कलपक्कम फास्ट ब्रीडर रिएक्टर शीघ्र प्रारंभ होने की संभावना (Fast Breeder Reactor At Kalpakkam Expected To Start Soon – Science And Technology)

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• कलपक्कम में 500- एमडब्ल्यूई प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) सितंबर में कमिशनिंग के लिए तैयार हो रहा है।

• यह भारत के तीन चरण वाले नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण में सफलतापूर्वक प्रवेश का सूचक है।

ईंधन: इसमें प्लूटोनियम-यूरनियम ऑक्साइड ईंधन के रूप में प्रयुक्त होगा।

शीतलक: द्रव सोडियम का प्रयोग शीतलक के रूप में किया जाएगा।

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर क्या है: यह एक ऐसा रिएक्टर है, जो अपनी खपत से अधिक ईंधन का उत्पादन करता है।

वर्तमान स्थिति: प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का निर्माण पूरा हो गया है और उपकरण को क्रियाशील कर दिया गया है। एजेंसी (कार्यस्थान), परमाणु ऊर्जा नियामक बोडर् (मंडल) (एईआरबी) से सोडियम आवेशन, ईंधन लोडिंग (भार), रिएक्टर की क्रिटिकलिटी और उसके बाद ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने हेतु अनुमति की प्रतीक्षा कर रही है।

रिएक्टरों का निर्माण किसने किया: इसका निर्माण भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (सीमित) (भाविनि) ने किया है, यह परमाणु ऊर्जा विभाग का सार्वजनिक क्षेत्र का एक उपक्रम है।

भारत का तीन चरणों वाला नाभिकीस कार्यक्रम: डा. होमी भाभा दव्ारा 1950 के दशक में देश की दीर्घावधिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया था। इसमें दक्षिण भारत के समुद्रतटीय क्षेत्रों की मोनाजाईट रेत में पाए जाने वाले यूरेनियम और थोरियम के भंडारों का उपयोग किया जाना था।

नाभकीय कार्यक्रम की प्रेरणा: भारत के पास विश्व के कुल थोरियम भंडारों का 25 प्रतिशत है किन्तु वैश्विक यूरेनियम भंडारों का केवल 1-2 प्रतिशत ही है। इस कार्यक्रम दव्ारा भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए थोरियम भंडारों का उपयोग करना संभव हो सकेगा।

• हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुआ नाभकीय समझौता और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) दव्ारा दी गई छूट ने भारतीय नागरिक परमाणु कार्यक्रम की तीन दशक से भी अधिक समय की अंतरराष्ट्रीय पृथकता को समाप्त कर दिया है। इस समझौते और छूट ने तीन चरणों वाले नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम की सफलता के लिए कई ऐसे विकल्पों का सृजन किया है। जिनका दोहन अब तक नहीं हो सकता था।