आधार विधेयक 2016 (Aadhar Bill, 2016 – Law)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• आधार (टार्गेटेड (लक्ष्य) डिलीवरी (प्रतिपादन) ऑफ़ (का) फाइनेंसियल एंड (वित्तीय, और) अदर (अन्य) सब्सिडीज (आर्थिक सहायता), बेनिफिट्‌स एंड सर्विसेज) (लाभ और, सेवा) विधेयक, 2016 को हाल ही में संसद की स्वीकृति प्राप्त हुई है।

• विधेयक में भारत में निवास करने वाले व्यक्तियों के लिए सब्सिडी (आर्थिक सहायता)और सेवाओं के लक्षित वितरण के लिए आधार कार्ड को वैधानिक समर्थन प्रदान किये जाने का प्रावधान है।

विधेयक की विशेषताएं

• प्रत्येक निवासी एक आधार संख्या प्राप्त करने का हकदार होगा। एक निवासी वह व्यक्ति है जो किसी एक वर्ष में 182 दिन भारत में रहा हो।

• आधार कार्ड से संबंधित कार्यकलापों को संपादित करने के लिए विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (’यूनिक आईडेंटिफिकिशन अथॉरिटी’-यूआईडी) का गठन किया जाएगा।

यूआईडी की संरचना: एक अध्यक्ष, दो अंशकालिक सदस्य और एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी। अध्यक्ष और सदस्यों को प्रौद्योगिकी, प्रशासन आदि जैसे विषयों में कम से कम 10 वर्षों का अनुभव होना चाहिए।

एक व्यक्ति दव्ारा आधार संख्या प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित आवश्यक हैं

• बायोमीट्रिक (फोटोग्राफ (छायाचित्र), फिंगर प्रिंट (अंगुली छाप), आईरिस स्कैन) (सूक्ष्म परीक्षण करना)

• जनांकिकीय सूचना (नाम, जन्मतिथि, पता)

• यूनिक (अनोखा) आईडेंटिफिकिशन (पहचान) अथॉरिटी (अधिकार) (यूआईडी) विनियमों के दव्ारा अन्य बायोमेट्रिक एवं जनांकिकीय सूचनाओं को भी आवश्यक बना सकती है।

• यूआईडी प्राधिकरण के महत्वपूर्ण कार्य निम्नलिखित हैं:

• नामांकन के दौरान विशिष्ट जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) और बॉयोमेट्रिक जानकारी एकत्रित करना।

• प्रत्येक व्यक्ति को आधार संख्या आवंटित करना।

• आधार संख्या को प्रमाणित करना।

• सब्सिडी और सेवाओं के वितरण के लिए आधार संख्या के उपयोग को विनिर्दिष्ट करना।

• बायोमीट्रिक जानकारी (फिंगर प्रिंट (अंगुली छाप), आईरिस (इन्द्रधनुष) स्कैन (सूक्ष्म परीक्षण करना)

• और अन्य जैविक विशेषताएं) को केवल आधार नामांकन और प्रमाणीकरण उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाएगा तथा किसी के साथ साझा नहीं किया जाएगा।

• इन्हें केवल राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में और न्यायालय के आदेश के उपरांत ही प्रकट किया जाएगा।

• केंद्रीकृत डेटाबेस (परिकलक में संचित विपुल सूचना-सामग्री) तक अनाधिकृत पहुँच (जिसमें किसी भी संगृहीत जानकारी का प्रकटीकरण भी शामिल है) के लिए किसी व्यक्ति को 3 वर्ष तक का कारावास और न्यूनतम 10 लाख रुपयें के जुर्माने का दंड दिया जा सकता है।

इस विधेयक के लाभ

• फर्जी/नकली लाभार्थी विभिन्न योजनाओं की सफलता में बाधा बने हुए हैं: इसलिए यह वितरण प्रणाली में लीकेज (टपकाव) को रोकने में सक्षम होगा।

• यह बड़े पैमाने पर राजनीतिक और नौकरशाही से जुड़े भ्रष्टाचार को कम करने का एकल व सर्वाधिक महत्वपूर्ण तरीका है।

• यह गरीबों को किये जा रहे आय हस्तातंरण एवं सेवा वितरण को अधिक सक्षम बनाएगा।

विधेयक से जुड़े मुद्दे

• आधार विधेयक को धन विधेयक के रूप में प्रस्तुत किये जाने से राज्यसभा की भूमिका को नजरअंदाज किया गया, अगर ऐसा नहीं होता तो राज्यसभा में चर्चा के दौरान बहुमूल्य सुझाव प्राप्त हो सकते थे।

धन विधेयक: संविधान के अनुच्छेद 110 में धन विधेयक की परिभाषा दी गई है। इसके अनुसार कोई विधेयक तब धन विधेयक माना जाएगा, जब उसमें निम्न वर्णित एक या अधिक या समस्त उपबंध होंगे:

• किसी कर का अधिरोपण, उत्सादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन

• केंद्र सरकार दव्ारा उधार लिए गए धन का विनियमन

• भारत की संचित निधि या भारत की आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा, ऐसी किसी भी निधि में धन जमा करना या उसमें से धन निकलना

• भारत की संचित निधि से धन का विनियोग

• भारत की संचित निधि पर भारित किसी व्यय की उदघोषणा या इस प्रकार के किसी व्यय की राशि में वृद्धि

• भारत की संचित निधि या लोक लेखे में किसी प्रकार के धन की प्राप्ति या अभिरक्षा या इनसे व्यय या केंद्र या राज्य की निधियों का लेखा-परीक्षण, या

• उपरोक्त विनिर्दिष्ट किसी विषय का आनुषांगिक कोई विषय।

अन्य प्रावधान

• यदि वह प्रश्न उठता है कि क्या कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, तो इस संबंध में लोक सभा के अध्यक्ष का निर्णय अंतिम निर्णय होता है।

• इस सबंध में उसके (अध्यक्ष के) निर्णय को किसी भी न्यायालय या संसद के किसी भी सदन या राष्ट्रपति के समक्ष चुनौती नहीं दी जा सकती।

• जब धन विधेयक राज्यसभा या राष्ट्रपति के पास स्वीकृति हेतु जाता है तो लोकसभा अध्यक्ष इसे धन विधेयक के रूप में पृष्ठांकन करता है।

• धन विधेयक केवल लोक सभा में और केवल राष्ट्रपति की अनुशंसा से ही प्रस्तुत किया जा सकता है।

• इस तरह के प्रत्येक विधेयक को सरकारी विधेयक माना जाता है तथा इसे केवल एक मंत्री ही प्रस्तुत कर सकता है।

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