सूचना का अधिकार (Right to Information) Part 7

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सूचना का अधिकार के कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

  • सूचना का अधिकार के संदर्भ में केन्द्रीय कानून बनने से पहले देश के नौ राज्यों-तमिलनाडु (1997), गोवा (1997), राजस्थान (2000), कनार्टक (2000), दिल्ली (2001), असम (2002), मध्य प्रदेश ( 2002), महाराष्ट्र (2002) जम्मू-कश्मीर (2004) में यह अधिकार लोगों को मिल चुका था।

  • कर्नाटक ऐसा पहला राज्य है जिसने सूचना का अधिकार लागू करने की कोशिश की। हालांकि उसे सफलता नहीं मिली।

  • तमिलनाडु विधानसभा ने 17 अप्रैल, 1997 को सूचना का अधिकार विधेयक पारित किया। इस तरह भारत में ऐसा पहला कानून बनाने का श्रेय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करुणानिधि को मिला। इसके तीन महीने बाद ही, जुलाई 1997 में गोवा विधानसभा ने विधेयक पारित करके ऐसा दूसरा राज्य होने का गौरव पाया।

  • मध्य प्रदेश सरकार ने 1996 में मध्य प्रदेश राइट (अधिकार के) टू (अनुसार) इनफॉरमेशन (सूचना) बिल तैयार किया। 1997 में इसे कैबिनेट (मंत्रिमंडल) में भारी विरोध का सामना करना पड़ा। 1998 में मध्य प्रदेश विधानसभा ने इस विधेयक को पारित करके आश्चर्यजनक रूप से राज्यपाल के बदले राष्ट्रपति के पास मंजूरी हेतु भेज दिया। यह विधेयक कभी वापस नहीं लौटा। पांच साल बाद, 2003 में मध्य प्रदेश विधानसभा ने पुन: नया विधेयक पारित करके लागू किया। (हालांकि मध्य प्रदेश के बिलासपुर संभाग के कमिश्नर हर्ष मंदर ने 1995 से 1997 के बीच सार्वजनिक विवरण प्रणाली, परिवहन, ग्रामीण विकास योजनाओं,, साक्षरता, रोजगार से जुड़े दस्तावेजों में पारदर्शिता के महत्वपूर्ण प्रयास किये)।

  • राजस्थान वह राज्य है, जहाँ सूचना का अधिकार के लिए सबसे पहले और सबसे जबरदस्त आंदोलन हुआ। भारी जनदबाव के कारण 1995 में मुख्यमंत्री भैंरोसिंह शेखावत ने विधानसभा में आश्वासन दिया कि जल्द ही सूचना का अधिकार लागू किया जाएगा, लेकिन जनता को अगले पांच वर्षों तक निरंतर आंदोलन करना पड़ा। मई, 2000 में राजस्थान विधानसभा ने सूचना का अधिकार विधेयक पारित किया।

  • महाराष्ट्र में 1 दिसंबर 2000 को सूचना का अधिकार विधेयक पारित हुआ लेकिन यह बेहद कमजोर था। इसमें विभिन्न महत्वपूर्ण सूचनाओं पर पाबंदी थी इसलिए सूचनावादियों को यह कानून बेहद अपर्याप्त लगता रहा। यही कारण था कि अन्ना हजारे ने राज्य में जोरदार आंदोलन बुलाकर एक बेहतर कानून बनाने का दबाव डाला। महाराष्ट्र सरकार ने नया विधेयक बनाने के लिए 10 सिंतबर 2007 को समिति गठित की तथा अप्रैल 2002 इस विधानसभा में नया विधेयक आया। साथ ही 23 सितंबर 2002 को एक अध्यादेश लाया गया। मार्च 2003 में महाराष्ट्र विधानसभा के दोनो सदनों ने विधेयक पारित कर दिया तथा 10 अगस्त, 2003 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गयी। इस अध्यादेश को 23 सितंबर, 2002 से लागू किया गया।

  • मई, 2001 में दिल्ली में सूचना का अधिकार विधेयक हुआ और उसे 02 अक्टूबर, 2002 से लागू माना गया।

  • उत्तर प्रदेश ने कोड (संकेत) ऑफ (के) प्रैक्टिस (अभ्यास) ऑन एक्सेस (उपयोग पर) इनफॉरमेशन (सूचना) 2009 पारित किया। हालांकि इसके सावधान बेहद सीमित होने के कारण इसकी खास प्रासंगिकता नहीं दिखी गयी।

  • अंतत: वर्ष 2005 में सूचना का केन्द्रीय कानून अपने वास्तविक रूप में सामने आया।