राष्ट्रीय डिवार्मिंग पहल (National Deworming Initiative – Social Issue)

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हाल ही में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय दव्ारा राष्ट्रीय डिवार्मिंग पहल प्रारंभ की गयी।

उद्देश्य

• इस पहल का उद्देश्य 1 से 19 वर्ष की उम्र के 24 करोड़ से अधिक बच्चों की आंतों के कीड़े से रक्षा करना है। ’पोलियों मुक्त’ दर्जा मिलने के उपरांत, भारत अब ’डिवर्मिंग’ होने का दर्जा प्राप्त करने के लिए बच्चों के आंत्र परजीवी कीड़ों की समाप्ति पर ध्यान केन्द्रित करना चाहता है।

• इस कार्यक्रम के पहले चरण में ग्यारह राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों-असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दादरा एवं नगर हवेली, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्यपद्रेश, राजस्थान, तमिलनाडु और त्रिपुरा के लगभग 14 करोड़ बच्चों को शामिल किया जाएगा; तथा दूसरे चरण में करीब 10 करोड़ बच्चों को शामिल किया जाएगा।

• सभी लक्षित बच्चों को अल्बेंडाजोल गोलियां दी जाएँगी: 1-2 वर्ष के बच्चों को आधी गोली तथा 2-19 वर्ष के बच्चों को पूरी गोली दी जाएगी।

• इस पहल को स्वच्छता, सफाई, और स्वच्छ पेयजल उपलब्धता के साथ जोड़ा जाएगा।

• इस पहल से ’स्वच्छ भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता प्राप्त होगी।

डिवार्मिंग क्या है?

• इसमें मनुष्य या जानवर को गोलकृमि, हुककृमि, फ्लूक और टेपवर्म जैसे परजीवियों से बचाने के लिए एक कृमिनाशक दवा दी जाती है।

• इस पहल के अंतर्गत विद्यालयी बच्चों के लिये एक व्यापक डिवर्मिंग अभियान को कृमि रोग के संबंध में निवारक तथा उपचार प्रक्रिया दोनों ही के रूप में प्रयोग किया जाएगा, जिसमें मृदा-प्रेषित कृमि रोग से बचाव भी सम्मिलित है।