विश्व व्यापार संगठन की नैरोबी वार्ता (World Trade Organization Nairobi Talks – Economy)

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• विश्व व्यापार संगठन का दसवां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 15 से 19 दिसंबर 2015 के बीच नैरोबी (केन्या) में आयोजित किया गया।

• सम्मेलन का समापन ”नैरोबी पैकेज” की स्वीकृति के साथ हुआ। ”नैरोबी पैकेज” कृषि, कपास और अल्प विकसित देशों के मुद्दों से संबंधित (छह मंत्रिस्तरीय सम्मेलनों की श्रृंखला के बाद लिया गया निर्णय) है।

कृषि

• विकासशील देशों के लिए स्पेशल सेफ़गार्ड मैकेनिज्म (एसएसएम विशेष सुरक्षा उपाय)- आयात में अप्रत्याशित वृद्धि या कीमतों में गिरावट की स्थिति में यह तंत्र विकासशील देशों को कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क को अस्थायी रूप से बढ़ाने की अनुमति देता है।

• खाद्य सुरक्षा उद्देश्यों के लिए सार्वजनिक स्टॉकहोल्डिंग (भंडार जागीर) -इसका उपयोग कुछ विकासशील देशों दव्ारा प्रशासित (सरकार दव्ारा निर्धारित) कीमतों पर खाद्य पदार्थ खरीदने और गरीब लोगों को वितरित करने के लिए किया जाता है।

निर्यात प्रतिस्पर्धा

• सामूहिक रूप से कुछ मुद्दों जैसे कृषि निर्यात सब्सिडी का उन्मूलन, निर्यात ऋण के नये नियम, अंतरराष्ट्रीय खाद्य सहायता आदि को ”निर्यात प्रतिस्पर्धा” के रूप में जाना जाता है।

• यह गरीब देशों के किसानों के लिए विशेष रूप से सार्थक होगा जो उन अमीर देशों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते जो सब्सिडी के माध्यम से अपने निर्यात को बढ़ावा देते हैं।

• कपास-बाजार पहुंच पर, नैरोबी प्रस्ताव के अनुसार 1 जनवरी 2016 से अल्प विकसित देशों (एलडीसीएस) के कपास निर्यात को विकसित देशों तथा वैसे विकासशील देशों के बाजारों में शुल्क मुक्त और कोटा मुक्त पहुंच दी जानी है जो खुद को ऐसा करने में सक्षम घोषित करते हैं।

अल्प विकसित देशों के मुद्दे

• अल्प विकसित देशों के लिए प्रेफ़ेरेन्शियल (अधिमान्य) रूल (नियम) ऑफ़ (का) ओरिजिन (मूल) - विश्व व्यापार संगठन के समझौतों में इन देशों के लिए व्यापार के अवसरों में वृद्धि और विश्व व्यापार संगठन के नियमों को लागू करने में उदारता की अनुमति संबंधी प्रावधान सम्मिलित हैं।

• अल्प विकसित देशों के सेवाओं और सेवा प्रदाताओं के लिए अधिमान्य व्यवहार का कार्यान्वयन और सेवा व्यापार में अल्प विकसित देशों की भागीदारी में बढ़ोत्तरी करना।

भारत का दृष्टिकोण

नैरोबी घोषणा भारत के लिए कई मोर्चो पर निराशाजनक रही

• स्पेशल (विशेष) सेफ़गार्ड (रक्षा) मैकेनिज्म (तंत्र) संबंधी अपनी मांगों को लेकर विश्वसनीय आउटकम (परिणाम) प्राप्त करने, खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों के लिए सार्वजनिक स्टॉकहोल्डिंग तथा दोहा विकास एजेंडा (कार्यसचूी) वार्ता जारी रखने के लिए पुन: पुष्टि के अपने उद्देश्यों के संदर्भ मेें भारत विफल रहा है। भारत की बहुत कम या शायद ही कोई माँग पूरी हुई है।