राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (National Investment And Infrastructure Fund – Economy)

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एनआईआईएफ का उद्देश्य

• अवरुद्ध परियोजनाओं सहित वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य ग्रीनफील्ड (हरितक्षेत्र) और ब्राउनफील्ड (भूरा खेत) परियोजनाओं में अवसंरचना के विकास के माध्यम से आर्थिक प्रभाव को उच्चतम सीमा तक बढ़ाना,

• घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों स्रोतों से निवेश को आकर्षित करना,

• अवसंरचना परियोजनाओं में निवेश प्रवाह बढ़ाना।

• यह भारत में अवसरंचना संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए वर्तमान सरकार दव्ारा शुरू की गई प्रमुख पहल है। कई कोषों को एक साथ मिलाकर यह एक समावेशक की तरह कार्य करेगा।

सुर्ख़ियों में क्यों?

• हाल ही में सरकार ने 40000 करोड़ रुपये के राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष की स्थापना की है।

राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष क्या है?

• यह देश में अवसंरचना क्षेत्र के वित्तपोषण को बढ़ाने के लिए भारत सरकार दव्ारा गठित किया गया एक कोष है।

• चालू वित्त वर्ष में सरकार ने इस हेतु 20000 करोड़ रुपए का योगदान दिया है और शेष 20000 करोड़ रुपए संप्रभु संपदा कोष के माध्यम से एकत्रित किया जाएगा।

• यह सेबी के तहत कैटेगरी II वैकल्पिक निवेश कोष के रूप में पंजीकृत है।

• अवरुद्ध परियोजनाओं सहित अवसंरचना परियोजनाओं के विकास के लिए यह एक संप्रभु कोष है।

• एनआईआईएफ की दोहरी भूमिका होगी- परियोजनाओं में इक्विटी (निष्पक्षता) पूंजी डालना और अवसंरचना परियोजनाओं में निवेश के लिए यथोचित योगदान देना।

राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष के कार्य

• अपतटीय ऋण संवर्धन बांड (समुदाय) और भरोसेमंद निवेशकों को कोष में भागीदार के रूप में भाग लेने के लिए आकर्षित करने जैसे उपयुक्त उपकरणों के माध्यम से कोष बढ़ाना।

• राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष के निवेशकों को सेवा प्रदान करना।

• निवेश के लिए कंपनियों (संघ)/संस्थाओं/परियोजनाओं को ध्यान में रखना और उनका अनुमोदन करना तथा निवेश की समय-समय पर निगरानी करना।

• निजी इक्विटी (निष्पक्षता) में निवेश के लिए परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी (संघ) दव्ारा बनाये गए कोष में निवेश।

• अवसंरचना परियोजनाओं का एक समूह बनाना और सलाहकारी सेवाएँ प्रदान करना।

एनआईआईएफ के लिए स्रोत

• स्ट्रेटजिक (सामरिक) एंकर (आश्रय) साझेदारों से इक्विटी (निष्पक्षता) भागीदारी इसके वित्तीयन का एक प्रमुख स्रोत होगा। भारत सरकार इसे एक संप्रभु कोष के रूप में स्थापित करने के लिए योगदान देगी और उसमें सह-निवेश करने के लिए विदेशी संप्रभु/अर्ध संप्रभु/बहुपक्षीय/दव्पक्षीय निवेशकों को आकर्षित करेगी।

• वार्षिक योजना के आधार पर अपने कार्यों को क्रियान्वित करने के लिए एक वैकल्पिक निवेश कोष के रूप में स्थापित प्रत्येक इकाई के लिए प्रत्येक वर्ष आवश्यकतानुसार सरकार दव्ारा धन मुहैया कराया जाएगा।

• रूस, सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के संप्रभु संपदा कोष और अंतरराष्ट्रीय पेंशन फंड (धन) ने भारत के 40000 करोड़ रुपये के इस राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष के भागीदार बनने में रुचि प्रदर्शित की हैं।

संरचना

• राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष को सेबी के विनियमों के तहत एक या अधिक वैकल्पिक निवेश कोष के रूप में स्थापित किया जाएगा।

• राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष की प्रारंभिक अधिकृत पूंजी 20000 करोड़ रुपये होगी जिसे वित्त मंत्रालय दव्ारा समय-समय पर बढ़ाया जा सकेगा। सरकार इस कोष में प्रति वर्ष 20000 करोड़ रुपये तक का योगदान दे सकती है। वैकल्पिक निवेश कोष के रूप मेें स्थापित प्रत्येक इकाई में सरकार की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत होगी और इसे कम या ज्यादा नहीं किया जा सकेगा। अर्थात, कुल 49 प्रतिशत का योगदान सीधे सरकार दव्ारा किया जाएगा जबकि शेष राशि का योगदान अन्य निकायों दव्ारा किया जाएगा।

गवर्नेस (प्रशासन)

• राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष को कराधान और लचीलेपन की दृष्टि से एक ट्रस्ट (भरोसा)/अन्य कानूनी इकाई के रूप में स्थापित किया जाएगा।

• राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष की गवर्निंग (शासी) कांउसिल (परिषद) में अंतरराष्ट्रीय वित्त विशेषज्ञ, प्रख्यात अर्थशास्त्री और अवसंरचना पेशेवरों के साथ-साथ सरकार के प्रतिनिधि होंगे। इसमें अन्य गैर-सरकारी शेयरधारकों के प्रतिनिधि भी शामिल हो सकते हैं।

• गवर्निंग (शासी) कांउसिल (परिषद) के सदस्यों की नियुक्ति के संबंध में उनकी पदावधि तथा सेवा शर्तो का निर्धारण सरकार दव्ारा किया जाएगा।

• एनआईआईएफ के लिए एक या अधिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी को नियुक्त किया जाएगा और विशेषज्ञ स्टाफ (अधिकारियों का समूह) की सीमित संख्या के साथ एक छोटा निवेश दल भी होगा।

• परियोजना के चयन के लिए एनआईआईएफ के पास पूर्ण स्वायत्तता होगी। परिसंपत्ति प्रबंध कंपनी (संघ) और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों/वित्तीय संस्थाओं के चयन मानदंड के लिए एनआईआईएफ दिशानिर्देश तैयार करेगा और प्रक्रियाओं का पालन करेगा।