वैश्विक प्रस्पिर्धा सूचकांक (Global Trends Index-Economy)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

स्विट्‌जरलैंड स्थित (इंटरनेशनल (अंतरराष्ट्रीय) इंस्टट्‌यूट (संस्थान) फॉर (के लिए) मेनेजमेंट (प्रबंध) एंड (और) डवलपमेंट (विकास)) आईएमडी (वर्ड (विश्व) कॉम्पेटिव (प्रतियोगी) सेंटर (केन्द्र)) दव्ारा किये गए सर्वेक्षण के अनुसार भारत के वैश्विक प्रतिस्पर्धा सूचकांक में 3 स्थान का सुधार हुआ हैं।

अवलोकन

• भारत 2015-16 में 44वें स्थान की तुलना में 41वें स्थान पर रहा जबकि चीन 2016 में 22 से 25 तक फिसल गया।

• एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत 11वीं सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था है।

• विनिमय दर स्थिरता, वित्तीय घाटा प्रबंधन और भ्रष्टाचार तथा लालफीताशाही से निपटने के प्रयासों में सुधार देखा गया।

• पिछले 2 वर्षो में स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में निवेश की उपेक्षा के कारण बढ़ती सामाजिक असमानताओं ने भारत (के विकास) को रोक रखा था।

• रैंकिंग (अत्यंत कष्टदायी) दव्ारा आर्थिक विकास को बनाये रखना, शोध और विकास को बढ़ावा देना तथा वस्तु एवं सेवा कर के शीघ्र क्रियान्वयन को प्रमुख चुनौतियों के रूप में पहचाना गया।

• इसमें हांगकांग चीन को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ जबकि अमेरिका को तीसरा।