Major Environment – Part 2

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कर्नाला पक्षी अभ्यारण्य (Karnala Bird Sanctuary – Environment)

• भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने कर्नाला पक्षी अभयारण्य (केबीएस) पर सड़क परियोजना दव्ारा पड़ने वाले प्रभावों को शमित करने वाली योजना हेतु 68 करोड़ रुपये नियत कर दिए हैं।

• कर्नाला पक्षी अभयारण्य (केबीएस) मुम्बई के बाहरी क्षेत्र में मनोरंजन और कर्जत के निकट रायगढ़ जिले के पनवेल तालुका में स्थिति है।

• यह अभयारण्य स्थानीय पक्षियों की 150 से अधिक प्रजातियों और शरद ऋतु में आने वाले 37 प्रवासी पक्षी प्रजातियों का घर है।

• तीन दुर्लभ पक्षी, पीला मिनिवेट, पंजो वाला किंगफिशर और मालाबार ट्रोगॉन यहाँ देखे गए हैं।

कश्मीर मेे चिनार के पेड़ (Poplar Trees in Kashmir – Environment)

• कश्मीर अपने चीड़ के पेड़ों के लिए जाना जाता है। हालांकि, बड़े पैमाने पर लकड़ी की निकासी के कारण पिछले कुछ दशकों में चीड़ के जंगलों में कमी आई है।

• विकल्प की खोज में, सामाजिक वानिकी विभाग ने पोपुलोस डिटोआईडस, या ईस्टर्न कॉटनवुड या अधिक लोकप्रिय रूप से चिनार के नाम से जाने वाले व़ृक्ष को प्रस्तुत किया।

• इस प्रजाति के आने कश्मीर क्षेत्र में लिबास और प्लाई आधारित उद्योगों को बल मिला है, क्योंकि इसकी लकड़ी फल-पैंकिंग (पैक करने की प्रक्रिया) बक्से में प्रयोग की जाती है, बागवानी उद्योग के लिए एक लागत प्रभावी विकल्प है, जोकि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

• चिनार से होने वाले वित्तीय लाभ ने कश्मीरी किसानों को आजीविका के एक बेहतर साधन के रूप में कृषि वानिकी को चुनने में मदद की है।

• हालांकि, हाल के वर्षों में, लोगों ने चिनार दव्ारा उत्पादित सूत की वजह से संक्रमण की घटनाओं में वृद्धि पर चिंता व्यक्त की है।

• नतीजन, जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने कश्मीर घाटी के सभी चिनार के पेड़ की कटाई का आदेश दिया है।

• नागरिक समाज के कई सदस्यों दव्ारा इसका विरोध किया जा रहा है इनका तर्क है कि चिनार दव्ारा होने वाली एलर्जी (ऐसी स्थिति जब किसी व्यक्ति को किसी वस्तु के संपर्क अथवा सेवन से शरीर पर बुरा असर पड़ता है), धूल और लॉन घास आदि अन्य कारणों की वजह से होने वाली एलर्जी की तुलना में कम हानिकारक है।