अंतरराष्ट्रीय महादव्ीपीय वैज्ञानिक ड्रिलिंग कार्यक्रम (International Continental Scientific Drilling Program – Environment)

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• केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हेल्महोल्टज सेंटर (केंद्र) पॉट्‌सडैम जी.एफ.जेड. जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर (खोज, केंद्र, के लिए) जिओसाइंसेस के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके (पांच वर्ष की अवधि के लिए) अंतरराष्ट्रीय महादव्ीपीय वैज्ञानिक ड्रिलिंग कार्यक्रम (आईसीडीपी) संघ की भारतीय सदस्यता के लिए अपनी मंजूरी दे दी है।

• इससे भारत के लिए कोयना क्षेत्र में गहरी ड्रिलिंग और संबद्ध अन्वेषण पूरा करने में वैज्ञानिक ड्रिलिंग के विभिन्न पहलुओं में गहरी विशेषज्ञता वाले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त विशेषज्ञों के साथ संलग्न होना संभव होगा।

पश्चिम भारत में महाराष्ट्र में स्थित कोयना बांध जलाशय प्रेरित भूकम्प (आरटीएस) क्षेत्र का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है। यहां 1962 में शिवाजीसागर झील के निर्माण के बाद से ही प्रेरित भूकम्प 20 x 30 वर्ग कि. मी. के सीमित क्षेत्र में आते रहे हैं।

• सदस्यता समझौते के अंतर्गत, भारत को दो आईसीडीपी पैनलों (नामिको)-कार्यकारी समिति (ईसी) और असेंबली (सभा) ऑफ गवनर्स (के लिए, प्रशासन) (एओजी) में सीट (स्थान) मिलेगी।

• इसके साथ ही, आईसीडीपी तकनीकी/परिचालनात्मक सहायता प्रदान करेगा; प्रमुख वैज्ञानिक क्षेत्रों, नमूना और डेटा प्रबंधन में श्रमबल प्रशिक्षण के संदर्भ में क्षमता निर्माण की सुविधा प्रदान करेगा और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय दव्ारा आरंभ की गई कोयना साइंटिफिक डीप ड्रिलिंग परियोजना के लिए कार्यशालाओं की सहायता करेगा।

• आईसीडीपी के सदस्य के रूप में, भारत के वैज्ञानिकों/इंजीनियरों को प्रस्ताव प्रस्तुत करने, सभी आईसीडीपी सह-वित्त घोषित कार्यशालाओं और ड्रिलिंग परियोजनाओं में भाग लेने का अधिकार होगा और आईसीडीपी परियोजनाओं के परिणामस्वरूप प्राप्त हुए सभी आंकड़ों तक पहुंच भी होगी।

• यह भूकम्प की उत्पत्ति और भूकंपीय प्रक्रियाओं की बेहतर समझ पर नये सिरे से प्रकाश डालेगा।

आईसीडीपी :एक नजर में

• यह वैज्ञानिक ड्रिलिंग हेतु अवसंरचना है जो विशिष्ट विज्ञान क्षेत्र को सुविधा प्रदान करती है।

• यह स्थलीय वातावरण में वैज्ञानिक अनुसंधान ड्रिलिंग एक एकमात्र अंतरराष्ट्रीय मंच है।

• यह अत्याधुनिक अनुसंधान का संचालन करने के लिए साधन प्रदान करता है।

• यह उच्चतम वैज्ञानिक और तकनीकी स्तर पर साथ कार्य करने हेतु 23 देशों के वैज्ञानिकों और हितधारकों को प्लेटफॉर्म (मंच) प्रदान करता है।