नासा की अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणाली (NASA's Space Launch System – Science And Technology)

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• इसके लिए अब तक के सबसे शक्तिशाली रॉकेट का निर्माण किया गया है।

• इस प्रणाली के प्रक्षेपण यान को समय के साथ और उन्नत किया जाएगा। इस प्रणाली का प्रारंभिक संस्करण पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) तक 70 मीट्रिक टन भार ले जाने में सक्षम है इसके अगले संस्करण की भारत क्षमता 130 मीट्रिक टन होगी।

अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणाली का पहला मिशन जिसे एक्सप्लोरेशन (खोज यात्रा) मिशन1 नाम दिया गया है, एक मानवरहित ओरियन अंतरिक्ष यान होगा जिसे वर्ष 2017 में प्रक्षेपित किया जाएगा। इसका उद्देश्य रॉकेट और अंतरिक्ष यान की एकीकृत प्रणाली के प्रदर्शन को दर्शाना है। इसके बाद मानव यान भी भेजा जाएगा।

अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणाली का दूसरा मिशन जिसे एक्सप्लोरेशन मिशन 2 नाम दिया गया है, का प्रक्षेपण वर्ष 2021 में प्रस्तावित है जिसमें करीब चार अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जाएगा।

• इसका उपयोग मंगल ग्रह पर खोज के लिए भी किया जाएगा।