राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना 2017 − 2031 का प्रारूप (National Wildlife Action Plan 2017 – 2031 Format – Environment And Ecology)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 3 फरवरी, 2016 को राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना (2017-2031) के प्रारूप का विमोचन किया। इसके उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

• राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना (NWAP) 2002-2016 के कार्यान्वयन की समीक्षा करना और; 2017-2031 के लिए वन्य जीवों के संरक्षण हेतु रोडमैप (सड़क, मानचित्र) तैयार करना।

महत्वपूर्ण घटक क्या हैं?

जलवायु परिवर्तन: जलवायु परिवर्तन को वन्य जीव योजना के साथ एकीकृत करना।

सरंक्षण

o संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क (जाल में कार्य) में सुधार लाना,

o लैंडस्केप (प्रकृति दृश्य) एप्रोच (पहुंच) (पारिस्थितिकीय मूल्य रखने वाली सभी अकृषित वनस्पतियों और गैर-पालतु जीवों के लिए) अपनाना,

o आवासों का संरक्षण: तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी के आवासों का।

जैव विविधता

o संकटग्रस्त प्रजातियों का पुनर्वास।

o वन्यजीव स्वास्थ्य (कैनाइन डिस्टेंपर नामक बीमारी अब बाघों में भी फैलने लगी है,

o भौगोलिक रूप में एंडोथेलियोट्रॉपिक हर्पीज (सरल परिसर्प/संकेत और लक्षण) वायरस (जीवाणु) का प्रसार हुआ है जो हाथियों में संक्रमण फैलाता है और उत्तर-पूर्वी भारत के गोट (बकरा) एंटीलोप्स (हिरण) में गोट (बकरा) पॉक्स (चेचक) के मामले देखे गए हैं।

o अवैध शिकार का नियंत्रित

मानव-पशु संबंध: मानव-वन्यजीव संघर्ष का शमन।

प्रशासन और कानून: घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशनों (सम्मेलनों) के अनुपालन में सुधार लाना।

o वन्यजीवन क्षेत्र के लिए निर्बाध वित्तपोषण सुनिश्चित करना।

o अन्य क्षेत्रकों के कार्यक्रमों के साथ राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना का एकीकरण करना।

अनुसंधान और पारंपरिक ज्ञान: अनुसंधान और निगरानी को मजबूत बनाना

o मानव संसाधनों का विकास

o लोगों की भागीदारी

महत्व

• चूंकि आनुवंशिक विविधता के संरक्षण और प्रजातियों व पारिस्थितिकीय प्रणालियों के संधारणीय उपयोग का देश की वैज्ञानिक प्रगति पर सीधा प्रभाव पड़ता है और यह लाखों ग्रामीण समुदायों का सहयोग करता है, इसलिए मसौदे में जैव विविधता के संरक्षण और उनके पुनर्वास पर बल दिया गया है।

• यह मसौदा वन्यजीव प्रबंधन योजना में वन्य जीवों को शामिल करके उन पर जलवायु परिवर्तन से पड़ने वाले दुष्प्रभावों से संबंधित चिंताओं का भी ध्यान रखता है।

• वास्वविकता यही है कि प्राकृतिक विरासत, जिसमें नदियाँ, वन, घास के मैदान, पहाड़, आर्द्रभूमि, रेगिस्तान तथा तटीय और समुद्री वासस्थल सम्मिलित हैं, का बड़े पैमाने पर क्षरण हो रहा है। इस बात की नितांत आवश्यकता है कि NWAP मसौदे के अनुसार कानूनों के अनुपालन में सुधार हो और संबंधित गतिविधियों का वित्तपोषण किया जाए।

• यही भी पाया गया है कि विश्व के ”12 सर्वाधिक जैव विविधता वाले देशों में से एक” होने के बावजूद, राष्ट्रीय नियोजन में जनसंख्या, व्यवसायीकरण और विकास परियोजनाओं के दबाव के कारण निर्जन क्षेत्रों के हृास और निम्नीकरण होने तथा इसके प्रतिकूल पारिस्थितिकीय परिणामों को गंभीरता से नहीं लिया गया है। साथ ही इसमें पारिस्थितिकीय संतुलन को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है।

चुनौतियाँ

• NWAP मसौदे में पारिस्थितिकीय पर्यटन को प्रोत्साहित किया गया है परन्तु इसमें भी कुछ निहित समस्याएँ हैं।

• भविष्य की चिंताएँ: तीव्र औद्योगिकीकरण से वन्यजीवों का आवास सिकुड़ रहा है जिसकी परिणति मानव-वन्यजीव संघर्ष के रूप में हो रही है। हालांकि योजना में इसका उल्लेख है, फिर भी यह महत्वपूर्ण चुनौती बनने जा रहा है।

• जलवायु परिवर्तन से समुद्री एवं तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए वास्तव में कोई ठोस उपाय अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई नहीं की गई है।

• नदियों में उद्योगों दव्ारा अपशिष्ट का निस्तारण किए जाने के कारण अंतर्देशीय जलीय पारिस्थितिकी प्रणालियों का संरक्षण एक चुनौती है। इसके लिए मंत्रालयों के बीच समन्वय के साथ बहुक्षेत्रीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

• एफआरए को और अधिक सुदृढ़ किया जाना चाहिए।