नदियों का अंतसंपर्क (End Contact of Rivers – Policies)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• सरकार ने नदी जोड़ों (आईएलआर) कार्यक्रम को उच्च प्राथमिकता आधार पर राष्ट्रीय परिपेक्ष्य योजना (एनपीपी) के अंतर्गत रखा है और केन-बेतवा लिंक परियोजना, दमनगंगा-पिंजन लिंक परियोजना और पार-तापी-नर्मदा लिंक परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (विवरण) (डीपीआर) पूरी की जा रही है।

राष्ट्रीय नदी संपर्क परियोजना (एनआरएलपी)

• औपचारिक रूप से राष्ट्राय परिप्रेक्ष्य योजना के रूप में विदित राष्ट्रीय नदी संपर्क परियोजना (एनआरएलपी) में बाढ़ बेसिनों से ’अतिरिक्त’ जल को अंतर-बेसिन जल स्थानांतरण के माध्यम से सूखे/अभाव वालें ’जल न्यून’ बेसिनों (आधार) में पहुंचाने की परिकल्पना की गई है।

• इस विशाल दक्षिण एशियाई जल ग्रिड (छड़ लगा हुआ ढांचा) का निर्माण करने के लिए लगभग 3000 भंडारण बांधों के नेटवर्क (जाल पर कार्य) के माध्यम से पूरे देश में 37 नदियों को जोड़ने के लिए 30 कड़ियों (लिंक) का समावेश होगा। इसमें हिमालयी और प्रायदव्ीपीय, दो घटक सम्मिलित हैं।

परियोजना के लाभ

जल विद्युत उत्पादन: इसमें कुल 34 गीगावॉट विद्युत उत्पादन का दावा किया जा रहा है।

सिंचाई: पानी की कमी से जूझ रहे पश्चिमी और प्रायदव्ीपीय प्रदेशों में 35 मिलियन (दस लाख) हेक्टयेर (भूमि की एक माप) की अतिरिक्त सिंचाई क्षमता की व्यवस्था होगी। इसमें सतही सिंचाई के माध्यम से 25 मिलियन हेक्टयेर और भूमिगत जल के माध्यम से 10 मिलियन हेक्टेयर सम्मिलित है।

बाड़ की रोकथाम: नदियों के नेटवर्क (जाल पर कार्य) से सूखे का सामना कर रहे क्षेत्रों में अतिरिक्त पानी भेजकर बाढ़ की समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है।

नौवहन: नहरों का नव निर्मित नेटवर्क (जाल पर कार्य) नए मार्ग और रास्ते तथा जल नौवहन का मार्ग खोलेगा जो सामन्यत: सड़क परिवहन की तुलना में अधिक दक्ष और सस्ता होता है।

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