डिजिटल इंडिया (अंकसंबंधी भारत) कार्यक्रम (Digital India Program – Policies)

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• यह एक अम्ब्रेला कार्यक्रम है जिसके अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक (विद्यत संबंधी) तथा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग दव्ारा समन्वित कई सरकारी मंत्रालय तथा विभाग सम्मिलत हैं।

• डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का लक्ष्य देश को एक डिजिटल सशक्त ज्ञान अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करना है।

• इसका लक्ष्य एक सहभागी तथा अनुक्रियाशील सरकार और देश में सुरक्षित और सुदृढ़ साइबर स्पेस (शून्य जगह) का निर्माण करना है।

डिजिटल इंडिया (अंकसंबंधी, भारत) के नौ स्तम्भ

ब्राॅंडबैंड (विविध मीटरबैंड और फ्रिक्वनसी (तीव्रता) से युक्त) हाईवे (मुख्य मार्ग)

• इसके अंतर्गत तीन उपघटक आते हैं- सभी ग्रामीणों क्षेत्रों के लिए ब्रॉडबैंड सुविधा, सभी नगरीय क्षेत्रों के लिए ब्राॅंडबैंड सुविधा तथा राष्ट्रीय सूचना अवसंरचना।

• सभी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ब्राॅंडबैंड के अंतर्गत दिसंबर, 2016 तक 2,50,000 ग्राम पंचायतों को कवर (आवरण) किया जाएगा।

• सभी शहरी क्षेत्रों के लिए ब्राॅंडबैंड के अंतर्गत, वर्चुअल (रसद जुटाना) नेटवर्क (जाल पर कार्य) आपरेटरों (कार्य करना) को सेवा प्रदान करने के लिए सशक्त करते हुए, शहरी निर्माण और विकास के सभी कार्यक्रमों में संचार के आधारभूत ढांचे के विकास को अनिवार्य कर दिया जाएगा।

• राष्ट्रीय सूचना अवसंरचना एसडब्ल्यूएएन (स्वान), एनकेएन तथा एनओएफएन (नोफन) जैसे नेटवर्को (जाल पर कार्यों) को क्लाउड (काला और भयभीत करनेवाला) आधारित राष्ट्रीय तथा राज्यीय आंकड़ा केंद्रो के साथ एकीकृत करेगी।

यूनिवर्सल (संपूर्ण) मोबाइल (चलनशील) कनेक्टिविटी तक पहुँच

पब्लिक (लोग) इंटरनेट एक्सेस (पहुंच) कार्यक्रम

• इस कार्यक्रम के दो उप घटक हैं- सार्वजनिक सेवा केंद्र तथा बहु-सेवा केंद्रों के रूप में डाक घर।

• सार्वजनिक सेवा केंद्र (सीसीएस) को सशक्त बनाया जाएगा तथा इसकी संख्या वर्तमान 1,35,000 कार्यरत केंद्रो से बढ़ाकर 2,50,000 की जाएगी अर्थात प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक सार्वजनिक सेवा केंद्र होगा। सार्वजनिक सेवा केंद्रों को सरकारी तथा व्यावसायिक सेवायें प्रदान करने के लिए व्यवहार्य, बहु-प्रकार्यात्मक अंतिम बिंदु के रूप में बनाया जाएगा।

• कुल 150,000 डाकघरों को बहु-सेवा केंद्र के रूप में परिवर्तित किये जाने का प्रस्ताव हैं।

ई-गवर्नेस-प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरकार में सुधार

• प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरकार में सुधार लाने के मार्गदर्शक सिद्धांत हैं- विभिन्न सेवाओं के लिए भरे जाने वाले प्रपत्रों को आसान बनाना और इसमें निहित मदों को कम करना, ऑनलाइल आवेदन और उनकी स्थिति की ट्रैकिंग (व्यापार), ऑनलाइन दस्तावेजों का अनिवार्य उपयोग जैसे विद्यालयी प्रमाणपत्र, मतदाता पहचानपत्र आदि।

• इलेक्ट्रॉनिक (विद्युत संबंधी) डेटाबेस-सभी डेटाबेस और सूचना इलेक्ट्रॉनिक होनी चाहिए, हस्ताचालित नहीं।

• सरकार की आतंरिक कार्यवाही का स्वचालन-कार्य-कुशल सरकारी प्रक्रियाओं को सक्षम करने के लिए और नागरिकों के लिए इन प्रक्रियाओं की पारदर्शिता के लिए सरकारी एजेंसियों (कार्यस्थानों) के अंदर की कार्यवाही को स्वचालित किया जाना चाहिए।

• लोक शिकायतों का निपटारा-निरंतर बनी हुई समस्याओं की पहचान करने तथा उनका समाधान करने हेतु आंकड़ों को स्वचालित करने, प्रत्युत्तर देने तथा विशेलषण के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग किया जाना चाहिए। ये मुख्य रूप से प्रक्रियागत सुधार होंगे।

ई-क्रांति (एनईजीपी 2.0)- सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक (विद्युत संबंधी) डिलीवरी (प्रतिपादन)

• ई-शासन परियोजना जीवनचक्र के विभिन्न चरणों के अंतर्गत मिशन मोड (नियोग, रीति) की कुल 31 परियोजनाएं हैं। इसके अतिरिक्त, (एनईजीपी की शीर्ष समिति ने ई-क्रांति में 10 नयी मिशन मोड (नियोग, रीति) परियोजनाओं को जोड़ा है।

शिक्षा हेतु प्रौद्योगिकी-ई-शिक्षा: सभी माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक विद्यालयों में निशुल्क वाई-फाई प्रदान किया जाएगा। (इसके अंतर्गत कुल 250,000 विद्यालय आएगें।) राष्ट्रीय स्तर पर एक डिजिटल (अंकसंबंधी) साक्षरता कार्यक्रम का संचलान किया जाएगा। ई-शिक्षा के लिए बड़ी संख्या में ऑनलाइन मुक्त पाठयक्रमों (एमओओसीएस) को संचालित और सशक्त किया जाएगा।

स्वास्थ्य हेतु प्रौद्योगिकी -ई-स्वास्थ्य: ई-स्वास्थ्य सेवा में जहां एक ओर ऑनलाइन चिकित्सकीय परामर्श, ऑनलाइन चिकित्सकीय आंकड़े हर जगह उपलब्ध होंगे वहीं इसके माध्यम से ऑनलाइन औषधि और रोगी से संबंधित सूचना का पूरे भारत में आदान-प्रदान किया जा सकेगा।

किसानों के लिए प्रौद्योगिकी: इसमें किसानों को वास्तविक मूल्य की जानकार, इनपुट्‌स (आगत) को ऑनलाइन मंगाने तथा ऑनलाइन नगद पाने और मोबाइल बैकिंग के माध्यम से ऋण तथा राहत भुगतान पाने में सहायता मिलेगी।

सुरक्षा के लिए प्रौद्योगिकी: मोबाइल आधारित आपातकालीन सेवायें तथा आपदा संबंधी सेवायें नागरिकों को वास्वविक समय के आधार पर उपलब्ध कराई जाएगी ताकि समय रहते निवारक उपाय किये जा सके।

वित्तीय समावेशन हेतु प्रौद्योगिकी: मोबाइल, बैंकिंग (महाजन), माइक्रो-ए.टी.एम. कार्यक्रम तथा सी.सी.एस./डाकघरों के माध्यम से वित्तीय समावेशन को सशक्ता प्रदान की जाएगी।

न्याय हेतु प्रौद्योगिकी: ई-न्यायालय, ई-पुलिस, ई-कारागारों, तथा ई-अभियोजन जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से आपराधिक न्याय प्रणाली को सशक्त किया जा सकेगा।

नियोजन हेतु प्रौद्योगिकी: किसी परियोजना के संबंध में योजना निर्माण, परिकल्पना, डिजाईन (रूपरेखा) तथा विकास के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) आधारित निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय जीआईएस मिशन मोड (नियोग, रीति) परियोजना का कार्यान्वयन किया जाएगा।

साईबर सुरक्षा हेतु प्रौद्योगिकी: देश के भीतर सुरक्षित तथा विश्वसनीय साइबर स्पेस सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वय केंद्र की स्थापना की जाएगी।

सबके लिए सूचना

• सरकार नागरिकों को आवश्यक जानकारियाँ प्रदान करने हेतु सोशल मीडिया (सामाजिक, दूरसंचार माध्यम) तथा वेब आधारित मंत्रों के माध्यम से अग्र सक्रिय रूप से संपर्क स्थापित करेगी।

• सरकार के साथ विचारों/सुझावों का आदान-प्रदान करने के लिए माई (मेरा) गवरमेंट (सरकार) .इन (अंदर) My Gov. in का शुभारंभ पहले ही किया जा चुका है। यह नागरिकों तथा सरकार के बीच दो तरफ़ा संवाद को सुगम बनाएगा।

इलेक्ट्रॉनिक (विद्युत संबंधी) वस्तुओं का निर्माण-आयाता शून्य तक लाने का लक्ष्य

रोजगार के लिए सूचना प्रौद्योगिकी

• आने वाले पांच वर्षों में छोटे शहरों तथा गांवो के 1 करोड़ विद्यार्थियों को सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रक में रोज़गार हेतु प्रशिक्षित किया जाएगा।

• पूर्वोत्तर के प्रत्येक राज्य में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित विकास को सुगम बनाने हेतु बीपीओ की स्थापना की जाएगी।

• 3 लाख सेवा वितरण एजेंटो (कार्यकर्ता) को सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित सेवायें प्रदान/वितरित करने के लिए कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

अर्ली (शीघ्र) हार्वेस्ट (संग्रह किया हुआ अन्न) कार्यक्रम

संदेशों के लिए सूचना प्रौद्योगिकी मंच: इलेक्ट्रॉनिक(विद्युत संबंधी) तथा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के दव्ारा एक जन संदेश अनुप्रयोग तैयार किया गया है। सभी निर्वाचित प्रतिनिधि तथा सभी सरकारी कर्मचारी इसके दायरे में आयेंगे।

बायोमेट्रिक उपस्थिति: इसके दायरे में दिल्ली में केंद्र सरकार के सभी कार्यालय आएगे।

सभी विश्वविद्यालयों में वाई-फाई की सुविधा

सार्वजनिक वाई-फाई हॉटस्पॉट: डिजिटल (अंकसंबंधी) शहरों को बढ़ावा देने के लिए 10 लाख से अधिक की जनसंख्या वाले शहरों पर्यटक केन्द्रों को वाई-फाई हॉटस्पॉट प्रदान किये जाएगे। इसे योजना को दूर संचार विभाग तथा शहरी विकास मंत्रालय के दव्ारा कार्यान्वित किया जाएगा।

खोया-पाया बच्चों के लिए राष्ट्रीय पोर्टल (प्रवेशदव्ार) : यह खोया तथा पाए गए बच्चों के संबंध में वास्तविक समय आधारित सूचना एकत्रित करने तथा उसे साझा करने को सुगम बनाएगा। इससे अपराध पर नियंत्रण तथा समय पर कार्यवाही करने में बहुत सहायता मिलेगी। हाल ही में खोया-पाया पोर्टल का शुभारंभ किया गया है।

डिजिटल (अंकसंबंधी) लॉकर

• डिजिटल (अंकसंबंधी) लॉकर (टेबल की दराज जिस में ताला बंद होता है) सरकारी विभागों दव्ारा जारी किए गए ई-दस्तावेजों के साथ ही यूनिफ़ॉर्म (एक समान) रिर्सोसर् (उपाय/साधन) पहचानकर्ता (यूआरआई) के ई- दस्तावेजों के लिए एक समर्पित व्यक्तिगत भंडारण स्थान है। इस प्रणाली में ई-हस्ताक्षर सुविधा भी उपलब्ध होगी जिसका प्रयोग संग्रहित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए किया जाएगा। प्रत्येक लॉकर, व्यक्ति की आधार संख्या से जुड़ा होगा।

• इस कदम का उद्देश्य भौतिक (कागजी) दस्तावेजों के प्रयोग को कम से कम करना तथा ई-दस्तावेजों को प्रामाणिकता प्रदान करना है। इस प्रकार यह सरकार दव्ारा निर्गत दस्तावेजों तक सुरक्षित पहुँच प्रदान करता है। इससे सरकारी विभागों तथा एजेंसियों (कार्यस्थानों) के प्रशासकीय खर्चों में भी कमी आएगी तथा नागरिकों के लिए सेवाएं प्राप्त करना सरल हो जाएगा।

राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (प्रवेशदव्ार): राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल प्रारंभ से अंत तक पूरी छात्रवृत्ति प्रक्रिया के लिए समग्र समाधान प्रस्तुत करता है। सरकार दव्ारा प्रदान की जाने वाली समस्त छात्रवृत्तियों के लिए विद्यार्थी दव्ारा आवेदन, सत्यापन और लाभार्थी तक संवितरण की स्वीकृति हेतु यह पोर्टल डिजिटल इंडिया (प्रवेशदव्ार, अंकसंबंधी भारत) पहल का एक महत्वपूर्ण साधन है।

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