बीआरईएक्सआईटी (brexit) (Brexit – International Relations-India And The World)

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Brexit यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने का लिखित लघुरूप है। ब्रिटेन ने एक करीबी जनमत संग्रह में यूरोपीय संघ को छोड़ने के मतदान दव्ारा निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के रास्ते को चुना।

ल्वी

श्रेमन

यूनाईटेड किंगडम

52 प्रतिशत

48 प्रतिशत

स्काटलैंड

38 प्रतिशत

62 प्रतिशत

नार्थन आयरलैंड

44 प्रतिशत

56 प्रतिशत

इग्लैंड

53.4 प्रतिशत

46.6 प्रतिशत

वॉलेस

52.5 प्रतिशत

47.5प्रतिशत

ब्रिटेन ने कैसे मत दिया?

जनमत संग्रह मतदान में 30 लाख से अधिक लोगों (71.8 प्रतिशत) ने अपना मत दिया।

यह यूरोपीय प्रोजेक्ट (परियोजना) के साथ ब्रिटेन के संबंधों पर दूसरा जनमत संग्रह था। 1975 में, क्या ब्रिटेन का यूरोपीय समुदाय (साझा बाजार) क्षेत्र में रहना चाहिए या छोड़ देना चाहिए पर, एक जनमत संग्रह हुआ और देश ने शानदार 67.2 फीसदी मत के साथ इसमें रहने के लिए इसके पक्ष में मतदान किया था।

जनमत संग्रह के दौरान दोनों पक्षों दव्ारा दिए गये तर्क

मुद्दे

यूरोपीय संघ नहीं छोड़ने के पक्ष में तर्क

इसे छोड़ने के पक्ष में तर्क

आप्रावसन

यूरोपीय संघ के समर्थक सदस्यों का कहना है कि यूरोपीय संघ के प्रवासी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को नुकसान की तुलना में योगदान अधिक करेंगे।

अप्रवासी विरोधी दलों के अनुसार इनसे राष्ट्रीय संसाधनों पर गंभीर दबाव पड़ेगा और कल्याण व्यय में वृद्धि होगी।

सुरक्षा

अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के युग में यूरोपीय संघ के साथ सहयोग ब्रिटेन को सुरक्षित रखेगा।

यदि ब्रिटेन का अपनी सीमाओं पर नियंत्रण नहीं होगा तो सुरक्षा का खतरा बढ़ा जाएगा।

रोजगार

यूरोपीय संघ से तीन लाख नौकरियाँ जुड़ी हैं ऐेसे में अगर ब्रिटेन यूरोपीय संघ छोड़ देता है तो यहाँ नौकरियों का संकट उत्पन्न हो सकता है।

यूरोपीय संघ के नियमों को लागू करने की मजबूरी के समाप्त होने पर यहाँ नौकरियों में उछाल आएगा।

व्यापार

शुल्क और सीमा नियंत्रण से मुक्त एकल यूरोपीय बाजार तक पहुँच ब्रिटेन के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका 45 प्रतिशत व्यापार यूरोपीय संघ के साथ हैं।

यूरोपीय संघ की ब्रिटिश बाजार की जरूरत है और यूरोपीय देशों के साथ अलग-अलग व्यापार सौदों की बातचीत करना आसान है।

अर्थव्यवस्था

बैंको के बाहर जाने से यूरोप के वित्तीय केंद्र के रूप में लंदन का प्रभुत्व खतरे में पड़ सकता है।

लंदन की स्थिति अभेद्य है क्योंकि यह पहले से ही वैश्विक शक्ति का एक आधार है।

ब्रिटेन के बाहर निकलने की प्रक्रिया

• वापसी की प्रक्रिया शुरू करने के लिए ब्रिटेन को यूरोपीय संघ की लिस्बन संधि के अनुच्छेद 50 का प्रयोग करना होगा जिसका इससे पहले कभी प्रयोग नही किया गया।

• पहला कदम सदस्य राज्यों वाली यूरोपीय परिषद को सूचित करना होता है जिससे दो साल की वार्ता का दौर प्रारंभ होगा।

यूनाईटेड किंगडम पर प्रभाव

राज्य की एकता

पहला तो ब्रिटेन की भौगोलिक अखंडता को खतरा है। स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड ने बेग्जिट जनमत संग्रह में रहने के पक्ष में मतदान किया था।

• स्कॉटिश नेशनल पार्टी (राष्ट्रीय राजनीतिक दल) ने घोषणा की कि यह यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के मार्ग को अवरोधित करेगी।

• स्कॉटलैंड ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए दूसरा जनमत संग्रह कर सकता है।

• अगर स्कॉलैंड एक बार और स्वंतत्रता मत प्राप्त कर लेता है तो उत्तरी आयरलैंड की आयरलैंड गणराज्य में विलय की मांग गति हासिल कर सकती है। आयरलैंड यूरोपीय संघ का सदस्य है।

• ल्दांन वासियों ने (मेयर सादिक खान को संबोधित याचिका ने पहले से ही एक लाख हस्ताक्षर को आकर्षित किया है), इसे ब्रिटेन से स्वतंत्र घोषित करने की मांग की हैं।

आर्थिक प्रभाव

• पांउड का अवमूल्यन तत्काल प्रभाव के रूप में पाउंड के मूल्य में भारी गिरावट देखी जा सकती हैं।

• ब्रिटेन से अन्य यूरोपीय संघ के देशों में निवेश के स्थानांतरण की संभावना।

• लंबे समय में लंदन यूरोप में वित्तीय केंद्र के रूप में रहा है, यह अपनी प्रमुख जगह खो सकता है।

• यूरोपीय संघ के साथ इसे छोड़ने और आर्थिक संबंधो का नया तंत्र बनाने के लिए कम से कम दो साल के लिए आर्थिक अनिश्चितता का माहौल।

भारत पर प्रभाव

• भारत में विदेशी पोर्टफोलियों (व्यक्ति/बैंक के निवेश/मंत्री का विशेष कार्य एवं कर्तव्य) निवेशकों (एफपीआई) से प्रवाह पर असर पड़ सकता है और यह जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) विकास दर को प्रभावित कर सकता है।

• घरेलू निवेशक प्रत्यक्ष नकरात्मक प्रभाव के बारे में चिंतित हैं क्योंकि ब्रिटेन में सक्रिय निवेश करने वाली कुछ भारत स्थित कंपनियों (जनसमूहों) और सेक्टरों को इस से नुकसान होगा।

• ब्रिटेन में भारतीय निवेश का एक तिहाई आईटी और दूरसंचार क्षेत्र में है। ब्रिटेन के बाहर निकलने के कारण यूरोप और ब्रिटेन के लिए अलग-अलग मुख्यालयों की आवश्यकता पड़ सकती है।

• पाउंड (ब्रिटिश मुद्रा) में प्रतिक्रियावादी गिरावट के साथ भारतीय निवेशकों को अल्पावधि में लाभ मिलने वाला है जिस से वे एक सस्ती दर पर ब्रिटेन में संपत्ति प्राप्त कर सकते हैं।

• कमजोर पाउंड भारतीय पर्यटकों एवं छात्रों के लिए लाभदायक है।

• भारत यूरोपीय संघ के मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है। अब ब्रिटेन के बाहर निकलने के कारण मुक्त व्यापार समझौते का पुनर्लेखन करना होगा।

• मुद्रा अवमूल्यन जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को ओर अधिक बढ़ाएगा तथा कमजोर एशियाई मुद्राओं पर अधिक दबाव डालेगा।

• रुपये में गिरावट व्यापार संतुलन (चालू खाते के घाटे में वृद्धि) दबाव का प्रतीक हो सकता है।

यूरोपीय संघ पर प्रभाव

• बेग्जिट मत के बारे में सबसे बड़ी चिंता यह है कि इसने अनगिनत संभावनाओं का पिटारा खोल दिया है।

• सबसे बड़ा डर ’संक्रमण’ का था। फ्रांस और नीदरलैंड के दक्षिणपंथी नेताओं ने अपने देशों में यूरोपीय संघ की सदस्यता पर तत्काल जनमत संग्रहण करने की मांग भी कर दी है।

• यूरोपीय संघ ने ब्रिटेन से ”जल्द से जल्द” इसे छोड़ने का आग्रह किया क्योंकि इसकी प्रतिक्रिया के रूप मेें जनमत संग्रहों की एक श्रृंखला के लिए यह एक चिंगारी का कार्य कर सकता है जो यूरोपीय एकता के लिए बड़ा झटका हो सकता है।

• आप्रवासन विरोधी समूहों और राष्ट्रवादी एवं उप-राष्ट्रवादी ताकतों को यूरोपीय संघ में आधार हासिल होगा।

• यह नतीजा यूरोप के संवदेनशील विकासमार्ग को अवरोधित कर सकता है यूरो के तेजी से अवमूल्यन से यूरोपीय संघ के बाजार की प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ेगा।

संभावना है कि यरोप मजबूत आप्रवासन अधिनियम लागू करे।

• पूरे यूरोप में, यूरोसेप्टिक अर्थात व्यवस्था विरोधी दलों के उदय के बारे में आशंका गहरा हरी है।

• वित्तीय प्रभाव यूरोपीय संघ को ज्यादातर धन अपने सदस्य देशों से मिलता है और ब्रिटेन एक बड़ा योगदानकर्ता है।

राजनीतिक प्रभाव: ब्रिटेन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) का एक स्थायी सदस्य है, ब्रिटेन के बाहर निकलने से वैश्विक मामलों में यूरोपीय संघ की राजनीतिक शक्ति कम हो जाएगी।

• यूरोपीय संघ का विस्तार: इसका असर उन देशों (तर्की) पर पड़ेगा जो यूरोपीय संघ में शामिल होने को तैयार हैं।

नॉर्वे मॉडल (आर्दश)-बीच का रास्ता

• नॉर्वे, आइसलैंड और लीचटेंस्टीन के साथ यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र (ईईए) का सदस्य है।

• यूरोपीय संघ और ईईए के बीच संबंधों का प्रबंधन करने हेतु ईईए देशों का ब्रसेल्स में एक अलग सचिवालय है।

• वे यूरोपीय संघ के बजट में योगदान कर सकते हैं और यूरोपीय संघ से बाहर रहते हुए एकल बाजार तक पहुंच रख सकते हैं।