौरी दव्ारा प्रस्तुत प्रारूप पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता।

  • वर्ष 2001, में संसद का स्थायी समिति ने सूचना स्वातंत्रय विधेयक अनुमोदित किया।

  • दिसंबर, 2002 में संसद ने सूचना स्वातंत्रय विधेयक पारित किया।

  • जनवरी, 2003 में इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिली। जनवरी, 2003 को इस अधिनियम संख्या 5/2003 के बतौर अधिसूचित किया गया। लेकिन इसकी नियमावली बनाने के नाम पर इसे लागू नहीं किया गया।

  • मई, 2004 में केन्द्र में यूपीए सरकार ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए एक राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का गठन किया। परिषद ने सूचना का अधिकार का एक मुकम्मल दस्तावेज प्रस्तुत किया।

  • संसद में सूचना का अधिकार विधेयक 22 दिसंबर, 2004 को पेश किया गया। यह विधेयक 2002 के कानून से बेहतर जरूर था, लेकिन इसमें कई खामियाँ थी।

  • अंतत: इसे मार्च, 2005 में संसद में पेश किया गया।

  • यह 11 मई, 2005 को लोकसभा में 144 संशोधनों के साथ पारित हुआ।

  • 12 मई को राज्यसभा ने भी इसे पारित कर दिया।

  • 12 जून, 2005 को राष्ट्रपति ने इसे स्वीकृति दी।

  • इस तरह, 12 अक्टूबर 2005 से सूचना का अधिकार कानून पूरे देश में (जम्मू-कश्मीर को छोड़कर) प्रभावी हो गया। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार से जुड़े निकायों के संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम,2005 के तहत सूचना मांगने का अधिकार जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को भी प्राप्त है।