पोलियो की पुनरावृत्ति (polio Repeat – Social Issues)

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• सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन (केंद्र) के निकट मल के एक नमूने से पोलियों के लक्षण सामने आने के बाद तेलंगाना राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा। इस नमूने में टाइप (प्रारूप) टू (दिशा की ओर) वैक्सीन (टीके की दवाई) दव्ारा उत्पन्न विषाणु (वीडीवीपी) की उपस्थिति मिली है, जिसमें 10 न्यूक्लोराटाइड परिवर्तित हुए हैं।

• यदि क्षीण टाईप-2 विषाणु जो कि ’ओरल पोलियो वैक्सीन’ (ओपीवी) में प्रयुक्त होता है, को लगातार गुणित होने दिया जाए तो उत्परिवर्तन लक्षित हो सकते हैं।

• यदि न्यूक्लोटाइड में छ: या उससे अधिक परिवर्तन घटित हों तब इसे वैक्सीन दव्ारा उत्पन्न विषाणु (वीडीवीपी) कहा जाता है।

• वीडीवीपी अत्यंत दुर्लभ है तथा यह रोग प्रतिरक्षा की कमी वाले बच्चों तथा प्रतिरोधकता के कम स्तर वाली आबादी में पाया जाता है।

टीकारण के लिए व्यापक अभियान

• हालांकि राज्य में अभी एक भी पोलियों से संबंधित मामला प्रकाश में नहीं आया है, फिर भी जल्द ही एहतियात के तौर पर राज्य भर में पोलियों की खुराक पिलाने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया जाएगा।

• भारत में अभी तक प्रयुक्त हो रहे त्रिसंयोजी ओपीवी (मुख दव्ारा पिलाई जाने वाली पोलियो दवा) में जीवित लेकिन असक्रिय टाइप-1, 2 और 3 प्रकार के विषाणु मौजूद रहते हैं।

• अंततोगत्वा भारत में दव्संयोजी पोलिया दवा का प्रयोग किया जाने लगा है, इसमें टाइप-2 के विषाणु को हटा दिया गया है क्योंकि इससे पोलियो का टीका लगाया जा रहा है, जिसमें तीनों प्रकार के विषाणु निर्जीव अवस्था में मौजूद रहते हैं।

• इसके साथ ही इंजेक्शन (सुई लगाना) के माध्यम से भी पोलियो का टीका लगाया जा रहा है, जिसमें तीनों प्रकार के विषाणु निर्जीव अवस्था में मौजूद रहते हैं।

• आईपीवी तापन दव्ारा मारे गए विषाणु से बनाया जाता है जो किसी भी परिस्थिति में रोग उत्पन्न नहीं कर सकता क्योंकि इसमें पैथोजन जीवित नहीं रहता है।