राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (National Disaster Management – Environment)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• इस योजना को हाल ही में शुरू किया गया। यह आपदा प्रबंधन के लिए पहली बड़ी राष्ट्रीय योजना है।

• इस योजना का उद्देश्य भारत को आपदा प्रतिरोधकक्षमतापूर्ण बनाना और आपदा के समय होने वाली जन हानि को कम करना है।

• इसे सेंडाई फ्रेंमवर्क (सामाजिक व्यवस्था) और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।

सेंडाई फ्रेमवर्क के बारे में

• सेंडाई फ्रेमवर्क आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर 15 वर्ष का एक गैर बाध्यकारी समझौता है।

• इसने पूर्ववर्ती ह्योगो फ्रेमवर्क (सामाजिक व्यवस्था) का स्थान लिया है।

• इसे मार्च 2015 में जापान के सेंडाइ में आयोजित तीसरे संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर हुए विश्व सम्मेलन में अपनाया गया था।

• इसका लक्ष्य व्यक्तियों, व्यवसायों, समुदायों और देशों के आर्थिक, भौतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय संपत्तियों और जीवन, आजीविका और स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान एवं आपदा जोखिम में संतोषजनक कमी लाना है।

योजना के मुख्य बिंदु

आपदा की व्यापक परिभाषा

• यह योजना ” सेंडाई फ्रेमवर्क” के चार प्राथमिक विषयों पर आधारित है, नामत;

• आपदा जोखिम को समझाना

• आपदा जोखिम शासन सुधार

• आपदा जोखिम न्यूनीकरण में निवेश (संरचनात्मक और गैर संरचनात्मक उपायों के माध्यम से)

• आपदा तैयारी-पूर्व चेतावनी और आपदा के बाद बेहतर पुननिर्माण।

• इसमें आपदा प्रबंधन के सभी चरणों-रोकथाम, शमन, अनुक्रिया और पुनर्वास को शामिल किया गया है।

• इसमें मानव जनित आपदाओं, रासायनिक, परमाणु आदि को शामिल किया गया है;

नियोजन

• आपदाओं से निपटने के लिए लघु, मध्यम और लंबे समय क्रमश: 5,10 और 15 वर्षीय योजना।

• स्पष्ट भूमिका के साथ एकीकृत दृष्टिकोण

• यह योजना सरकार की सभी एजेंसियों (कार्यस्थानों) और विभागों के मध्य क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर एकीकरण करती है।

• यह योजना सरकार की सभी स्तरों, पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय स्तर तक की भूमिका और जिम्मेदारियों को एक आव्यूह (मैट्रिक्स) प्रारूप में बताती है।

• विभिन्न मंत्रालयों को विशिष्ट आपदाओं के लिए भूमिका दी जाती है, जैसे पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय चक्रवात के लिए जिम्मेदार है।

• योजना का एक क्षेत्रीय दृष्टिकोण है, जोकि न केवल आपदा प्रबंधन के लिए लाभप्रद होगा बल्कि विकास योजना के लिए भी लाभप्रद होगा।

• इसे इस तरह बनाया गया है कि आपदा प्रबंधन के सभी चरणों में इसे मापनीय ढंग से लागू किया जा सकता है।

प्रमुख गतिविधियां

• आपदाओं से निपटने वाली एजेंसियों (कार्यस्थानों) को एक चेकलिस्ट (जांचसूची) के रूप में प्रदान करने के लिए यह पूर्व चेतावनी, सूचना प्रसार, चिकित्सा देखभाल, ईंधन, परिवहन, खोज और बचाव, निकासी आदि प्रमुख गतिविधियों की पहचान करती है।

• यह पुनर्वास के लिए एक सामान्यीकृत रूपरेखा प्रदान करती हैं और स्थिति का आकलन करने और बेहतर पुननिर्माण में लचीलापन लाती है।

सूचना और मीडिया (संचार माध्यम) विनियमय

• यह आपदाओं से निपटने के लिए समुदायों को तैयार करने में, सूचना, शिक्षा और संचार गतिविधियों की अधिक आवश्यकता पर जोर देती है।

• यह आपदाओं की कवरेज (विषयवृत्तांत) में मीडिया (संचार माध्यम) के लिए सैनिक दिशा निर्देर्शो के साथ ही स्व-नियमन की आवश्यकता बताता है। योजना मीडिया से चाहती हैं कि वह प्रभावित लोगों की गोपनीयता और गरिमा का सम्मान करे।

• इसके अलावा योजना अफवाहों और दहशत के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से, अधिकारियों को नियमित मीडिया (संचार माध्यम) ब्रीफिंग (विवरण या निर्देश देने के लिए बैठक; इस तरह की बैठक में दिया गया विस्तृत विवरण/निर्देश) (आपदा की गंभीरता पर निर्भर करता है) और सरकार की ओर से मीडिया के साथ बातचीत करने के लिए एक नोडल (पातिक/ग्रंथिल) अधिकारी नामित करने का निर्देश देती है।

• प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और सर्वोत्तम अंतरराष्ट्रीय प्रविधियों को अपनाने पर ध्यान।

योजना का महत्व

• जबकि ज्यादातर राज्यों और जिलों ने अपनी आपदा प्रबंधन योजनाओं को तैयार कर लिया था, एक राष्ट्रीय योजना अनुपस्थित थी जिसे उप-राष्ट्रीय स्तर पर इस प्रक्रिया का मार्गदर्शन करना था। यह योजना हमारी आपदा प्रबंधन प्रणाली के इसी महत्वपूर्ण अंतराल को समाप्त करती है।

कमजोर बिंदु

• सेंडाइ फ्रेमवर्क या एसडीजीएस के विपरीत इसका कोई भी उद्देश्य या लक्ष्य या एक निश्चित समय सीमा निर्धारित नहीं है।

• इसके अलावा, वित्त पोषण के लिए ढांचा अनुपस्थित है।

• इसके अतिरिक्त, कुछ अन्य सुधार किये जा सकते है। उदाहरण के लिए;

• कॉर्पोरेट निकायों की भूमिका को ंसंस्थागत करने की जरूरत

• अभिनव कार्यपद्धतियों का समावेश- पारंपरिक कार्यप्रणाली के साथ नई प्रौद्योगिकी की एक विवेकपूर्ण मिश्रण

• आपदा बीमा प्रावधानों को स्थान देने की आवश्यकता