इसरो दव्ारा 20 उपग्रह प्रक्षेपित (20 Satellite Launches By ISRO – Science And Technology)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• इसरो ने श्रीहरिकोटा अवस्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से एक ही रॉकेट (अग्निबाण) से 20 उपग्रहों को प्रक्षेपित कर एक नया रिकॉर्ड (दर्ज करना) कायम किया है। इसमें अमेरिका, जर्मनी कनाडा और इंडोनेशिया के उपग्रह सम्मिलित थे।

• इसने भारत को अमेरिका और रूस के विशिष्ट वर्ग में लाकर खड़ा कर दिया है, जिन्होंने पहले ही एक ही प्रक्षेपण में 20 से अधिक उपग्रह प्रक्षेपित करने में सफलता प्राप्त कर ली है।

• इसरो ने एक साथ 10 उपग्रह प्रक्षेपित करने के खुद के 2008 के रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

मिशन के बारे में

• 3 भारतीय और 17 विदेशी वाणिज्यिक उपग्रहों के प्रक्षेपण में पीएसएलवी-सी34 यान का प्रयोग किया गया।

• इन 3 भारतीय उपग्रहों में एक र्कोटोसेट-2 श्रेणी का उपग्रह है जिसका संभावित उपयोग भूगर्भिक सर्वेक्षण, सीमा प्रबंधन, आपदा प्रबंधन आदि में होगा।

• अन्य दो भारतीय उपग्रह सैटाइबेमासेट और स्वायवम हैं जिसका निर्माण महाविद्यालय के विद्यार्थियों दव्ारा किया गया है।

• ये ग्रीन हाउस (शीशे का मकान जिसमें फल-सब्जी/पौधे उगाए जाते हैं) गैसों के बारे में आकड़े एकत्रित करेंगे और पॉईंट (बिंदु) टू (दिश की ओर) पॉईंट (बिंदु) मेसेजिंग (संदेश) सेवा प्रदान करेंगे।

• विदेशी उपग्रहों में इंडोनेशिया का लेपन -ए3, जर्मनी का बेरीओस, कनाडा का एम3एमसेट-डी और जीएचएससेट-डी तथा अमेरिका का स्काईसेट जेन 2-1 और 12 डव (शांति का हिमायती राजनयिक) उपग्रह शामिल था।

• पीएसएलवी-सी34 दव्ारा ले जाये गए इन 20 उपग्रहों का पेलोड या कुल वजन 1288 किलोग्राम था।

भारतीय अंतरिक्ष उद्योग को लाभ

• इस सफल प्रक्षेपण ने इसरो को 300 बिलियन (एक अरब) डॉलर (फ्रांस आदि की प्रचलित मुद्रा) के वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में एक विश्वसनीय खिलाड़ी के रूप में ला खड़ा किया है।

• विद्यार्थियों दव्ारा निर्मित उपग्रह को शामिल करने से अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में युवा मस्तिष्कों को प्रोत्साहन मिलेगा।

• एक रॉकेट (अग्निबाण) से काफी संख्या में उपग्रहों के प्रक्षेपित करना उपयोगिता, दक्षता और मिशन लागत में कमी को प्रदर्शित करता है।

भविष्य में भारत के लिए अवसर

• छोटे उपग्रहों का बाज़ार बढ़ रहा है। यह पूरी तरह इसरो के छोटे उपग्रहों को वैश्विक औसत के एक तिहाई कीमत पर प्रक्षेपित करने की क्षमता के साथ समन्वयित है।

• पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण वाहन के सफल परीक्षण के साथ ही प्रक्षेपण की वर्तमान लागत में 80 प्रतिशत तक की कमी आएगी। यह आगे विदेशी ग्राहकों को इसरो की ओर आकर्षित करेगा।

• इसरो अब भारतीय कार्यक्रमों को सब्सिडी (आर्थिक सहायता) प्रदान कर सकता है और कुछ सीमा तक अंतरिक्ष के लिए वैज्ञानिक एजेंडा (बैठक में विचारणीय विषयों की सूची, कार्य विवरण) भी सेट कर सकता है।

• भारत इसका उपयोग सॉफ्ट (सादा) पावर (शक्ति) के रूप में तृतीय विश्व के देशों के साथ संबंधों को प्रगाढ़ करने में कर सकता है।