शिक्षा का व्यवसायीकरण (Commercialization of Education – Social Issues)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि राज्य के पास निजी गैर-सहायता प्राप्त शिक्षा संस्थान में प्रवेश को विनियमित करने और फीस निर्धारित करने का अधिकार है।

सर्वोच्च न्यायालय का फैसला

• निजी गैर-सहायता प्राप्त पेशेवर संस्थानों को स्थापित करने और प्रशासित करने का अधिकार निरपेक्ष नहीं है।

• प्रवेश और फीस को विनियमित करने की राज्य की शक्ति व्यापक जनहित के लिए एक युक्तियुक्त प्रतिबंध है।

• न्यायालय ने कहा कि शिक्षा संस्थान कभी एक कारोबार नहीं बन सकते।

याचिकार्ताओं के तर्क

• उनके पास अनुच्छे 19 (1) (जी) के तहत ”कोई भी पेशे अपनाने, या व्यवसाय, व्यापार या कारोबार” करने का अधिकार है।

• अपने पहले के फैसलों में सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षण संस्थान के प्रशासन को संविधान के तहत एक ’व्यवसाय’ के रूप में मान्यता दी थी।

फैसले के निहितार्थ

• राज्य की नियामक शक्तियां शिक्षा के व्यवसायीकरण और मुनाफाखोरी को रोकेगी।

• यह विशेष रूप से गरीब वर्ग के छात्रों के बीच शिक्षा की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करेगा।