प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Prime crop insurance scheme-Ecology)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• यह दो योजनाओं राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एनएआईएस) और संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एमएनआईएएस) की जगह लेगा।

पूर्ववर्ती योजनाओं से जुड़े मुद्दे

• सरकारी रिपोर्ट (विवरण) के अनुसार, मौजूदा उपज आधारित और मौसम आधारित फसल बीमा योजना के लगभग 37 मिलियन (दस लाख) अथवा 27 प्रतिशत खेती करने वाले परिवारों को कवर (आवरण) किया जा रहा था।

• वर्तमान फसल बीमा योजना के तहत जोखिम को केवल आंशिक रूप से कवर किया जा रहा था।

• खरीफ फसलों के लिए मौजूदा प्रीमियम (अधिमूल्य) दरें 2.5 प्रतिशत से लेकर 3.5 प्रतिशत की सीमा में तथा रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत से 2.5 प्रतिशत तक की सीमा में निर्धारित किया जाता था किन्तु क्षतिपूर्ति अधिकतम कितनी भूमि पर नुकसान के लिए प्रदान की जाएगी, इसकी सीमा निर्धारित थी। जिसका अर्थ है किसानों उनके नुकसान का एक अंश ही प्राप्त हो सकता था।

• वणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए प्रीमियम (अधिमूल्य) की गणना बीमांकिक आधार पर की जाती थी, जिसका अर्थ है कि ऐसे प्रीमियम बीमा में शामिल जोखिम के आधार पर कुल बीमित राशि के 25 प्रतिशत हो सकते थे।

• फसल क्षति के आकलन में पारदर्शिता का अभाव रहा है और इस हेतु नवीनतम तकनीकों का उपयोग नहीं किया जाता था।

• मुआवजा प्रदान करने की प्रक्रिया में काफी समय लगता था, यहां तक कि कई मामलों में एक वर्ष से भी अधिक का समय लग जाया करता है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की मुख्य विशेषताएं

• प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को इस साल खरीफ फसल के मौसम के दौरान आरंभ किया जाएगा।

• इस योजना का लक्ष्य अगले तीन साल में भारत की फसली क्षेत्र के आधे भाग को कवर (आवरण) करना है। वर्तमान कवरेज (विज्ञापन क्षेत्र) लगभग 23 प्रतिशत है।

• किसानों दव्ारा भुगतान की जाने वाल प्रीमियम (अधिमूल्य) की दरें एक समान होंगी। इसके तहत सभी प्रकार के खरीफ फसलों के लिए केवल 2 प्रतिशत तथा सभी रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत का प्रीमियम देय होगा।

• वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के मामले में, किसानों दव्ारा केवल 5 प्रीमियम (अधिमूल्य) का भुगतान करना होगा। सरकारी सब्सिडी (सरकार दव्ारा आर्थिक सहायता) पर कोई ऊपरी सीमा नहीं है। यहाँ तक कि यदि शेष प्रीमियम 90 प्रतिशत है, तो उक्त राशि का भार सरकार दव्ारा वहन किया जाएगा।

• प्रीमियम (अधिमूल्य) सब्सिडी (सरकार दव्ारा आर्थिक सहायता) पर सरकारी दायित्व केंद्र और राज्यों दव्ारा समान रूप से साझा किया जाएगा।

• सरकार ने फसल बीमा के लिए बजट आवंटन में काफी वृद्धि की है। इसे 2015-16 के लिए आवंटित 2,823 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2018-19 के लिए 7,750 करोड़ रुपया कर दिया गया है।

• ओलावृष्टि, बेमौसम बारिश, भूस्खलन और बाढ़ सहित स्थानीय आपदाओं के लिए खेत स्तरीय मूल्यांकन प्रदान करने की सुविधा को उपलब्ध कराते हुए इस योजना के दव्ारा किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को भी संबोधित किया जाएगा।

• प्रौद्योगिकी के उपयोग को काफी हद तक प्रोत्साहित किया जाएगा।

• फसल काटने के आंकड़ों को प्राप्त करने के लिए स्मार्ट (आकर्षक) फोन का प्रयोग फोटो खींचने तथा उसे अपलोड करने में किया जाएगा। इसें किसानों को उनके दावे के भुगतान में होने वाली देरी को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

• रिमोट (दूरस्थ) सेंसिंग (संवेदन) का इस्तेमाल फसल काटने प्रयोगों की संख्या को कम करने के लिए किया जाएगा।

• सरकार ने कहा है कि मौसम आधारित फसल बीमा योजना (डब्ल्यूबीसीआईएस) के मामले में, प्रीमियम दरों का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अनुरूप युक्तिसंगत बनाया जाएगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 1 अप्रैल 2016 से प्रभावी हो गया है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लाभ

• कुछ इलाकों में निरंतर सूखा और बेमौसम बारिश तथा ओला पड़ने से यह स्पष्ट हो गया है कि खेती में जोखिम लगातार बढ़ती जा रही हैं और सफल बीमा की मौजूदा प्रणाली किसानों की इन समस्याओं का समाधान करने में असफल रही है।

• किसानों दव्ारा भुगतान की जाने वाली प्रीमियम दरें बहुत ही कम हैं तथा प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाली फसल हानि के एवज में किसानों को पूर्ण बीमित राशि प्रदान करने के लिए शेष प्रीमियम का भुगतान सरकार दव्ारा किया जाएगा।

• कम प्रीमियम के कारण बीमा कंपनियों (संघो) तथा फसल बीमा की संख्या में वृद्धि होगी और बीमाकर्ताओं के लिए बीमा योजनायें व्यवहारिक तौर पर उपलब्ध होंगी।

• चूंकि इसमें फसल कटाई के बाद (पोस्ट-हार्वेस्ट) (फसल कटाई के बाद) के घाटे को भी शामिल किया गया है, अत: यह किसानों को सुरक्षा और आत्मविश्वास प्रदान करेगा।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की निम्नलिखित कमियों की कृषि अधिकार समूहों दव्ारा पहचान की गई है

• बीमा से संबंधित समस्याएं प्रीमियम दरों से अधिक व्यापक हैं। उदाहरण के लिए, कई राज्यों में जहाँ एमएनआईएएस की प्रीमियम दरें काफी कम हैं, फिर भी वहां अभी भी बहुत कम लोगों के पास ऐसी बीमा उपलब्ध है।

• सरकार को यह उम्मीद है कि बीमा कवर अगले तीन वर्षों में मौजूदा 23 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत तक हो जाएगी। सरकार का यह अनुमान वस्तुत: तथ्यों व आंकड़ों के बजाए उम्मीदों पर अधिक आधारित है, जबकि पिछले अनुभव यह बताते हैं कि ऐसी सभी उम्मीदें धराशायी हो गयीं हैं।

• केंद्र और राज्य सरकारों के बीच 50:50 के अनुपात में सब्सिडी (आर्थिक सहायता) का वहन किया जाना है। परन्तु अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्या राज्य अपने हिस्से की ऐसी सब्सिडी को वहन करने के लिए सहमत हो गए हैं।

• इस योजना के अंतर्गत काश्तकारों की समस्या का समाधान करने के लिए ऐसा कुछ भी प्रतीत नहीं हो रहा है जो फसल खराब होने की जोखिम तो सहन करते हैं लेकिन मुआवजा और बीमा भुगतान के लिए हकदार नहीं होते हैं।

• जंगली जानवरों दव्ारा फसल नुकसान जैसे जोखिम अभी भी कवर नहीं किये गए हैं।

• ’आकलन की इकाई’ फसल नुकसान या क्षति मुआवजा से जुड़ा हुआ एक प्रमुख मुद्दा है, जिसे नई योजना में ध्यान नहीं दिया गया है।

पूर्ववर्ती योजनाओं के साथ तुलना

मानक

एनएआईएस

(1999)

एमएनएआईएस

(2010)

पीएम क्रोप (फसल) इन्श्योरेन्स (बीमा) स्कीम (योजना

प्रीमियम (अधिमूल्य)

लो (कम)

हाई (उच्च)

लोयर (झूठा) देन ईवन (यहाँ तक की) एनएआईएस एंड (और) गवरमेंट (सरकार) टू (की ओर) कॉन्ट्रिब्यूट (योगदान देना) 5 टाइम (समय)

वन (एक) मौसम

वन (एक) प्रीमियम (अधिमूल्य)

हां

न्हीं

हां

इन्श्योंरेन्स (बीमा) अमाउंट (रकम) कवर (आवरण)

फुल (पूर्ण)

कोप्ड (सामना)

फुल (पूर्ण)

वन (एक) अमाउंट (रकम) पेमेंट (भुगतान)

नहीं

ळां

हां

लोकलीस्ड () रिस्क (जोखिम) कवरेज (विस्तृत जानकारी)

नहीं

हाई (उच्च) स्ट्रोम (आंधी), लैंड (भूमि) स्लाईड (फिसल पट्‌टी )

हाई (उच्च) स्ट्रोम (आंधी), लैंड (भूमि) स्लाईड (फिसल पट्‌टी), इन्यूनडेशन (सैलाब)

पोस्ट-हारवेस्ट (फसल काटने के बाद)

न्हीं

कोस्टल (तटीय) एरिया (क्षेत्र)- फॉर (के लिए) साइलोनीक (चक्रवाती) रैन (बरसात)

ऑल (सब) इंडिया (भारत)-फॉर (के लिए) साइलोनीक (चक्रवाती) एंड (और) अनसीजनल (बेमौसम) रैन फॉल (वर्षा)

प्राईवेंटड (रोका) सोविंग (धक्का) कवरेज (विस्तृत सूचना)

नहीं

ळां

हां

यूज (उपयोग) ऑफ (का) टेकनोलॉजी (तकनीकी विधिया)

नहीं

इनटेनडेड (इरादा)

मोनडेट्ररी (अनिवार्य)

अवेयरनेस (जागरूकता)

नहीं

न्हीं

हां (टारगेट (लक्ष्य) टू (की ओर) डबल (दोहरा) कवरेज (विस्तृत सूचना) टू (की ओर) 50 प्रतिशत)