मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health – Social Issues)

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भारत की मानसिक स्वास्थ्य नीति

• 10 अक्टुबर 2014 को केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री के दव्ारा भारत की पहली मानसिक स्वास्थ्य नीति की घोषणा की गई। इस नीति के माध्यम से सबके लिए मानसिक देखभाल व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।

• यह नीति, भारत के सभी निवासियों के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करने, मानसिक स्वास्थ्य की समस्या उत्पन्न होने से रोकने तथा मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को पुन: उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त करने में सहायता करने का प्रयास करती है।

• इस नीति के माध्यम से मानसिक रूप से अस्वस्थ्य लोगों को बोझ समझे जाने की सामाजिक भावना को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। ऐसे लोगों के, सामाजिक रूप से पृथकीकरण और अलगाव की परिस्थितियों को समाप्त करने का प्रयास किया जाएगा।

• मानसिक स्वास्थ्य से ग्रस्त लोगों को आजीवन गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था उपलब्ध कराकर उनके सामाजिक एकीकरण का प्रयास किया जाएगा।

• सर्वाधिक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि नीति संपूर्ण सुविधाओं को विधिक रूप से प्राधिकृत व्यवस्था के रूप में उपलब्ध कराने का दृष्टिकोण समाहित करती है।

उद्देश्य

लोगों के लिए मानसिक स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित की जाएगी।

• मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल सुविधाओं तक सार्वभौमिक पहुँच प्रदान करना।

• मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे व्यक्तियों की व्यापक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं (रोकथाम सेवाओं, उपचार तथा देखभाल और सहायता सेवाओं सहित) तक पहुँच एवं उनके दव्ारा इन सुविधाओं का सदुपयोग बढ़ाना।

• विशेष रूप से बेघर व्यक्तियों, दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले व्यक्तियों, शैक्षिक, सामाजिक और वंचित समूहों सहित सुभेद्य वर्ग के लिए मानसिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं तक पहुँच में वृद्धि करना।

• मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के साथ जुड़े जोखिम कारकों के प्रभाव और व्यापकता को कम करना।

• समस्या से पीड़ित व्यक्तियों के दव्ारा आत्महत्या करने अथवा इसका प्रयास करने जैसे मामलों को रोकना।

• मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे व्यक्तियों के अधिकारों का सम्मान एवं उन्हें किसी भी प्रकार की क्षति से सुरक्षा प्रदान करना।

• मानसिक स्वास्थ्य पीड़ितों को बोझ समझने एवं इससे जुड़ी सामाजिक कलंक की भावना को दूर किया जाना।

• मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्रशिक्षित व्यक्तियों की उपलब्धता एवं उनका समतामूलक वितरण सुनिश्चित करना।