प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (Minister of Rural Development-Economy)

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• सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बारहमासी सड़कों के माध्यम से संपूर्ण ग्रामीण संपर्क प्राप्त करने के लक्ष्य को तीन साल घटा दिया गया है। यानी वर्ष 2022 के स्थान पर वर्ष 2019 तक इसे हासिल किया जाएगा।

• इस त्वरित कार्यान्वयन को वर्ष 2015-16 के लिए 5,000 करोड़ रुपये तक सवंर्धित वित्तीय आवंटन और संशोधित वित्त-पोषण पद्धति के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा।

• फंड (संचय) के बंटवारें का पैटर्न (प्रतिमान) उत्तर-पूर्व के 8 और 3 हिमालयी राज्यों को छोड़कर शेष सभी राज्यों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के अनुपात में होगा। उत्तर-पूर्व के 8 और 3 हिमालयी राज्यों के लिए यह 90:10 होगा।

• ऐसे राज्यों को अधिक धन हस्तांतरित करने की 14वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के परिणामस्वरूप किया गया है।

इस योजना के विषय में कुछ तथ्य

• सभी पात्र असंबद्ध ग्रामीण बस्तियों को बारहमासी सड़क संपर्क प्रदान करने के उद्देश्य से पीएमजीएसवाई का शुभारंभ वर्ष 2000 में केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में किया गया था।

• ग्रामीण विकास मंत्रालय नोडल (ग्रंथि संबंधी) मंत्रालय है और इस योजना का प्रबंधन राष्ट्रीय ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी (साधन) (एनआरआरडीए) कर रही है।

• पीएमजीएसवाई-1 के अंतर्गत 1,78,184 असंबद्ध बस्तियों की पहचान की गई थी। हालांकि, अभी तक कार्यान्वयन के 15 वर्षो में, केवल 1,12,550 बस्तियों (63 प्रतिशत) को ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़कों से जोड़ा जा सका है।

• प्राथमिकता आधार पर सांसद आदर्श ग्राम योजना (एसएजीवाई) के अंतर्गत संसद सदस्यों दव्ारा गोद लिए गए मॉडल (आदर्श) गांवों में ग्रामीण सड़कें प्रदान करने के लिए सरकार ने फरवरी 2015 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के दिशा-निर्देंशों में संशोधित किया था।