ग्लोबल हंगर इंडेक्स (सूची), 2015 (Global Hunger Index (Catalog), 2015 –Social Issues)

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• इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्ट्‌टूयट (अंतरराष्ट्रीय खाना नीति खोज संस्था) (आई एफ पी आर आई) दव्ारा जारी किया जाता है। यह भूख की समस्या को नियंत्रित करने वाले कार्यक्रमों की सफलता अथवा असफलता के आकलन का पैमाना हैं। जीएचआई विश्व में भुखमरी की पृष्ठभूमि में निहित कारणों का पता लगाता है।

• यह विभिन्न देशों और क्षेत्रों के बीच भूख की स्थिति में अंतर को प्रदर्शित कर भूखमरी की समस्या में कमी लाने के प्रयास के लिए प्रेरित करता है।

• जीएचआई 100 बिन्दुओं के आधार पर बने पैमाने पर देश की रैंकिग प्रदान करता है जिसमें शून्य सबसे अच्छी स्थिति है। (भुखमरी की अनुपस्थिति) जबकि 100 सबसे बुरी स्थिति। यद्यपि किसी देश को सबसे ख़राब और सबसे अच्छी स्थिति नहीं प्रदान की गयी है।

• जीएचआई का उद्देश्य भुखमरी की बहुआयामी प्रकृति को प्रदर्शित करना है। इसके लिए यह चार मुख्य घटकों पर विचार करती है।

अल्पपोषण: जनसंख्या के प्रतिशत के रूप में अल्पपोषित का समानुपात जिन्हें आवश्यकता से कम कैलोरी पदार्थ प्राप्त होती है। (वजन बराबर 1/3)

बच्चों का लंबाई की अपेक्षा अपर्याप्त भार: पांच वर्ष से कम आयु के अपर्याप्त भार वाले शिशुओं का, पर्याप्त भार वाले शिशुओं की कुल संख्या के अनुपात में कम है। यह गंभीर कुपोषण को प्रदर्शित करता है। (वजन बराबर 1/6)

अपर्याप्त वृद्धि वाले बालक: यह पांच वर्ष से कम आयु के अपर्याप्त वृद्धि वाले शिशुओं का अनुपात है। (इन बालकों का अपने आयुसमूह के अनुसार कम लंबा होने की स्थिति है। वजन बराबर 1/6)

शिशु मृत्यु दर: यह पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर है। (आंशिक रूप से अपर्याप्त आहार का सेवन और अस्वास्थ्यकर वातावरण के घातक तालमेल को दर्शाता है।) (वजन बराबर 1/3)

• वैश्विक भूख सूचकांक के संदर्भ में भारत 63 से 55 वें स्थान पर आ गया है। अर्थात्‌ भारत की स्थिति में 8 स्थानों का सुधार हुआ है। किन्तु अधिक शिशु मृत्यु दर तथा अल्पपोषण की समस्या सामाजिक संदर्भ में अभी भी खतरनाक संकेत दे रही है।