राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (National Family Health Survey – Social Issues)

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सुर्खियों में क्यों?

• राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के चौथे दौर की विवरण का पहला भाग जनवरी 2016 में जारी किया गया। इसके अंतर्गत केवल 13 राज्यों के आंकड़े शामिल हैं।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण क्या है?

• यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तत्वाधान में किया जाने वाला सर्वेक्षण हैं। इसके अंतर्गत परिवार व स्वास्थ्य के बारे में घरों और व्यक्तियों से जानकारी एकत्र की जाती है, जो सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद प्रदान करता हैं। इस प्रकार यह एक व्यापक परिवार नमूना सर्वेक्षण है।

• यह भारत में विस्तृत स्वास्थ्य आकड़ों का मुख्य स्रोत है।

पृष्ठभूमि

• पहला राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण वर्ष 1992-93 में हुआ था। तीसरा सर्वेक्षण वर्ष 2005-06 में हुआ था।

• अंतराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (आईआईपीएस) जो कि मुंबई में स्थित हैं यह इस सर्वेक्षण के लिए केन्द्रीय एजेेंसी (एजेंट का कार्य या कार्यस्थान) है।

चौथे सर्वेक्षण की विवरण के मुख्य अंश

राज्य: इस रिपोर्ट में 13 राज्यों के आंकडें शामिल हैं- आंधप्रदेश, गोवा, बिहार, हरियाणा, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, मेघालय, सिक्कम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के साथ केंद्रशासित प्रदेश अंडमान और निकोबार दव्ीप तथा पुडुचेरी भी शामिल हैं।

शिशु मृत्यु-दर

• सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शिशु मृत्यु-दर में कमी आई है। सभी राज्यों में यह प्रति हजार जन्म पर 51 मृत्यु से कम है।

• यह अडंमान में सबसे कम-प्रति हजार जन्म पर 10 मृत्यु और मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा-प्रति हजार जन्म पर 51 मृत्यु है।

लिंगानुपात और महिला साक्षरता

• लिंगानुपात में ग्यारह में से नौ राज्यों में गिरावट आई है। ये राज्य हैं- गोवा, मेघालय, उत्तराखंड, त्रिपुरा, तमिलनाडु, सिक्कम, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा, बिहार, और पश्चिम बंगाल।

• केवल उत्तराखंड में लिंगानुपात में सुधार हुआ है। जबकि मेघालय में इसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ हैं।

• पिछले सर्वेक्षण की तुलना में इन सभी ग्यारह राज्यों में महिला साक्षरता में 12.5 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।

• गोवा 89 प्रतिशत साक्षरता दर के साथ महिला साक्षरता दर की सूची में सबसे ऊपर है।

प्रजनन दर

• पहले की तुलना में अब प्रजनन दर में गिरावट आयी हैं। प्रजनन दर सिक्किम में सबसे कम 1.2 जबकि बिहार में सबसे ज्यादा 3.4 है।

• बिहार, मध्यप्रदेश और मेघालय को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने या तो प्रजनन का प्रतिस्थापन स्तर हासिल किया है या उसे बनाये रखा है।

संस्थागत प्रसव

• चिकित्सा संस्थान की देखरेख में होने वाले प्रसव में 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

• बिहार में इसमें पहले से तीन गुना वृद्धि हुई है और हरियाणा तथा मध्य प्रदेश में भी इसमें काफी वृद्धि देखी गई है।

टीकाकरण

• 12-23 महीनों के बच्चों के पूर्ण टीकाकरण में राज्यवार काफी भिन्नता है।

• 15 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में से 12 में 60 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हुआ है।

• बिहार, मध्यप्रदेश, गोवा, सिक्कम, पश्चिम बंगाल और मेघालय में बच्चों के पूर्ण टीकाकरण में काफी वृद्धि हुई है।

पोषण

• पांच वर्ष से कम उम्र के अल्प विकसित बच्चों की संख्या में कमी आई है, जिसका मतलब बेहतर पोषण वाले भोजन का सेवन बढ़ा है।

• लेकिन बिहार, मध्यप्रदेश और मेघालय में 40 प्रतिशत से अधिक बच्चे अल्प विकसित हैं।

• रक्तल्पता (एनीमिया) में कमी आई है लेकिन फिर भी इसकी व्यापकता बनी हुई है। 15 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में से 10 में आधे से अधिक बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं।

• प्रत्येक राज्य के पुरुषों और महिलाओं में मोटापे के स्तर में तेजी से वृद्धि देखी गई है जबकि पुडुचेरी इसका अपवाद है।

पानी और सफ़ाई व्यवस्था

• भारतीय परिवार अब ओर पेयजल और सफाई सुविधाओं का उपयोग करने के इच्छुक हैं।

• प्रत्येक राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के दो-तिहाई से अधिक परिवारों के लिए पहले से बेहतर पेयजल स्रोत उपलब्ध हैं।

• बिहार और मध्य प्रदेश को छोड़कर सभी राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों के 50 प्रतिशत से अधिक परिवारों के पास बेहतर स्वच्छता सुविधायें उपलब्ध है।

तनाव: पिछले सर्वेक्षण के बाद से उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों की संख्या शहरी भारत की तुलना में ग्रामीण भारत में बढ़ी है।

बाल विवाह

• पिछले सर्वेक्षण के बाद से ग्यारह राज्यों में बाल विवाह में कमी आई है।

• महिलाओं और पुरुषों के बाल विवाह में क्रमश: 13.17 प्रतिशत और 6.7 प्रतिशत कमी आई है।

एचआईवी के बारे में जागरूकता

• महिलाओं के बीच एचआईवी/एड्‌स के बारे में व्यापक ज्ञान रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत 20.3 प्र्रतिशत से घटकर 18.1 प्रतिशत हो गया हे।

• इसी तरह बिहार में भी यह 11.7 प्रतिशत से घटकर 10.1 हो गया है।

महिला सशक्तिकरण

• बचत खाते का स्वयं उपयोग करने वाली 15-49 वर्ष के आयु समूह की महिलाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई हैं।

• गोवा में 82.8 प्रतिशत महिलायें (सबसे अधिक) स्वयं वित्त प्रबंधन करती है। तमिलनाडु में इसमें पिछले सर्वेक्षण से 83 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

• संपत्ति पर महिलाओं के मालिकाना हक के मामले में बिहार इस सूची में सबसे ऊपर है, यहाँ महिलायें 58 प्रतिशत संपत्ति की मालिक हैं, जबकि पश्चिम बंगाल इस सूची में सबसे नीचे है।