राष्ट्रीय वन नीति की समीक्षा (National Forest Policy Review – Environment)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• पर्यावरण मंत्रालय ने भोपाल स्थित मान्यताप्राप्त संगठन भारतीय वन प्रबंधन संस्थान को मौजूदा वन नीति की समीक्षा करने और संशोधन करने का कार्य सौंपा है।

• वन कानूनों में कई परिवर्तनों को अद्यतन करने और भारत के वन क्षेत्र में वृद्धि लाने तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए एक प्रगतिशील नीति प्रदान करने हेतु 1988 के बाद पहली बार इस नीति का पुनरावलोकन किया जा रहा है।

• उल्लेखनीय है कि 1998 की नीति समीक्षा करने की मांगें काफी समय से की जा रही थी क्योंकि यह वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती है।

अध्ययन की मुख्य विशेषताएं

यह अध्ययन ’सरकार के विचारार्थ’ तैयार किया गया था और यह संयुक्त राष्ट्र विकास कोष दव्ारा वित्त पोषित किया गया था। इस दृष्टि से अध्ययन के प्रमुख प्रस्तावों पर विचार करना महत्वपूर्ण है।

• वन आवरण बढ़ाना

• वैज्ञानिक हस्तक्षेप के माध्यम से और सघन वनाच्छादन की रक्षा के सख्त नियम लागू करके भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र के कम से कम एक-तिहाई भाग पर वन या वृक्ष आच्छादन करना इसका मुख्य लक्ष्य है।

• इसकी भरपाई विदेशी प्रजातियों के बजाय देशी प्रजातियों से की जानी चाहिए।

• कार्बन टैक्स (कर): इसमें कुछ उत्पादों और सेवाओं पर पर्यावरण उपकर, हरित कर, कार्बन टैक्स आदि लगाने का प्रस्ताव है।

• भूमि उपयोग में परिवर्तन

• यह खनन, उत्खनन, बांधों के निर्माण, सड़कों और अन्य रैखिक बुनियादी ढांचे के निर्माण से संबंधित भूमि परिवर्तकारी परियोजनाओं के मामले में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत को रेखांकित करती है।

• ऐसी अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए जिससे कम से कम प्रदूषण और नुकसान हो।

• वित्त: इसमें वानिकी क्षेत्र में बजट को बढ़ाने की मांग की गयी है जिससे कि इस नीति में निहित उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके।

• पारिस्थितकी पर्यटन: यह संरक्षण केन्द्रित ”उत्तम पारिस्थितिकी पर्यटन मॉडल” विकसित करने की मांग करता है, जो स्थानीय समुदायों की आजीविका जरूरतों को पूरा करने में अनुपूरक हो।

• कार्यान्वयन: नीति, प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए अधिसूचना जारी होने के छह महीने के भीतर एक राष्ट्रीय कार्यान्वयन रूपरेखा का निर्माण परिकल्पित करती है। इसमें राज्यों से आग्रह भी किया है कि वे अपनी वन नीतियों का निर्धारण करें और एक कार्यान्वयन रूपरेखा तैयार करें।

• कृषि वानिकी: निवेश लागत कम करने और उचित कीमत वाली गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री तक पहुँच जैसी प्रोत्साहन और परिचालन समर्थन प्रणाली के माध्यम से कृषि-वानिकी और फॉमर् (रूप या आकार) वानिकी के बड़े पैमाने पर विस्तार को नीति में महत्व दिया गया है।