Major Science And Technology Part – 4

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काग्रिटिव डिजिटल (अँगुली संबंधी) रेडियो (Portable Digital Radio – Science and Technology)

• जम्मू और कश्मीर में घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों के स्मार्टफोन्स (आर्कषक टेलिफोन) में एक नया कैलकुलेटर (परिकलन यंत्र) एप पाया गया है। यह एप उन्हें सेना के तकनीकी निरीक्षण (टेक्रिकल सर्विलांस ) की पकड़ में आये बिना पाक अधिग्रहीत कश्मीर (पीआके) में बैठे अपने हैंडलर्स से संपर्क बनाये रखने में सहायता करता है।

• यह तकनीक काग्रिटिव डिजिटल रेडियो की अवधारणा पर आधारित है जो इसके उपभोगताकर्ताओं को उनके स्मार्टफोन्स को एक से दूसरे तक ऑफ-ग्रिड संचार साधन के रूप में परिवर्तन करने में सक्षम कर देता है। इसका उपयोग सर्वप्रथम अमेरिकी कंपनी (जनसमूह) दव्ारा कैटरीना तूफ़ान के समय किया गया था ताकि प्रभावित लोग एक दूसरे के संपर्क में बने रह सके।

• सेना की सिग़ल यूनिट (एकल इकाई) उपयोग में लाये जा रहे वायरलेस (बेतार) और मोबाइल (गतिशील) फोन्स (टेलिफोन) के तकनीकी इंटरसेप्ट (कार्य में बाधा डालना) पर बहुत अधिक निर्भर रहती है।

विशाखापत्तनम में पानी के नीचे निगरानी प्रणाली (Underwater Monitoring System in Visakhapatnam – Science and Technology)

• भारतीय नौसेना ने एक एकीकृत जलमग्न बंदरगाह रखा और निगरानी प्रणाली (आईयूएचडीएसएस) और सुरंग युद्ध डाटा (कंम्यूटर में संग्रहीत तथ्य सामग्री) युक्त अत्याधुनिक बंदरगाह रक्षा प्रणाली की शुरूआत की है, जोकि विशाखापत्तनम स्थित नौसेना डॉकयार्ड (गोदी/बाड़ा, गज़) की निगरानी क्षमता और सुरक्षा खतरों के विरुद्ध प्रतिक्रिया क्षमता में वृद्धि करेगा।

• आईयूएचडीएसएस, विशाखापत्तनम बंदरगाह के लिए सतह और पानी के नीचे के सभी प्रकार के खतरों का पता लगाने, पहचान करने, खोजने और चेतावनी पैदा करने में सक्षम एक बहु-सेंसर (संवेदन) प्रणाली है।

• एमडब्ल्यूडीसी विभिन्न बंदरगाहों से नौसेना के बारूदी सुरंग खोजी जहाजों दव्ारा एकत्र आंकड़ों की तुलना, वर्गीकरण और विश्लेषण करेगा।

• सागर प्रहरी बल का सृजन, फास्ट (तेज) इंटरसेप्टर (कार्य में बाधा डालना) क्राप्ट (वायुयान/शिल्प) (एफआईसीएस) और आईयूएचडीएसएस की नियुक्ति 26/11 के परिदृश्य के बाद तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नौसेना के कुछ उपाय हैं।