भारत और ईरान (India And Iran – Governance And Governance)

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प्रधानमंत्री के दव्ारा ईरान की पहली आधिकारिक यात्रा की गयी। यात्रा के दौरान पक्षों ने आर्थिक, व्यापारिक, बंदरगाह विकास, संस्कृति, विज्ञान और शैक्षणिक सहयोग जैसे 12 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

चाबहार बंदरगाह समझौता

भारत और ईरान के दव्ारा ऐतिहासिक चाबहार बंदरगाह समझौते पर हस्ताक्षर किये गए। यह समझौता भारत के लिए अफगानिस्तान, मध्य-एशिया और यूरोप के संदर्भ में प्रवेश दव्ार के समान है।

• समझौते के अंतर्गत दो टर्मिनलों और पांच बर्थ (जन्म/किसी चीज़ की शुरुआत) के विकास और संचालन के लिए 10 वर्षो का एक अनुबंध किया गया।

• 500 मिलियन डालर की क्रेडिट (उधार की प्रथा/आस्था रखना) लाइन (रेखा) उपलब्ध कराने का प्रावधान किये जाने के साथ ही इस्पात रेल और बंदरगाह के कार्यान्वयन हेतु 3,000 करोड़ रुपये प्रदान किये जायेंगे।

• चाबहार-जेदान रेलवे लाइन (रेखा) के विकास के लिए 1.6 अरब डालर का वित्तीयन उपलब्ध कराने के साथ ही भारतीय रेल दव्ारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के संबंध में एम. ओ. यू. करार संपन्न किया गया। द्रष्टव्य है कि चाबहार-जेदान रेलवे लाइन भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच पारगमन और व्यापार गलियारे से संबंधित त्रिपक्षीय समझौते का भी हिस्सा है।

• भारत चाबहार मुक्त व्यापार क्षेत्र में यूरिया संयंत्रों से लेकर एल्यूमीनियम (एक हल्की धातु) उद्योग जैसी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना में निवेश करेगा।

नई दिल्ली और तेहरान 2003 में ईरान-पाकिस्तान सीमा के पास, बंदरगाह विकसित करने के लिए सहमत हुए थे लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण तथा कुछ हद तक भारतीय पक्ष की निष्क्रियता के कारण परियोजना प्रारंभ नहीं हो पाई।

बंदरगाह का आर्थिक महत्व

• एक बार चाबहार बंदरगाह विकसित हो जाने बाद भारतीय जहाजों की ईरानी तट तक सीधी पहुँच हो जाएगी, अफगान सीमावर्ती शहर जरांज तक एक रेल लाइन भारत को पाकिस्तान के चारों ओर मार्ग प्रदान करेगी।

• वर्ष 2009 में भारत के दव्ारा विकसित की गयी जरांज-डेलाराम सड़क के माध्यम से भारत गारलैंड हाइवें (मुख्य मार्ग) से संबद्ध हो सकता है। गारलैंड हाइवे से भारत की संबद्धता भारत को अफगानिस्तान के 4 प्रमुख शहरों हेरात, कंधार, काबुल और मजार-ए-शरीफ तक पहुँच प्रदान करेगी।

• यह ईरान और अफगानिस्तान के साथ व्यापार को बढ़ावा देगा।

• इस परियोजना के माध्यम से, भारत से अफगानिस्तान तक केवल माल भेजना ही सुगम नहीं होगा अपितु मध्य-एशिया के लिए भविष्य में विकसित किये जाने वाले अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (गलियारा) (आईएनएसटीसी) के साथ संबंद्धता भी संभव हो पाएगी।

सामरिक महत्व

• चाबहार 46 अरब डालर की राशि से चीन दव्ारा विकसित किये जाने वाले आर्थिक गलियारें के मुख्य केंद्र ग्वादर बंदरगाहर से महज 100 किमी दूर है।

• चीन-पाकिस्तान आर्क को पूरी तरह दर-किनार करते हुए मध्य-ऐशिया के लिए भारत के प्रवेश दव्ारा के समान कार्य करेगा।

• चाबहार में भारत की उपस्थिति पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह के जरिये चीनी उपस्थिति के प्रभावों को कम करेगा।

त्रिपक्षीय व्यापार संधि

• भारत, अफगानिस्तान और ईरान ने इस बंदरगाह के विकास के लिए त्रिपक्षीय व्यापार संधि पर हस्ताक्षर किए।

• यह त्रिपक्षीय परिवहन गलियारा परियोजना दक्षिण और मध्य-एशिया के भू राजनीतिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि इस समझौते को ’गेम (उत्साही) चेंजर’ के रूप में परिभाषित किया जा रहा है।