प्रतिस्पर्धा अपीलीय न्यायाधिकरण ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग दव्ारा सीमेंट कंपनियों (सभा) पर लगायें गए जुर्माने को रद्द किया। (Competition Appellate Tribunal canceled the penalty imposed on cement companies by Indian competition-Economy)

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प्रतिस्पर्धा अपीलीय न्यायाधिकरण (कॉमपेट) (स्पर्धा करना) ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसमें ’व्यवसायी समूहन’ करने के आरोप में 11 सीमेंट कंपनियों पर 6316.59 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।

प्रतिस्पर्धा अपीलीय न्यायाधिकरण (कॉमपेट)

• यह एक सांविधिक संगठन है। इसे प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत स्थापित किया गया है। इसका मुख्य कार्य भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग दव्ारा पारित किसी भी आदेश या दिशा-निर्देश या इसके दव्ारा लिए गए निर्णय के खिलाफ हुए मुकदमों की सुनवाई और उस पर निर्णय देना है।

• अपीलीय न्यायाधिकरण मुआवजे के दावे पर भी निर्णय देगा जो भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के किसी भी निष्कर्ष के खिलाफ अपील में या अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश के निष्कर्षों के खिलाफ उत्पन्न हो सकती है।

प्रतिस्पर्धा कानून क्या है?

• प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 भारतीय प्रतिस्पर्धा कानून का संचालन करता है। इसने 1969 के एकाधिकार तथा प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम (एमआरटीपी एक्ट) (काम करना) को प्रतिस्थापित किया है।

• इस कानून के तहत, भारत में प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग का गठन किया गया था। यह अधिनियम जम्मू -कश्मीर राज्य को छोड़कर पूरे भारत में लागू है।

कानून के उद्देश्य

• मुक्त व्यापार और दो व्यावसायिक संस्थाओं के बीच प्रतिस्पर्धा कम करने वाले समझौतों या गतिविधियों को प्रतिबंधित करना।

• बाजार एकाधिकार की स्थिति पर प्रतिबंध लगाना।

• उद्यमी को बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर प्रदान करना।

• अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और प्रवर्तन नेटवर्क (जाल पर कार्य) को बनाना।

• प्रतिस्पर्धा विरोधी गतिविधियों को रोकना और बाजार में एक निष्पक्ष और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 को संपूर्ण भारत में लागू करने के लिए और भारत में प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए उत्तरदायी निकाय है।