विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) (University Grant Commission – Governance And Governance)

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सुर्खियों मेंं क्यों?

• हाल ही में, टी.एस. आर सुब्रमन्यम समिति दव्ारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सिफारिश की गई है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम को व्यपगत कर देना चाहिए और इसके स्थान पर एक नए राष्ट्रीय उच्च शिक्षा अधिनियम को पारित किया जाना चाहिए।

यूजीसी के बारे में

• विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एक विधिक संस्था है जिसकी स्थापना यू.जी.सी. अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के तहत मानव संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत केंद्र सरकार के दव्ारा की गयी।

• इसे देश भर के विद्यार्थी समुदाय के हितों से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लेने और संबंधित संवाद प्रक्रिया प्रारंभ करने के लिए अधिदेशित किया गया है।

• यूजीसी के दव्ारा किये जाने वाले तीन प्रमुख प्रकार्य हैं:

o भारत में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को दिए जाने वाले अनुदानों संबंधी मामलों को देखना

o लाभार्थियों को स्कालरशिप/फेलोशिप प्रदान करना

o अपने विनियमन के विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों के दव्ारा अनुपालन की निगरानी करना।

यूजीसी से संबंद्ध मुद्दे

• फेलोशिप में देरी के उदाहरण नियमित रूप से प्राप्त होने लगे हैं ऐसे में सुविधाविहीन वर्ग को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

• यह गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करने में असफल रही है। QS उच्च शिक्षा प्रणाली सामर्थ्य रैकिंग के अनुसार, भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली सामर्थ्य को 50 देशों की सूची में 24 वां स्थान दिया गया है।

• इसकी नीतियां दो विपरीत मुद्दों से पूरी तरह प्रभावित है- जहाँ एक ओर विनियमन का अभाव है वहीं दूसरी ओर अति विनियमन की समस्या है।

आगे की राह

• समस्याओं के समाधान के लिए सर्वप्रथम यूजीसी को नियोजन और निचले पायदानों पर कर्मचारियों के अभाव की समस्या पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

• तत्पश्चात इसे समिति की सिफारिशों के अनुरूप स्वयं को ढालना होगा। इसे अपनी सर्वव्यापी भूमिका में बदलाव करते हुए खुद एक नोडल (पातिक, ग्रंथिल) संगठन के रूप में कार्य करना चाहिए तथा साथ ही फेलोशिप मैत्रीपूर्ण साहचर्य/छात्रवृत्ति) के वितरण के लिए इसके दव्ारा एक अलग तंत्र के निर्माण कार्य किया जाना चाहिए।

ये कदम इसे गुणवत्ता शिक्षा जैसे अधिक प्रासंगिक मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनायेंगे।