असम और राष्ट्रीय नागरिक पंंजी (1951) का संशोधन (Amendment of Assam And National Civil Register (1951) – Arrangement of The Governance)

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राष्ट्रीय नागरिक पंंजी (एनआरसी) 1951 का अद्यतनीकरण क्या है?

• राष्ट्रीय नागरिक पंंजी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) 1951 को 1951 की जनगणना के बाद तैयार किया गया था। इन पंजियों में 1951 की जनगणना के दौरान गणना में सम्मिलित प्रत्येक व्यक्ति को सूचीबद्ध किया गया था।

सुर्ख़ियों में क्यों?

• इसे 1951 के बाद प्रथम बार सिर्फ असम राज्य में ही पुनर्संशोधित किया जा रहा है।

• इसके मार्च 2016 तक पूरा कर लिए जाने की आशांं है।

• इस पूरी प्रक्रिया को भारत के रजिस्ट्रार (पंजीयक) जनरल (सामान्य) के कार्याधीन रखांं गया है, तथा इसकी निगरानी सर्वोच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय निगरानी समिति के दव्ारा की जाएगी।

• राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के अद्यतनीकरण का अर्थ है 1971, 1951 तक की राष्ट्रीय पंजी, मतदाता सूची या 1971 तक निर्गत किसी भी अन्य स्वीकारणीय दस्तावेज (जो 1971 या उससे पूर्व असम में उनकी उपस्थिति को सिद्ध करता हो) के आधार पर नागरिकों (या उनके वंशजों) के नाम को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया।

• किसी अन्य राज्य का भारतीय नागरिक, जो दी गई नियत तिथि के बाद असम में जाकर बसा हो, ऐसा व्यक्ति राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) में सम्मिलित किये जाने की पात्रता नहीं रखता, तथापि वह अपने मताधिकार का प्रयोग जारी रख सकता है।

• एनआरसी राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (पंजीका) का एक उपसमुच्चय है।

नागरिकों की राष्ट्रीय पंजी (एन.आर.सी.) के अद्यतनीकरण की आवश्यकता

• वर्ष 1985 में हस्ताक्षरित असम समझौते के प्रावधानों का अनुपालन।

• असम में अवैध आप्रवासियों (जिनमें से अधिकांश बांग्लादेश से आये हैं) के मुद्दे पर लगातार हिंसक झड़पें देखने को मिली हैं। वर्ष 1971 के बाद राज्य में बसे लोगों को वापस भेजे जाने की मांग भी उठी है। नागरिकों की राष्ट्रीय पंजी (एन.आर.सी.) के अद्यतनीकरण से इस मुद्दे के समाधान की अपेक्षांं है।

• यह बंगाली मुसलमानों को असम के समाज में सम्मिलित करने का उपाय है तथा इस समस्या को लोकतांत्रिक तरीके से हल करने का एकमात्र मार्ग है।

• इससे अवैध आप्रवासियों के रूप में माने जाने वाले बहुत-से लोगों को भारतीय नागरिकता का प्रमाण प्राप्त हो सकेगा।

• अवैध आप्रवासी कहकर अवांछित उत्पीड़न का शिकार बनाए गए परिवारों को इस उत्पीड़न से मुक्ति प्रदान की जा सकेगी।

• इसका अद्यतनीकरण सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से किया जा रहा हैं।

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