पीयर-टु-पीयर लेंडिंग (Peer To Per Lending – Economy)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक ने पीयर-टु-पीयर लेंडिंग (वित्तीय) के लिए नियामक मानदंड बनाने के लिए एक परामर्श पत्र जारी किया है।

• इसमें नियामक दिशानिर्देश तैयार करने के लिए 6 प्रमुख क्षेत्र प्रस्तावित किये गए हैं- अनुज्ञप्त कार्यकलाप, रिपोर्टिंग , प्रूडेंशियल, अभिशासन की अपेक्षाएं, कारोबार में निरंतरता और ग्राहक इंटरफ्रेंस (हस्तक्षेप) ।

• भारत रिजर्व बैंक ने पीयर-टु-पीयर लेंडिंग करने वालों को प्रोत्साहन देने और उन्हें व्यापार के विभिन्न जोखिमों से बचाने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण का प्रस्ताव दिया है। उचित नियमन पीयर-टु-पीयर संस्थाओं की साख बढ़ाएगा और इस तरह उनके विकास में मदद करेगा।

पीयर-टु-पीयर लेंडिंग क्या हैं?

• यह ऋण वित्तपोषण की एक विधि है जो बिना किसी वित्तीय संस्था की मध्यस्थता के लोगों को उधार लेने और पैसा उधार देने में सक्षम बनाती है।

• यह उन उधारकर्ताओं तक ऋण की पहुँच सुगम बनाती है जो परंपरागत वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से ऋण प्राप्त करने में असमर्थ हैं।

• पीयर-टु-पीयर लेंडिंग उन व्यक्तियों का मुनाफा बढ़ा देती है जो पूंजी उपलब्ध कराते हैं और इसका उपयोग करने वालों के लिए ब्याज दर कम हो जाती है। हालांकि यह लोगों से अधिक समय और प्रयास की मांग करती है, और इसमें जोखिम भी अधिक हैं।

• पीयर-टु-पीयर लेंडिंग एक आनलाइल मंत्र के उपयोग के रूप में उधारकर्ताओं को एक साथ लाता है। ऋणदाता अपनी बचत/निवेश को एक खाते में ऋण देने के लिए डाल देता है और उस पर अच्छी दर से मुनाफा मिल जाता हैं।

फेयरसेन्ट और लेनडेन देश में दो प्रमुख ऑनलाइन ऋण पोर्टल हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए पीयर-टु-पीयर लेंडिंग के साथ

• यह लागत को कम करके, पूंजी तक पहुँच को बढ़ा सकता है।

• अगर आम जनता आपस में एक मजबूत प्रणाली के तहत उधार देने और लेने में सक्षम होगी, तो यह संभवत: अवसंरचना और अन्य पूंजी व्यय के लिए धन उपलब्ध कराएगा।

• यह निवेश मंच का एक वैकल्पिक रूप हैं।

• आसान और तेज ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया उपभोक्ताओं के लिए लेन-देन की लागत कम कर देगी

• उधारकर्ता पारंपरिक बैंक ऋण की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर जल्दी से उधार दे पाएंगे।

• उधारकार्ता कोई व्यक्ति या करोबारी फर्म हो सकता है और ये कम राशि का निवेश करके अधिक ब्याज कमा सकते हैं।

• ऋण के सैकड़ों या हजारों पोर्टफोलियों (व्यक्ति/बैंक के निवेश) में निवेश कर सकने से निवेश जोखिम भी कम होगा।

• ऋण देने का धर्मार्थ पहलू भी हो सकता है, क्योंकि धन का उपयोग सामाजिक उद्देश्य के लिए भी किया जाता हैं।

विनियमित करने की जरूरत क्यों है?

• पीयर-टु-पीयर बाजार में फेयरसेन्ट, लेनडेन क्लब (मंडली), आदि कई कंपनियाँ प्रवेश कर रही हैं।

• नियमों के बिना चिट फंड (ऋण प्रदान करना), लघु वित्तपोषण और पैरा बैंकिंग खंड जैसे खतरों के दोहराने का भय है।

• उपभोक्ताओं के साथ-साथ उद्योग के हितों में संतुलन बनाये रखने के लिए भी नियम महत्वपूर्ण हैं।

पीयर-टु-पीयर ऋण के नुकसान और चुनौतियां

• ब्याज की उच्च दर-16 से 20 प्रतिशत।

• ऋण चुकाने के अच्छे इतिहास के न होने से बहुत सारे उधार लेने वाले इससे बाहर हो सकते हैं।

• डिफ्रॉल्ट (कर्ज़ अदा न करना) होने की संभावना अधिक है, वो भी तब जब उधारकर्ता को पारंपरिक बिचौलियों दव्ारा अस्वीकार कर दिया जाए।

• पीयर-टु-पीयर निवेश रातों-रात अमीर बनने की कोई योजना नहीं है, कई लोगों को इसे लेकर ग़लतफहमी है।

• इसमें ऋण जोखिम बहुत अधिक है क्योंकि अगर निवेश को उचित जोखिम विविधीकरण के साथ निवेशित नहीं किया तो ऋणदाता का सारा पैसा डूब सकता हैं।

• कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (राजनीतिक दल का कार्यक्रम) ऋण के चयन और बोली लगाने की प्रक्रिया में वित्तीय परिष्कार की मांग करते हैं जो कई लोगों के पास नहीं हैं।

• काले धन की व्यापकता और पीयर-टु-पीयर ऋण की काले धन को सफ़ेद करने की क्षमता संदेहात्मक ऋणदाताआंे को आकर्षित करेगी।

आगे की राह

• भारत विश्व में सबसे बड़े ऑफलाइन पीयर-टु-पीयर ऋण बाजारों में से एक है तथा यहां लगभग 50 प्रतिशत ऋण दोस्तों, परिवारों और समुदायों में लिए-दिए जाते हैं, इसलिए यहां प्रौद्योगिकी सक्षम पीयर-टु-पीयर ऋण की विशाल क्षमता मौजूद हैं।

• उपभोक्ताओं को इस अभिनव क्रेडिट पहुँच मॉडल (आर्दश) के बारे में शिक्षित करने की आवश्यकता है।

• आरबीआई और सेबी को इस क्षेत्र के लिए नियम बनाने चाहिए।