प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन के नए नियम (New Rules For Management of Plastic Waste – Environment And Economy)

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• प्लास्टिक कैरी (ले जाना/ढुलाई) बैग (झोला) की न्यूनतम मोटाई 40 माइक्रान से बढ़ाकर 50 माइक्रान कर दी गयी है। इससे लागत में वृद्धि होगी और प्लास्टिक के कैरी बैग को मुफ्त में प्रदान करने प्रवृत्ति में कमी आएगी।

स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी: ग्रामीण क्षेत्रों मेें इन नियमों को लागू किया जाएगा क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्लास्टिक के उपयोग की प्रवृत्ति बहुत बढ़ गयी है। ग्राम सभाओं को इन नियमों के कार्यान्यवन की जिम्मेदारी दी गई है।

विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व: इससे पहले ईपीआर स्थानीय निकायों के विवक पर छोड़ दिया गया था। पहली बार, उत्पादकों और ब्रांड (चिन्ह) के मालिकों को अपने उत्पादों से उत्पन्न कचरे को इकट्‌टा करने के लिए जिम्मेदार बनाया गया है।

• उत्पादकों को उनके विक्रेताओं, जिन्हें उनके दव्ारा निर्माण के लिए कच्चे माल की आपूर्ति की गयी है, का भी एक रिकार्ड रखना होगा। इससे असंगठित क्षेत्र में इन उत्पादों के विनिर्माण पर रोक लगेगी।

अपशिष्ट उत्पन्न करने वालों की जिम्मेदारी: प्लास्टिक कचरे के सभी संस्थागत उत्पादक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नियमों के अनुसार उनके दव्ारा उत्पन्न कचरे को पृथक करेंगे और उन्हें स्टोर (एकत्रित) करेंगे तथा पृथक अपशिष्ट को अधिकृत अपशिष्ट निपटान सुविधा केंद्र तक पहुँचायेंगे।

स्ट्रीट (सड़क) वेंडर (विक्रेता) और खुदरा विक्रेताओं की जिम्मेदारी: पंजीकृत विक्रेता के अतिरिक्त अन्य विक्रेता यदि इस तरह के कैरी बैग किसी को देगें तो उन पर अर्थदंड लगाया जाएगा। स्थानीय निकायों को पंजीकरण शुुल्क के भुगतान करने के बाद केवल पंजीकृत दुकानदारों को उपभोक्ताओं से निर्धारित शुल्क लेकर उन्हें प्लास्टिक कैरी बैग देने की अनुमति दी गयी है।

• सड़क निर्माण और ऊर्जा के उत्पादन के लिए प्लास्टिक के उपयोग को बढ़ावा देना।