चीनी युआन का अवमुल्यन (Devaluation of Chinese Yuan – Economy)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• वर्ष 2015 की शुरूआत के बाद से अब तक यूआन के मूल्य में डॉलर के मुकाबले 4 प्रतिशत से भी ज्यादा की गिरावट हुई है जिसके कारण यह साढ़े चार वर्ष पूर्व के अपने मूल्य के आस-पास जा पहुंचा है।

• चीनी मुद्रा युआन के हाल ही के अवमूल्यन ने वैश्विक वित्तीय उथल-पुथन को जन्म दिया जो वैश्विक स्तर पर शेयर और मुद्रा बाजार को हानि पहुंचा रहा है।

• युआन का कमजोर होना एशियाई और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुद्राओं के प्रतिस्पर्धात्मक अवमूल्यन को प्रेरित कर सकता है।

युआन की अवमुल्यन का कारण

• चीनी अर्थव्यस्था में मंदी।

• चीन में बहुत अधिक मात्रा में अतिरिक्त उत्पादन।

• चीनी अर्थव्यवस्था को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की सोच।

• चीन में अंतरराष्ट्रीय निवेश बनाए रखने की नीति।

चीन पर अवमूल्यन का प्रभाव

• अपनी मुद्रा का अवमूल्यन करके चीन वैश्विक व्यापार में लाभ प्राप्त करता है। इसके निर्यात विदेशी खरीदारों के लिए सस्ते और अधिक आकर्षक हो जाते हैं।

• युआन के अवमूल्यन से चीन में आयात अधिक महंगे हो जाएंगे तथा मांग (विशेषकर वस्तुओं की मांग) में कमी आएगी। फलत: वस्तुओं की कीमतों पर आगे भी नकरात्मक दबाव बना रहेगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर युआन के अवमूल्यन का प्रभाव:

• इसके कारण भारतीय निर्यात बुरी तरह प्रभावित होंगे। इसे हम इस तथ्य से भी समझा सकते हैं कि भारत के निर्यात में पिछले लगातार 12 महीनों से गिरावट देखी गई है। पुन: विकसित तथा एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में अप्रत्याशित नकरात्मक वृद्धि के कारण जनवरी 2016 के आरंभ तक भारतीय निर्यात में 17.6 प्रतिशत की गिरावट देखी गयी है।

• निर्यात में गिरावट से चालु खाता घाटे (सी.ए.डी.) में भी वृद्धि होगी।

• चिंता का एक अन्य कारण भारत में होने वाले आय भी हैं। 2015 तक के आकंड़े यह प्रदर्शित करते हैं कि भारत के आयात में लगभग 12 प्रतिशत की हिस्सेदारी चीन की है। चीनी प्रतिस्पर्धा में किसी भी प्रकार की वृद्धि चाहे वह युआन के अवमूल्यन के माध्यम से हीं क्यों न हो, भारतीय आयात में अप्रत्याशित वृद्धि का कारण बनेगी।

• चीन आयात में वृद्धि के कारण भारत के अन्य व्यापारिक भागीदारों को भी हानि पहुंचेगी। इसके अतिरिक्त इससे भारत में इलेक्ट्रिकल (विद्युत) और इलेक्ट्रॉनिक्स (विद्युदणु शास्त्र), कार्बनिक रसायन, उर्वरक और लौह तथा इस्पात आदि उद्योग भी प्रभावित होंगे।

• भारतीय रिजर्व (सुरक्षित रखना) बैंक (अधिकोष) को डॉलर के मुकाबले रुपया के मूल्य में युक्तियुक्त गिरावट होने देना चाहिए। यह कंपनियों को कठिन परिस्थितियों में, जब उनकी ऋण लागत में वृद्धि होगी, बाह्य वाणिज्यिक उधारी के लिए प्रेरित करेगा।

विश्व अर्थव्यवस्था पर युआन के अवमूल्यन का प्रभाव

• युआन का अवमूल्यन दुनिया भर में कई प्रमुख देशों के निर्यात को प्रभावित करेगा।

• कमजोर युआन वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर उन्मुख कर सकता है क्योंकि जब भी इस मुद्रा का अवमूल्यन हुआ है, चीन की क्रय शक्ति में कमी देखी गयी है।

• अवमूल्यन वस्तुओं और आयातित माल, की मांग को भी प्रभावित करता है। इससे तेल और अन्य औद्योगिक वस्तुओं की कीमतें गिरती हैं। यहीं कारण है कि चिली और ब्राजील जैसी उभरती बाजार (ई.एम.) अर्थव्यवस्थाओं को इससे नुकसान पहुंच रहा है, जो तांबा और तेल के निर्यात के लिए चीन पर निर्भर है।

• यह जर्मनी जैसे विकसित देशों को भी नुकसान पहुंचाएगा, जो चीन को अपने एक प्रमुख बाजार के रूप में देखते हैं।

• यह एक प्रकार के ”करेंसी वार” (मुद्रा युद्ध) को शुरू कर सकता है, क्योंकि कई देश अपने निर्यात को बचाने के लिए अपनी मुद्राओं के अवमूल्यन की दौड़ में शामिल हो सकते हैं।

• युआन के मूल्य में इस तीव्र गिरावट के कारण चीनी उत्पाद काफी सस्ते हो गए हैं। ये सस्ते उत्पाद कई देशों में उनके घरेलू विनिर्मित उत्पादों की बिक्री को नकरात्मक रूप से प्रभावित करेंगे अथवा कर रहे हैं।

क्या भारत भी अपने रुपये का अवमूल्यन कर सकता है?

• भारतीय निर्यात को बढ़ाने हेतु रुपए के अवमूल्यन को एक जवाबी उपाय के रूप में नहीं लिया जा सकता है, क्योंक भारत कोई आपूर्ति अधिशेष अर्थव्यवस्था नहीं है।

• इसके अलावा, चीन के संदर्भ में हम 60 बिलियन (दस अरब) डॉलर का आयात और 12 बिलियन डॉलर का निर्यात करते है, जो व्यापार घाटे को और अधिक बढ़ाएगा।

आगे की राह: अल्पावधि में,

• चीनी उत्पादों पर आयात शुल्क लगाना एक उपयुक्त कदम होगा। इससे कपड़ा, स्टील (इस्पात), रत्न एवं आभूषण आदि जैसे श्रम गहन क्षेत्रकों की रक्षा करने में मदद मिलेगी जो सस्ते आयात की चपेट में हैं।

दीर्घकाल

• नए व्यापार स्थापित करने को प्रोत्साहित करने के लिए श्रम सुधार।

• सरलीकृत कर संरचना-’वस्तु एवं सेवा कर’ का कार्यान्वयन।

• सरल अनुपालन प्रक्रिया।

• सिंगल (एकल) विंडो (खिड़की) क्लियरेंस (निकासी) ।

• एम.एस.एम. ई. के लिए पूंजी की उपलब्धता।