हिस्टरेक्टमी एक सर्वेक्षण (Hysterectomy: a Survey – Social Issues)

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• हैदराबाद स्थिति एक एनजीओ (गैर सरकारी संस्था) ने मेडक जिले के कोवाडीपल्ली मंडल में घर-घर जाकर एक सर्वेक्षण किया, इस सर्वेक्षण में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कोवाडीपल्ली मंडल के गांवों में कुल 728 मामले सामने आए, जहाँ स्त्रियों ने हिस्टरेक्टमी करवाया था।

• युवा महिलाओं के संबंध में भी हिस्टरेक्टमी के कई मामले प्रकाश में आये।

• राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 ने पहली बार हिस्टरेक्टमी को अपने सर्वेक्षण में शामिल किया है। जिसके आंकड़े अभी प्रकाशित नहीं किए गए हैं।

एनजीओ की रिपोर्ट के निष्कर्ष

• हिस्टरेक्टमी करवाने वाली महिलाआंे में 20 से 30 वर्ष की उम्र वाली महिलाएं भी शामिल हैं। इस कार्य के लिए अनेक महिलाओं ने अपने गहने तक बेच कर निजी चिकित्सकों से यह ऑपरेशन (शल्य क्रिया) करवाया है।

• हिस्टरेक्टमी के मामले लगभग आधार दर्जन राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में रिपोर्ट हुए हैं, तथा पिछले छ: वर्षों में इन मामलों में वृद्धि हुई है। इन राज्यों में राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़, कनार्टक तथा महाराष्ट्र प्रमुख हैं।

• गरीब तथा अशिक्षित ग्रामीण महिलाएं श्वेत प्रदर, असामान्य मासिक धर्म, तथा पेट दर्द की समस्या व कैंसर के भय के कारण हिस्टरेक्टमी करवा लेती हैं। इसके अलावा मासिक धर्म के दौरान होने वाली मजदूरी के नुकसान से बचने के लिए भी कुछ महिलाएं यह ऑपरेशन करवा लेती हैं।

सरकार के प्रयास

• राजस्थान सरकार ने एक जांच समिति का गठन किया है तथा इस तरह की गतिविधियों में शामिल चिकित्सकों का लाइसेंस (अनुमति) रद्द कर दिया गया है।

• कर्नार्टक में तीन जांच समितियों को गठन किया गया है, जिनकी रिपोर्ट अभी लंबित है।

• छत्तीसगढ़ में इस पर दो समितियां बनाई गई है, हालांकि दूसरी समिति ने चिकित्सकों पर कोई कार्रवाई नहीं की हैं।

• हिस्टरेक्टमी एक महिला के गर्भाशय को हटाने के लिए किया जाने वाला ऑपरेशन है जो अलग-अलग कारणों से किया जाता है, जिनमें आम तौर पर शामिल हैं-

• गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा, या अंडाशय का कैंसर

• गर्भकला-अस्थानता

• योनि से असामान्य रक्तस्राव

• पेल्विक में अत्यधिक दर्द

• ग्रंथिपेश्यबुर्दता या गर्भाशय का अधिक मोटा होना

• गैर-कैंसर कारणों की वजह से हिस्टरेक्टमी केवल तभी किया जाता है जबकि आमतौर पर इलाज के अन्य सभी तरीके असफल हो गए हों।

आगे की राह

• राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट को जल्द से जल्द प्रकाशित किया जाना चाहिए ताकि देश में बन रहे हालातों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

• इस विषय में भी पीएनडीटी की तरह नियमन होना चाहिए, जहाँ बिना उचित दस्तावेजी प्रक्रिया के अल्ट्रा-साउंड नहीं किया जा सकता है।

• सरकार को निजी अस्पतालों में भी नियमन के लिए निर्देशावली लागू करनी होगी तथा बीमा योजनाओं के नियमों को कड़ा करना होगा।