सुरक्षा की जिम्मेदारी (आर2पी) (Security Responsibility – Governance And Governance)

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आर2पी या आरटीओ2पी, वर्ष 2005 के विश्व सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों के दव्ारा नरसंहार, युद्ध अपराध, नस्लीय हिंसा और मानवता के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए व्यक्त की गयी वैश्विक राजनीतिक प्रतिबद्धता है।

आर2पी के प्रमुख आधार

वर्ष 2005 में संयुक्त राष्ट्र के विश्व शिखर सम्मेलन में तैयार किये गये दस्तावेज में निर्धारित किये गए और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव की 2009 की रिपोर्ट में व्यक्त किये आर2पी के तीन प्रमुख आधार है :

• नरसंहार, युद्ध-अपराध, नस्लीय हिंसा और मानवता के खिलाफ अपराध करने अथवा उन्हें करने के लिए भड़काने से रोकना तथा नागरिकों की रक्षा करने का प्राथमिक उत्तरदायित्व राज्य का है,

• राज्यों को प्रोत्साहित करने और इस जिम्मेदारी को पूरा करने में इनकी सहायता करने की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की है

• इसके अतिरिक्त राजनायिक मानवीय और अन्य साधनों के उपयोग के दव्ारा इन अपराधों से नागरिकों की रक्षा करना भी एक प्रमुख जिम्मेदारी है।

• इसके अतिरिक्त यदि राज्य घोषित रूप से अपने नागरिको की रक्षा करने में असफल रहता है तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, सामूहिक कार्रवाई करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

आर2पी सिद्धांत की आलोचना

दृष्टव्य है कि आर2पी सिद्धांत का मानवीय कारणों की अपेक्षा कुछ चुनिंदा सत्ता परिवर्तनों में इस्तेमाल किया गया है। इस संदर्भ में आलोचकों की प्रमुख चिंता है कि पश्चिमी हस्तक्षेप मूल कारणों को नजरअंदाज कर स्थितियों को और भयावह बनाएगा।

• लीबिया फरवरी 2011 में लीबिया सरकार के खिलाफ हुए एक विद्रोह ने आर2पी का उपयोग करने का अवसर प्रदान किया।

• संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के दव्ारा नाटो को नागरिकों और नागरिक आबादी वाले क्षेत्रों की रक्षा के लिए अधिकृत किया गया किन्तु नाटो ने इस प्रस्ताव का प्रयोग सत्ता परिवर्तन की अनुमति के रूप में किया।

• नाटों के दव्ारा संयुक्त राष्ट्र के प्राधिकार का अतिक्रमण किया गया।

• वाशिंगटन ने हस्तक्षेप का समर्थन किया जिसका आधार लीबिया न होकर मानवीय आधार पर किया गया हस्तक्षेप था।

• इजरासल फिलिस्तीन संघर्ष इजरायल कास्ट लीड (2008-09), के दौरान गाजा पर बमबारी के दौरान आर2पी के प्रयोग नहीं किया गया जबकि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया इस ऑपरेशन (शल्य क्रिया) को युद्ध अपराधों की कोटि का पाया गया था।

सीरिया

उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (एनएटीओ) के दव्ारा लीबिया के मामले में संयुक्त राष्ट्र के प्राधिकार का अतिक्रमण करने के कारण सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप के बारे में कोई आम सहमति नहीं है परिणामस्वरूप, ब्रिक्स देश अब सीरिया के बारे में किसी भी प्रस्ताव को संदेहात्मक दृष्टिकोण से देख रहे हैं। सीरिया संकट से पता चलता है कि ”सुरक्षा की जिम्मेदारी ( आर2पी)” की अवधारणा संकट में क्यों हैं।