समर (Summer – Entertainment And Ecology)

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• भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने एरोसोन निगरानी और अनुसंधान प्रणाली की शुरूआत की है। जिससे देश को वायु प्रदुषण के कारण वातावरण में ब्लैक (काला) कार्बन (अधातु तत्व) की सांद्रता और जलवायु पर इसके प्रभाव का अध्ययन करने में मदद मिलेगी।

• यह 16 Aethalometers एथलोमेटर्स , 12 Sky (आसामान) radiometers (विकिरणमापी) और 12 Nephelometers नेपलोमेटर्स (आविलतामापी) का नेटवर्क (जाल पर काम) है।

एरोसाल क्या हैं?

• यह वायु प्रदूषकों का एक समुच्चय है जिसमें गैस, धुआँ और धूलकण हानिकारक अनुपात में सम्मिलित होते हैं।

• ये कण ठोस और तरल दोनों हो सकते है जो पर्यावरण की दृश्यता को भी प्रभावित करते हैं।

• ये वातावरण में मौजूद निलंबित कण हैं, जो अलग-अलग क्रियाविधि के माध्यम से जलवायु और स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरनाक हैं।

• कई अध्ययनों के अनुसार एरोसोन ग्रहों की अल्विडों में वृद्धि कर ग्लोबल (विश्वव्यापी) वार्मिंग (थोड़ा गरम करने वाला) की गंभीरता को कम करने में मदद कर सकते हैं। (कोई सतह सूर्य की ऊष्मा का कितना परावर्तन कर रहा है वह उसकी अल्विडो कहलाती है।)

ब्लैक (काला) कार्बन (अधातु तत्व) क्या है?

• ब्लैक कार्बन एरोसोल अपनी उच्च अवशोषण विशषेताओं के कारण महत्व रखते हैं। यह अवशोषण विशेषता इसकी उत्पादन क्रियाविधि पर निर्भर करती है।

• अपने विकिरण प्रभाव के अलावा, ब्लैक कार्बन एरोसोल काफी हद तक अन्य एरोसोल को भी दूषित कर सकते हैं, जिससे पूरी एरोसोल प्रणाली के विकिरण स्वभाव में परिवर्तन आ सकता है और वस्तुत: उनके बादल संघनन नाभिक की तरह व्यवहार करने का गुण प्रभावित हो सकता है।

• जीवाश्म ईंधन (डीजल और ठोस कोयले के दहन दव्ारा), खाना पकाने और गर्मी के लिए घरेलू जैवे ईंधन का दहन एवं खुली हवा में फसलों के अवशेष को जलाना तथा वन अग्नि आदि ब्लैक कार्बन के स्रोत हैं।

• अपने अवशोषण और अल्विडो को कम करने की क्षमता (जब यह बर्फ पर निक्षेपित होता है) के कारण ब्लैक कार्बन वातावरण को गरम कर देता है।