राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के प्रमुख निर्णय (Chief Justice of National Green Tribunal – Environment And Ecology)

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अपनी 186वीं रिपोर्ट (विवरण) में विधि आयोग ने जल (प्रदूषण का निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974, वायु (प्रदूषण का निवारण और नियंत्रण) अधिनिमय 1981, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, सार्वजनिक दायित्व बीमा अधिनियम, 1991 के अंतर्गत संबंधित प्राधिकरणों दव्ारा पारित आदेशों के अनुपालन हेतु प्रत्येक राज्य में पर्यावरणीय न्यायालयों की स्थापना की अनुशंसा की थी।

इन अनुशंसाओं के अनुरूप र्प्यावरण एवं वन मंत्रालय ने 18 अक्टूबर, 2010 को एनजीटी अधिनियम, 2010 के अंतर्गत राष्ट्रीय हरित न्यायालय (एनजीटी) की स्थापना की।

राष्ट्रीय हरित न्यायालय अधिनियम, 2010

• न्यायाधिकरण के पास सिविल (नागरिक) प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत दीवानी न्यायालय में निहित शक्तियों हैं लेकिन यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों दव्ारा निर्देशित होगा।

• यह न्यायाधिकरण तीव्र पर्यावरणीय न्याय (6 महीने के भीतर आवदेनों का निपटान) प्रदान करेगा और उच्च न्यायालयों में मुकदमे का बोझ कम करने में सहायता करेगा।

• यह न्यायाधिकरण वन संरक्षण अधिनियम और जैव विविधता अधिनियम जैसे अधिनियमों से संबंधित वादों पर भी सुनवाई करेगा।

• इस न्यायाधिकरण के पास ”पर्यावरण से संबंधित गंभीर प्रश्नों” (अर्थात, जब बड़े पैमाने पर समुदाय या सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभावित हो) और प्रदूषण जैसी विशिष्ट गतिविधियों के कारण होने वाली ”पर्यावरण को क्षति” के प्रकरणों में मूल क्षेत्राधिकार है।

हालिया कार्रवाईयां

प्रदूषण

• दिसंबर 2015 में, एनजीटी ने केंद्र से पुराने वाहनों को शहर से बाहर हटाने के लिए नीति के संबंध में पूछा कि क्या दिल्ली से पुराने वाहनों को अन्य शहरों, जो कम प्रदूषित हैं, में स्थानांतरित करने के लिए कोई नीति है। एनजीटी ने दिल्ली से पुराने वाहनों को बाहर करने का सुझाव दिया था क्योंकि इसने शहर में 10 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

• केरल के कोच्चि जिले में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की पीठ राज्य के छह प्रमुख शहरों में 10 वर्ष से अधिक पुराने सभी डीजल (ईंधन) वाहनों का अगले 30 दिनों में सड़कों से हटा लेने का आदेश दिया था। ये छह शहर हैं- तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, कोच्चि, त्रिशुर, कोझीकोड और कन्नूर।

इसके साथ ही, सार्वजनिक परिवहन को छोड़कर 2000 सीसी से अधिक इंजन क्षमता वाले वाहनों के लिए कोई नया परमिट भी नहीं दिया जाएगा और उल्लंघन करने वालों पर 5000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।

खनन

रेत खनन आदेश ने नदी और सागरतल से सभी प्रकार के अवैध रेत खनन, जो देश भर में व्याप्त हो गया था, पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम संधारणीय विकास और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।

• केंद्र सरकार के फैसले के विरुद्ध निर्णय देते हुए हसदी-अरंड जंगलों में कोयला ब्लॉक (खंड) की मंजूरी को निरस्त कर दिया।

• फरवरी 2014 में सी जी कोयला खदानों की मंजूरी को निरस्त किया।

• उड़ीसा में वेदांता और पॉस्को प्रकरण में आदिवासियों के पक्ष में निर्णय।

अवैध निर्माण

• राष्ट्रीय हरि न्यायाधिकरण ने दिल्ली में विश्व संस्कृति महोत्सव के आयोजन से यमुना के बाढ़ मैदान को हुई क्षति के लिए 5 करोड़ का जुर्माना लगाया।

बेल्लंदर आर्द्रभूमि पर विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) का निर्माण करने वाले दो बिल्डरों (निर्माता) पर लगभग 140 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाकर निर्माण कंपनियो (संघों) को दंडित किया।

संरक्षण

• मार्च 2016 में, हरित न्यायाधिकरण ने केंद्र सरकार से माइक्रोप्लास्टिक (सूक्ष्म ढलनशील) (यह मिमी से कम आकार के प्लास्टिक के खंड और तंतु होते हैं) पर प्रतिबंध के संबंध में जवाब माँगा था।

केवल जैव निम्नीकरण योग्य सामग्रियों से बनी गणेश मूर्तियों के विसर्जन के लिए।

• सुंदरवन की निगरानी के लिए एक पैनल (अनुसूची) का गठन करने का आदेश दिया क्योंकि एनजीटी ने पाया कि कुछ मामलों में तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) का उल्लंघन हुआ था।

• पश्चिमी घाट विशेषज्ञ पैनल की रिपोर्ट के कार्यान्वयन के लिए गोवा फांउडेशन (नीव) का प्रकरण।