राष्ट्रीय सौर मिशन (नियोग) (National Solar Mission – Economy)

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नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय दव्ारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 748 गीगावॉट है, जबकि सभी स्रोतों से कुल स्थापित संचयी क्षमता महज 275 गीगावॉट ही है।

लक्ष्य

• वर्ष 2021-22 तक 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा का उत्पादन।

• इस में से 60 गीगावॉट सौर ऊर्जा जमीन आधारित ग्रिड (जाली) से और 40 गीगावॉट सौर ऊर्जा छत आधारित ग्रिड के माध्यम से उत्पन्न की जाएगी।

• चालू वर्ष के लिए लक्ष्य 2,000 मेगावॉट है और साल का लक्ष्य 12,000 मेगावॉट है।

वर्तमान स्थिति

राज्यों की स्थिति

§ इस साल भारत में ग्रिड से जुड़ी 6762 सौर ऊर्जा परियोजनायें थी। इसमें से, राजस्थान 1,269 मेगावाट के साथ इस सूची में सबसे ऊपर हैं।

§ तेलंगाना (527.8 मेगावाट), आंध्र प्रदेश (573 मेगावाट), तमिलनाडु (1061.8 मेगावाट) और गुजरात (1,119.1 मेगावाट) जैसे राज्य भी उल्लेखीय कार्य कर रहे हैं।

§ अप्रैल में जारी ब्रिज (पुल) टू (भी) इंडिया रिपोर्ट (भारत विवरण) में बताया गया है कि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य जो कि अधिक बिजली की खपत करते हैं, सौर ऊर्जा के विकास में धीमी प्रगति कर रहे हैं। उपरोक्त लक्ष्यों को प्राप्त करने में, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने कई तरह की परियोजनाएँ शुरू की हैं:

§ सौर पार्क और अल्ट्रा मेगा सौर विद्युत परियोजनाओं के विकास के लिए योजना

§ नहर के तटों और नहर के ऊपर सौर पीवी विद्युत संयत्रों के विकास के लिए योजना

§ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों दव्ारा वायबिलिटी गैप फंडिग के साथ 1000 मेगावाट की सौर पीवी विद्युत परियोजनाओं को स्थापित करने की योजना।

सौर ऊर्जा सस्ती हो रही है

§ सौर पैनल नामक पदार्थ से बन रहे हैं।

§ हाल ही में स्काई पावर (आकाश शक्ति) और सनईडोसन जैसी कंपिनियों ने 5-6 रुपए/यूनिट (ईकाइ) के हिसाब से बोली लगायी जो कि बहुत कुछ ताप विद्युत संयत्रों के बराबर हैं।

§ पारंपरिक ऊर्जा की तुलना मेंं यह कम व्यावहारिक है

§ सौर ऊर्जा केवल सूरज के निकलने पर ही व्यवहार्य है।

§ सौर पैनल (नामिका) मानसून या सर्दियों के दौरान कोहरे में कुशलता से काम नहीं करते।

§ ग्रिड में तापीय ऊर्जा के साथ सौर ऊर्जा सम्मिश्रण कई सारी व्यावहारिक समस्या लाता है।

§ सौर पैनल स्थापना की पूंजी लागत भी अधिक हैं।

§ घरेलू विनिर्माण एक कमजारे कड़ी है।

§ भारतीय उत्पाद कम उन्नत किस्म के हैं।

§ ”मेक इन इंडिया” की सफलता के लिए आत्मनिर्भरता आवश्यक है। इससे वर्ष 2030 तक उपकरणों के आयात में लगने वाली 42 अरब डॉलर की पूंजी की बचत होगी, और 50,000 प्रत्यक्ष रोजगार और कम से कम 125,000 अप्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन होगा।

चुनौतियां

§ भूमि की उपलब्धता: सौर इकाइयों के लिए यह एक बड़ी समस्या है।

§ भूमि का स्वामित्व और भूमि मालिकों का इन परियोजनाओं का हिस्सा बनाने के मुद्दे को भी संबोधित करने की जरूरत है।

§ दूरदराज के क्षेत्रों से बिजली लाना भी मुश्किल हैं। बंजर भूमि उपलब्ध है, लेकिन समस्या यह है कि वो दूरदराज के स्थानों पर है।

§ अक्षय क्रय दायित्व, विद्युत वितरण कंपनियों दव्ारा सौर ऊर्जा का उपयोग भी उनकी खराब वित्तीय स्थिति की वजह से एक चुनौती है और अक्षय क्रय दायित्व को भी प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा सकता है।

§ कई निवेशक इसकी व्यवहार्यता के बारे में सवाल उठा रहे हैं। 40-60 मेगावाट के एक सौर संयंत्र लगाने में लगभग एक वर्ग किलोमीटर भूमि की जरूरत होती है। भूमि की इतनी बड़ी मात्रा दूरदराज के स्थानों पर ही उपलब्ध है और वहां से बिजली लाना और भी मुश्किल हो जाता है।

आगे की राह

• फीड(किसी चीज़ दव्ारा तीव्रता/उग्रता बढ़ना)-इन (भीतर) -टैरिफ (श्रेष्ठ) प्रणाली (एफआईटीएस-फिक्सड (निश्चित) पीईआर केडब्ल्यूएच फॉर (के लिए) 20 ईयरस (साल), कवरिंग (ढकने वाली वस्तु/सतह) इनवेस्टमेंट) (निवेश) और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादकों को ग्रिड (जाली) कनेक्शन (संयोजन) की गारंटी देने की वजह से जर्मनी सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी देश बन गया हैं।

• मराठवाड़ा और बुंदेलखंड जैसे कम सिंचाई और कम फसल घनत्व वाले क्षेत्रों की किसान सहकारी समितियाँ, खेतों में सौर ऊर्जा का उत्पादन कर सकती हैं। इससे किसानों की आय भी बढ़ेगी।

• विश्व व्यापार संगठन के सौर विवाद के समाधान के साथ-साथ घरेलू उत्पादन में वृद्धि के लिए विकल्प ढूँढने होंगे।