रैप्टर (हिंसक पक्षीशिकारी) सहमति पत्र (Raptor Consent Letter Violent Predator – Environment And Ecology)

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• सरकार ने अफ्रीका और यूरेशिया में प्रवासी शिकारी पक्षियों के संरक्षण पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने के साथ प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर कन्वेंशन (संरक्षण) (सीएमएस) को मंजूरी दे दी है। इसे रैप्टर सहमति पत्र भी कहा जाता है।

• इसका उद्देश्य शिकारी पक्षियों का संरक्षण और उनकी संख्या में गिरावट को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई को बढ़ावा देना है।

• हालांकि यह काूननी रूप से बाध्यकारी नहीं है परन्तु इससे इन शिकारी पक्षियों के वासस्थलों के प्रभावी प्रबंधन के संबंध में भारत को ज्ञान प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

• इस समय रैप्टर सहमति पत्र के दायरे में ऐसे पक्षियों की 76 प्रजातियाँ आती हैं जिनमें से 46 प्रजातियाँ भारत में भी पाई जाती हैं। इनमें गिद्ध, बाज, उल्लू, चीन आदि शामिल हैं।

शिकारी पक्षियों के समक्ष खतरे

पर्यावास हानि और अवनयन, अवैध शिकार, विषाक्तता, अधिक ऊंचाई वाली संरचनाओं (एरियल (एक प्रकारा का अरब चिकारा) स्ट्रक्चर (संरचना)) और बिजली के तारों से टकराव।

सीएमएस पर कन्वेंशन (संरक्षण) के बारे में

• संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के तत्वाधान में, सीएमएस प्रवासी प्रजातियों तथा उनके वासस्थलों के संरक्षण और धारणीय उपयोग के लिए एक वैश्विक मंत्र प्रदान करता है।

• सीएमएस उन सभी देशों (रेंज (दूरी) स्टेट (राज्यों)) को एक साथ लाता है जिनसे होकर प्रवासी प्रजातियाँ गुजरती हैं या ठहरती हैं। इस प्रकार सीएमएस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित संरक्षण के उपायों के लिए कानूनी आधार तैयार करता है।

• इसमें दो परिशिष्ट शामिल हैं-

• परिशिष्ट 1-विलुप्त होने के कगार पर खड़ी प्रवासी प्रजातियों को परिशिष्ट-1 में शामिल किया गया है।

• परिशिष्ट 2-वैसी प्रवासी प्रजातियाँ जिनके मामले में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है या जिन्हें अंतरराष्ट्रीय सहयोग से काफी लाभ होगा, उन्हें परिशिष्ट-2 में शामिल किया गया है।