महिलाओं के विरुद्ध साइबर अपराध (Cyber Crime Against Women – Social Issues)

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सुर्खियों में क्यों?

महिलाओं का आनलाइन उत्पीड़न-महिलाओं के विरुद्ध साइबर अपराध में वृद्धि हो रही हैं। अत: सरकार ने हाल ही में साइबर अपराधों को रोकने के लिए विभिन्न कदमों को उठाया है।

हाल ही में सरकार ले साइबर अपराध के निवारण के लिए निम्नलिखित कदम उठाये गए हैं-

§ साइबर अपराध के मामलों के प्रतिवेदन एवं जाँच के लिए राज्य तथा संघशासित प्रदेशें में साइबर अपराध सेल की स्थापना की गई है।

§ सरकार ने विधि प्रवर्तक एवं न्यायपालिका के प्रशिक्षण के लिए केरल, असम और मिजोरम आदि राज्यों में साइबर फोरेंसिक (पुलिस छानबीन और कानूनी समस्याओं में सहायक वैज्ञानिक परीक्षण) प्रशिक्षण तथा जाँच प्रयोगशालाओं की स्थापना की है।

§ साइबर अपराध संबंधित जाँच कार्यक्रम-विभिन्न विधि शिक्षण संस्थाएँ न्यायिक अधिकारियों के लिये साइबर कानूनों तथा साइबर अपराधों पर विभिन्न जागरुकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं।

§ सरकार दव्ारा स्थापित प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं में पुलिस एवं न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षध प्रदान किया जा रहा हैं।

§ हिंसा से प्रताड़ित सभी महिलाओं को 24 घंटे आपातकालीन तथा गैर-आपातकालीन त्वरित सहायता हेतु महिला हेल्पलाइन (महिला मददगार) उपलब्ध कराने की योजना को अनुमोदित किया गया है।

साइबर अपराध क्या है?

§ साइबर अपराध एक अपराधिक गतिविधि है जिसमें कंप्यूटर और नेटवर्क (झाल में कार्य) शामिल है।

§ एक आपराधिक उद्देश्य के साथ लोगों के खिलाफ किये अपराध जिसका उद्देश्य शारीरिक या मानसिक हानि पहुँचाना या पीड़ित को सीधे या परोक्ष रूप से नुकसान पहुँचाना, और इस तरह के कार्य के लिए इंटरनेट और मोबाइल फोन जैसे आधुनिक दूरसंचार नेटवर्क का उपयोग करना।

§ इस तरह के अपराधों में कंप्यूटर का अपराध करने में इस्तेमाल किया जा सकता है और कुछ मामलों में, कंप्यूटर अपराध का लक्ष्य हो सकता है।

§ साइबर अपराध किसी राष्ट्र की सुरक्षा और वित्तीय स्वास्थ्य को खतरा हैं

साइबर अपराध जो विशेष रूप से महिलाओं को लक्षित करते हैं।

• ईमेल के माध्यम से उत्पीड़न

• साइबर स्टाकिंग

• साइबर पोर्नोग्राफी

• मानहानि

मोर्फिंग

• ईमेल स्पूफिंग