विश्व बैंक (अधिकोष) की रिपोर्ट (विवरण) - ‘अत्यधिक गरीबी का खात्मा समृद्धि को साझा करना प्रगति और नीतियाँ’ (World Bank Report-' Extinction of extreme poverty, punishment for prosperity: Progress and Policies-Economy)

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• विश्व बैंक ने वैश्विक गरीबी रेखा को संशोधित करके 1.25 डॉलर प्रतिदिन से बढ़ाकर 1.90 डॉलर (लगभग 130 रू.) प्रतिदिन कर दिया है।

• यह दुनिया की 15 सबसे गरीब अर्थव्यवस्थाओं की राष्ट्रीय गरीबी रेखा के औसत के आधार पर निर्धारित की गयी है।

• 2011 के नए क्रय शक्ति समता (पीपीपी) के आंकड़ों का उपयोग करते हुए गरीबी रेखांं को स्थानीय मुद्रा से अमरीकी डॉलर में परिवर्तित किया गया।

• नए आंकड़ों के आधार पर अनुमान के अनुसार करीब 90 करोड़ लोग (वैश्विक जनसंख्या का लगभग 12.8 फीसदी) अत्यधिक गरीबी में जीवन व्यतीत करते हैं।

• सतत विकास लक्ष्यों को अपनाने के साथ, दुनिया से गरीबी के सभी रूपों को समाप्त करने के उद्देश्य से विश्व बैंक समूह ने 2030 तक दुनिया में अत्यधिक गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या को विश्व की कुल जनसंख्या के 3 प्रतिशत से भी कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

भारतीय दृष्टिकोण

• स्शााेंधित मिश्रित संदर्भ अवधि के अनुसार 2011-12 में भारत में गरीबी केवल 12.4 प्रतिशत हो सकती है।

• यह कहा जा रहा है कि भारत अपने यहां गरीबों की संख्या का अधिमूल्यांकन करता रहा है।

• विश्व बैंक ने आंकड़ों के संग्रहण के लिए एक नई विधि का इस्तेमाल किया है, जिसे संशोधित मिश्रित संदर्भ अवधि (एमएमआरपी) कहा जाता है।

• यद्यपि 2012 में भारत में गरीबों की संख्या सबसे अधिक थी, फिर भी गरीबों की अत्यधिक जनसंख्या वाले देशों की तुलना में भारत की गरीबी दर सबसे कम थी।

• भारत में गरीबी रेखा के आस-पास रहने वाले लोगों की संख्या काफी अधिक है, इसलिए गरीबी आकलन काफी भिन्न हो जाता है जो कि सर्वेक्षण की आकलन अवधि पर निर्भर करता है।

गरीबी पर विश्व बैंक और रंगराजन समिति की रिपोर्ट की तुलना

भारतीय आकलन

विश्व बैंक की रिपोर्ट

गरीबी की दर

यह रंगराजन समिति दव्ारा 29.5 प्रतिशत और तेंदुलकर समिति की रिपोर्ट में 21.9 प्रतिशत आंकी गई थी।

विश्व बैंक का अनुमान हे कि यह सिर्फ 12.4 प्रतिशत ही है

गरीबी रेखा

क्रय शक्ति समतुल्यता (पीपीपी) के आधार पर रंगराजन समिति दव्ारा प्रयुक्त गरीबी रेखा 2.44 डॉलर प्रति दिन प्रति व्यक्ति है।

विश्व बैंक ने वैश्विक गरीबी रेखा में संशोधन करके इसे 1.90 डॉलर प्रतिदिन प्रति व्यक्ति कर दिया है।

पद्धति

भारत में डाटा (आधार सामग्री) एकत्रित करने के दो मुख्य तरीके हैं: समान संदर्भ अवधि और मिश्रित संदर्भ अवधि

विश्व बैंक ने संशोधित मिश्रित संदर्भ अवधि पद्धति का इस्तोमल किया है। ऐसा अनुमान है कि यह पद्धति उपभोग व्यय का एक अधिक सटीक आकलन प्रदान करती है।

अंतर के

जिस तरीके से आंकड़ों का संग्रहण किया जाता है, उसके कारण

विश्व बैंक के कम गरीबी अनुपात का कारण गरीबी रेखा को निम्न स्तर पर निर्धारित करना है

गरीबी की गहनता

भारत में इसे अलग तरीके से आकलित किया जाता है- गरीबी रेखा के लिए विभिन्न सीमाओं का प्रयोग करके प्राप्त किये गए गरीब अनुपातों के दव्ारा गरीबी की गहनता को अनुमान किया जाता है।

विश्व बैंक की रिपोर्ट व्यक्ति-समकक्ष हेडकाउंट्‌स (कर्मचारियों की संख्या) के आधार पर गरीबी की गहनता का उल्लेख करती है।

गरीबी के आयाम

हम गरीबी के अनुमानों के लिए एक-आयामी दृष्टिकोण को इस्तेमाल करते आये हैं।

विश्व बैंक रिपोर्ट लोगों दव्ारा अनुभव किये जाने वाले गरीबी के कई आयामों को समझने के महत्व पर जोर देती हैं।

स्शााेंधित मिश्रित संदर्भ अवधि (एमएमआरपी) क्या है?

• इस विधि में कुछ खाद्य पदार्थों के लिए 30 दिन के बजाय केवल 7 दिन के आंकड़े एकत्र किये जाते है।

• कुछ कम-आवृत्ति वाली वस्तुओं के लिए 30 दिन के बजाय एक 1 वर्ष के आंकड़े एकत्र किये जाते हैं।

• कम-आवृत्ति वाली वस्तुओं में स्वास्थ्य, शिक्षा, वस्त्र टिकाऊ वस्तुओं आदि पर होने वाला खर्च सम्मिलित है।

निष्कर्ष

• भारत में गरीबी के संबंध में विश्व बैंक के 12.4 प्रतिशत के इस आकलन का यह मतलब नहीं है कि अधिकांश भारतीय अचानक समद्ध हो गए हैं। वस्तुत:, यह उन आंकड़ों के संग्रहण पर आधारित है जिसके आधार पर गरीबी दर का निर्धारण किया जाता है।