निसार मिशन इसरो और नासा का सहयोगात्मक कार्यक्रम (Nisar Collaborative Program of ISRO And NASA Mission – Science And Technology)

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• नासा इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (निसार) मिशन इन दो अंतरिक्ष संगठनों के बीच सबसे बड़ा सहयोग कार्यक्रम होगा।

• उन्नत रडार इमेंजिंग (कल्पना/संभावना) का प्रयोग करते हुए यह मिशन पृथ्वी के और वृहद् अवलोकन हेतु 2,600 किग्रा. के उपग्रह का निर्माण करेगा।

• भारतीय प्रक्षेपक यान दव्ारा इसके 2020 तक प्रक्षेपित होने की उम्मीद है।

पेलोड:

• एल-बैंड (24 सेंटीमीटर तंरग दैर्ध्य): नासा दव्ारा निर्मित की जाएगी।

• एस-बैंड (12 सेंटीमीटर तंरग दैध्य): इसरो दव्ारा निर्मित की जाएगी।

निसार का कार्य

• पारिस्थिकीय तंत्र में गड़बड़ी, हिमचादरों का पिघलना और प्राकृतिक खतरे, जैसे-भूकम्प, सुनामी, ज्वालामुखी और भू-स्खलन सहित इस ग्रह की कुछ सबसे जटिल प्रक्रियाओं का परीक्षण करना और परिमाप लेना।

• पृथ्वी की भौगौलिक स्थित में होने वाले परिवर्तनों का पूर्वानुमान लगाना।

• आसानी से उपलब्ध विश्व के सबसे बड़े रिमोट (बहुत दूर) सेंसिंग आंकड़ों के सेट (समुच्चय) की रचना करना।

नासा और इसरो के बीच पहले हुए सहयोग

2005 का चंद्रयान-1 मिशन, जिसमें नासा का ’moon mineralogy mapper ‘मिशन के साथ गया था जिसे परिणामस्वरूप चाँद पर पानी की ’संयुक्त खोज’ हुई थी।

2014 का चंद्रयान-1 मिशन, जिसमें सुदूर अंतरिक्ष में नेविगेशन (विमान संचालन) संबंधी नासा की विशेषज्ञता एवं गतिशीलता ने मिशन की मदद की।