इलेक्ट्रॉनिक (विद्युतीय) विकास कोष निधि के बारे में (About The Electronic Development Fund – Economy)

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• इसे संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय दव्ारा इलेक्ट्रॉनिक्स (विद्युदणु शास्त्र) , नैनो इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी पर ध्यान केंद्रित करने वाले प्रारंभिक, एंजेल, उद्यम और निजी इक्विटी फंड्‌स (निष्पक्षता, धन) की मदद करने के लिए शुरू किया गया है।

• 2200 करोड़ रुपये का आरंभिक कोष (जिसे 10000 करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है)।

• इसका उद्देश्य उद्योग जगत की सक्रिय भागीदारी के आधार पर ”नवाचार तथा अनुसंधान और विकास के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र” विकसित करना है।

• यह एक ”फंड ऑफ फंड्‌स (कोषो का कोष)” होगा। कैनबैंक (समथ होना अधिकोष) वेंचर (साहसिक या संकट पूर्ण कार्य) कैपिटल (पूंजी) फंड (धन) इसकी सक्रिय प्रबंधन फर्म होगी जो परिणामस्वरूप पेशेवर प्रबंधित वेंचर (साहसिक या संकट पूर्ण कार्य) फंड (संचय) को जारी करेगी।

• इलेक्ट्रॉनिक (विद्युतीय) विकास निधि 20 प्रतिशत पूंजी की अनुजात फंड (धन) में रखेगी और बाकी 80 प्रतिशत पूंजी का वेंचर पूंजीपतियों दव्ारा निवेश किया जाएगा। इस अनुजात फंड (संचय) का मुख्य रूप से स्टार्ट-अप कंपनियों में निवेश किया जाएगा।

इलेक्ट्रॉनिक (विद्युतीय) विकास निधि की आवश्यकता

• भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की मांग वर्ष 2020 तक 400 अरब डॉलर (अमेरिका व अन्य राज्यों की प्रचलित मुद्रा) तक पहुँच जाएगी जबकि उस समय तक उत्पादन केवल 104 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

• भारत कच्चे तेल से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक्स का आयात करेगा जिससे चालू खाता घाटा और बढ़ जाएगा।

• भारत का घरेलू बाजार काफी विशाल है और तकनीकी संसाधनों का एक विशाल भंडार है, साथ ही कुशल और अर्ध कुशल श्रम भी उपलब्ध है।

• उत्पादन को बढ़ाने के अवसरों के साथ, भारत एक वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण हब बनने के लिए तैयार है।