कॉर्पोरेट धोखांंधड़ी के लिए विशेष संस्था (Special Institution for Corporate Fraud – Economy)

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पृष्ठभूमि

• सत्यम घोटाला जिसमें लेखा परीक्षक भी शामिल था, के बाद पहली बार यह सुझाव आया कि कंपनी (संभा) एक्ट (काम करना) 2013 को नेशनल (राष्ट्रीय) फाइनेंसियल (वित्तीय संबंधी) रिपोर्टिंग (विवरण) अथॉरिटी (आदेश देने और उसका पालन कराने का अधिकार) (एनएफआरए) के गठन की जरूरत है जो कि न सिर्फ आधिकारिक घोषनाओं बल्कि लेखा-परीक्षण पेशे को भी नियमित करने की महत्वपूर्ण शक्तियों से लैस (अल्प) हो।

• वर्तमान में एक लेखा परीक्षक के किसी केस में शामिल होने की स्थिति में भारतीय चार्टर्ड एकांउटेंट्‌स (सब प्रकार के विवरण) संस्थान (आईसीएआई) जांच करने व अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का अधिकार रखता है। सरकार दव्ारा तय सीमा से निचले स्तर की किसी भी धांधली की जाचं अभी भी पेशेवर संगठन दव्ारा कराई जा सकती है।

प्रस्तावित संस्था का विवरण

• यह 2013 के कंपनी (सभा) एक्ट (काम करना) के प्रावधानों के तहत बनाई जाएगी।

• यह संस्था स्वत: संज्ञान से या केंद्र दव्ारा विनिर्दिष्ट करने पर, कतिपय वर्गों में सूचीबद्ध कंपनियों या 500 करोड़ रु. और उससे ऊपर के ऑडिटिंग (लेखा परीक्षा) व एकाउंटिंग (गणना) धोखाधड़ी की जांच का अधिकार रखेगी।

• इसके पैनल (तालिका) में फोरेंसिक (अदालती) ऑडिटर (लेखा परीक्षक) होंगे।

• चार्टर्ड (अधिकार-पत्र) एकाउंटेंट्‌स (सब प्रकार के विवरण) को विनियमित करने के लिए इसकी व्यापक भूमिका होगी।

फॉरेंसिक (अदालती) ऑडिट (लेखांं परीक्षा) क्या है?

फॉरेंसिक ऑडिट किसी व्यक्ति की या कंपनियों के वित्तीय बयानों की सत्यता और वैधता की समीक्षा करने की प्रक्रिया है। इसके दव्ारा कॉर्पोरेट (संयुक्त संस्था) एकाउंटिंग (गणना) धोखाधड़ी का पता लगाया जाता है।