आई एम एफ सुधार (I. M. F. Improvement – Economy)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• वर्ष 2010 में आई.एस. एफ. एक दव्ारा स्वीकृत सुधारों को 27 जनवरी 2016 से लागू कर दिया गया है।

• अमेरिकी कांग्रेस के बगैर मंजूरी के इन सुधारों का कार्यान्वयन संभव नहीं हो पाया था, परन्तु पिछले वर्ष इसकी (अमेरीकी कांग्रेस दव्ारा) मंजूरी प्रदान कर दी गयी थी।

मताधिकार

• अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एफ.) के गवर्नेंस (प्रशासन) संरचना में उभरती और विकाशील अर्थव्यवस्थाओं के प्रभाव में अधिक वृद्धि हुई है।

• इन सुधारों के फलस्वरूप संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय देशों के हिस्से 6 प्रतिशत से अधिक कोटा उभरते और विकासशील देशों को प्राप्त होंगे।

• नए प्रावधानों के तहत भारत का मताधिकार वर्तमान 2.3 प्रतिशत से बढ़कर 2.6 प्रतिशत और चीन का 3.8 प्रतिशत से बढ़कर 6 प्रतिशत हो गया है।

• रूस और ब्राजील भी इन सुधारों से लाभान्वित हुए है।

• इन सुधारों के कारण, यू. एस, जापान, फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन, चीन और रूस के साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के शीर्ष 10 सदस्यों की सूची में भारत और ब्राजील भी शामिल हो गए हैं।

• इस सुधार प्रक्रिया के कारण कनाडा और सऊदी अरब शीर्ष दस देशों की सूची से बाहर हो गए हैं।

• ब्रिक्स समूह की चार उभरती अर्थव्यस्थायें-ब्राजील, चीन, भारत और रूस- प्रथम बार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के 10 सबसे बड़े सदस्य देशों के समूह में शामिल होंगी।

आई.एम.एफ. की वित्तीय ताकत में वृद्धि

• इन सुधारों ने आई.एम.एफ. के स्थायी पूंजी संसाधनों को दुगुना कर इसे 477 बिलियन (दस अरब) एस.डी.आर (विशेष आहरण अधिकार) (659 बिलियन डॉलर) कर दिया है, जिससे इसकी वित्तीय ताकत में भी वृद्धि हुई है।

आई.एम.एफ. कार्यकारी बोर्ड: (मंडल)

• इन सुधारों का एक पहलु यह भी है कि आई.एम.एफ. के कार्यकारी बोर्ड के लिए कुछ कार्यकारी निर्देशको की नियुक्ति के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है। अब आई.एम.एफ. को कार्यकारी बोर्ड पूरी तरह से निर्वाचित कार्यकारी निदेशकों से मिलकर बना होगा।

• वर्तमान में पाचं सबसे बड़े कोटा धारक सदस्य देशों दव्ारा एक-एक कार्यकारी निदेशक की नियुक्ति की जाती है, इन सुधारों के अस्तित्व में आने से ये प्रावधान अपने आप समाप्त हो गए हैं। इन सुधारों से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की वैधता, विश्वसनीयता, प्रभावशीलता और सुदृढ़ होगी।

आईएमएफ के बारे में

• संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यू (नया) हैम्पशायर के ब्रेटन बुड्‌स में जुलाई 1944 में आयोजित 44 देशों के सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय पुननिर्माण और विकास बैंक ( आई.बी.आर.डी.) के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ( आई.एम.एफ.) की स्थापना की गयी थी।

• वर्तमान में 187 राष्ट्र आई.एम.एफ. के सदस्य है।

• भारत आई.एम.एफ. का संस्थापक सदस्य है।

• अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का उद्देश्य अग्रलिखित है: समष्टि आर्थिक विकास को सुनिश्चित करना, गरीबी कम करना, आर्थिक स्थिरता बनाये रखना, विकासशील देशों के लिए नीतिगत सलाह और वित्त पोषण, मौद्रिक प्रणाली में सहयोग के लिए मंच प्रदान करना, विनिमय दर स्थिरता तथा अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणाली को बढ़ावा देना।

• 1993 के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से कोई वित्तीय सहायता नहीं लिया है। आई.एम.एफ. से लिए गए सभी ऋणों का भुगतान 31 मई 2000 को कर दिया गया।