भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली नाविक (Indian Regional Navigation Satellite System Navigator – Science And Technology)

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प्रक्षेपित उपग्रह

पीएसएलवी-सी 22/आईआरएनएसएस-1ए मिशन

पीएसएलवी-सी 24/आईआरएनएसएस-1बी मिशन

पीएसएलवी-सी 26/आईआरएनएसएस-1सी मिशन

पीएसएलवी-सी 27/आईआरएनएसएस-1डी मिशन

पीएसएलवी-सी 31/आईआरएनएसएस-1ई

पीएसएलवी-सी 32/आईआरएनएसएस-1एफ मिशन

पीएसएलवी-सी 33/आईआरएनएसएस-1जी मिशन

§ नाविक, अंतरिक्ष खंड में उपस्थित सात आईआरएनएसएस उपग्रहों का समूह है।

§ इनमें से तीन उपग्रह भू-स्थिर कक्षा में उपयुक्त कक्षीय स्लॉट (खाँचा) में स्थित हैं और शेष चार आवश्यक झुकाव और दो अलग अलग तलों में विषुतीय पारगमन (इककेटोरियल क्रॉसिंग) के साथ भू-तुल्यकालिक कक्षा में स्थित हैं।

§ कॉन्स्टेलेशन (नक्षत्रमंडल) के सभी उपग्रहों का विन्यास समरूप है।

§ उपग्रहों को एल-1के बस के साथ विन्यस्त बनाया गया है ताकि उन्हें ऑन बोर्ड (खुला मंडल/सभा) पीएसएलवी प्रक्षेपण के अनुरूप बनाया जा सके।

§ आईआरएनएसएस भारत दव्ारा विकसित की जा रही एक स्वायत्त क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली है।

§ यह भारत के साथ साथ इसकी सीमा से 1500 किमी तक की दूरी देने संबंधी सेवा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन (रूपरेखा) किया गया है।

§ एक विस्तारित सेवा क्षेत्र, प्राथमिक सेवा क्षेत्र और 130 डिग्री पूर्व से 30 डिग्री पूर्व देशांतर एवं 50 डिग्री उत्तर से 30 डिग्री दक्षिण अक्षांश दव्ारा निर्मित आयत से घिरे हुए क्षेत्र में अवस्थित होता है।

§ आईआरएनएसएस दो प्रकार की सेवाएँ प्रदान करेगा,

• स्टैण्डर्ड पोजिशनिंग सर्विस (एसपीएस) जो सभी प्रयोक्ताओं को प्रदान की जाएगी।

रेस्ट्रिक्टेड सर्विस (आरएस), जो केवल प्राधिकृत प्रयोक्ताओं को प्रदान की जाने वाली एन्क्रिप्टेड सेवा है।

§ आईआरएनएसएस प्रणाली दव्ारा प्राथमिक सेवा क्षेत्र में स्थिति की जानकारी में 20 मीटर से भी अधिक की परिशुद्धता प्रत्याशित है।

§ इसके कुछ अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं

• स्थलीय, हवाई और समुद्री नेविगेशन

• आपदा प्रबंधन

• वाहन ट्रैंकिंग और बेड़ा प्रबंधन

• मोबाइल फोन के साथ एकीकरण

• सटीक समय

• मानचित्रण और geodetic डेटा कैप्चर (आंकड़ा बंदीकरण)

• पैदल यात्रियों और पर्यटकों के लिए स्थलीय नेविगेशन सहायता

• चालकों के लिए दृश्य एवं श्रव्य युक्त नेविगेशन