समाजिक-आर्थिक जाति जनगणना 2011 (Socio-economic caste census – Social Issues)

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• समाजिक-आर्थिक जाति जनगणना 2011, 1931 के बाद से पहली जनगणना है जिसमें जाति का विवरण भी लिया जा रहा है।

• ग्रामीण परिवारों के आंकड़ों के लिए, जनगणना को तीन श्रेणियों में बाँटा गया है: जिन्हें अनिवार्यत: बाहर रखा जाना है: जिन्हे अनिवार्यत: शामिल किया जाना है: और जो इन दोनों श्रेणियों के बीच में आते हैं। इसके बाद इन्हें सात अभाव मानदंडों के आधार पर आंका गया है।

• बिना आवास वाले परिवार, भिक्षा पर बसर करने वाले, मैला ढोने वालों, आदिम जनजातीय समूह और कानूनी तौर पर छुड़ाए गए बंधुआ मजदूर को अनिवार्यत: शामिल किया जाना है। इस आंकड़े को 1 प्रतिशत से कम रखा गया है।

• अनिवार्यत: बाहर रखे जाने वालों में वे परिवार शामिल हैं जिनके पास निम्न में से कुछ भी न हो-मोटर चलित वाहन, यंत्रीकृत कृषि उपकरण, 50,000 रुपये से ज्यादा की सीमा वाला किसान क्रेडिट कार्ड। इसमें वे परिवार भी आते हें जिनका कोई भी सदस्य सरकारी कर्मचारी हो या 10,000 रुपये प्रति महीने से अधिक कमाता हो, या आयकर प्रदाता हो। इसमें ऐसे परिवार भी आते हैं जो तीन या अधिक कमरे वाले पक्के घर में रहते हैं, या घर में फ्रिज हो, या टेलीफोन हो या सिंचित भूमि हो।

• समाजिक-आर्थिक जाति जनगणना राष्ट्रीय स्तर पर 24.39 करोड़ परिवारों के आंकड़े लेगी, जिनमें से 6.48 करोड़ परिवारों को अनिवार्य रूप से बाहर रखा गया है। इस प्रकार, केवल 17.91 करोड़ ग्रामीण परिवारों का सर्वेक्षण किया गया है।

अभाव की स्थिति का अनुमान लगाने के लिए सात समाजिक-आर्थिक मानक

2011 में भारत की ग्रामीण आबादी की लगभग 19 प्रतिशत के पास निम्न सात सामाजिक आर्थिक मानको में से कम से कम एक की कमी थी-

• बिना पक्की दीवार और छत के साथ केवल एक ही कमरे का घर

• 15-59 वर्ष की आयु का कोई वयस्क सदस्य ना होना

• महिला प्रधान घर में 15-59 वर्ष की आये का कोई वयस्क पुरुष ना होना।

• विकलांग सदस्य या असक्षम शरीर सदस्य वाले परिवार

• अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के परिवार,

• 25 वर्ष की आयु से ऊपर का कोई साक्षर सदस्य ना होना

• भूमिहीन परिवार जिनकी आय का मुख्य हिस्सा अनौपचारिक श्रम से आता हो।

रिपोर्ट के निष्कर्ष

जनांकिकी

अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति जनसंख्या: ग्रामीण परिवारों में से 21.53 प्रतिशत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के थे।

महिलायें: भारतीय ग्रामीण आबादी में करीब 48 प्रतिशत महिलायें हैं।

ट्रांसजेंडर: उच्चतम न्यायालय ने 2014 में तीसरे लिंग के रूप में ट्रांसजेंडरों को मान्यता दी थी। सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के अनुसार भारत की ग्रामीण आबादी में 0.1 प्रतिशत ट्रांसजेंडर हैं।

• अंडमान और निकोबार दव्ीप समूह, पश्चिम बंगाल, गुजरात, ओडिशा और मिजोरम में किन्नरों की जनसंख्या ज्यादा है।

आय और रोजगार

• लगभग एक तिहाई ग्रामीण परिवारों में अभी भी आय का एक निश्चित स्त्रोत नहीं है और वे एक कमरे के कच्चे मकानों में रह रहे हैं। जनगणना दव्ारा आंकलित 17.91 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से ऐसे परिवार 31.26 प्रतिशत हैं। ऐसे परिवारों को अब ’गरीब परिवार’ माना जाएगा और गरीबी रेखा के नीचे वाले परिवारों को मिलने वाले लाभ दिए जायेंगे।

• 35 लाख परिवार बिना किसी आय वाले हैं, एक लाख परिवार भीख माँग कर जीवित हैं और 43,000 परिवार कूड़ा बीनकर जीवन यापन करते हैं।

• ग्रामीण परिवारों में 30 प्रतिशत भूमिहीन हैं और अपनी आय का एक प्रमुख हिस्सा अनौपचारिक श्रम से पाते हैं। 10 प्रतिशत से कम के पास वेतन वाली नौकरियाँ हैं।

• परिवारों के राज्यवार आंकड़ों के संदर्भ में, जिनकी मासिक आय 5,000 रुपयें से भी कम है और एक कमरे के कच्चे घर में रहते है, मध्य प्रदेश सबसे गरीब राज्य के रूप में उभरा है। मध्यप्रदेश में 24 प्रतिशत ग्रामीण परिवार गरीब हैं, उसके बाद छत्तीसगढ़ और बिहार का नंबर आता है जहाँ क्रमश: 21 प्रतिशत और 19 प्रतिशत ग्रामीण परिवार गरीब हैं।

साक्षरता

ग्रामीण भारत में 88 करोड़ लोगों में से 36 प्रतिशत अनपढ़ हैं। यह 2011 की जनगणना के दव्ारा दर्ज 32 प्रतिशत से अधिक है।

• 64 प्रतिशत साक्षर ग्रामीण भारतीयों में से 20 प्रतिशत से अधिक ने प्राथमिक शिक्षा भी पूरी नहीं की है। ग्रामीण भारत से केवल 5.4 प्रतिशत ने उच्च विद्यालय की पढ़ाई पूर्ण की है और मात्र 3.4 प्रतिशत महाविद्यालय से स्नातक हुए हैं।

• 23.5 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों में 25 वर्ष की आयु से ऊपर कोई वयस्क साक्षर नहीं हैं।

साधारण सुविधाए

• 50 लाख परिवारों को पीने का पानी लेने घर से दूर जाना पड़ता है।

• 20 लाख परिवारों के पास बिजली की आपूर्ति नहीं है उनके पास पक्के शौचालय नहीं हैं (जहां टॉयलेट सीट और नाली के बीच पानी एक बाधा के रूप में कार्य करता है)

• ग्रामीण परिवारों के लगभग 28 प्रतिशत के पास अभी भी लैंडलाइन फोन या मोबाइल फोन नहीं है।

• सिर्फ 20 प्रतिशत लोग ही किसी वाहन के मालिक हैं।

• सिर्फ 10 प्रतिशत के पास रेफ्रिजरेटर है।

• केवल 20.6 प्रतिशत परिवारों के पास ’मोटर चालित दो/तीन/चार पहिया वाहन है।’

विविध

• 41.6 प्रतिशत ग्रामीण भारतीय अविवाहित हैं, 40 प्रतिशत शादीशुदा हैं और 3.5 प्रतिशत तलाकशुदा हैं। पुडुचेरी और केरल में विधवाओं का उच्चतम अनुपात है, क्रमश: 6 प्रतिशत और 5.5 प्रतिशत।

• ग्रामीण भारती में औसत घरेलू सदस्य संख्या पांच है, और उनमें से केवल 12.8 प्रतिशत परिवार महिला प्रधान हैं। लक्षदव्ीप में सबसे अधिक 40 प्रतिशत परिवार महिला प्रधान हैं।

• देश भर में ग्रामीण परिवारों में से केवल 3.62 प्रतिशत के पास 50,000 रुपये या उससे अधिक की ऋण सीमा वाला किसान क्रेडिट कार्ड है। 5 प्रतिशत से कम के ही पास कोई कृषि उपकरण हैं।

निष्कष

• सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना दव्ारा दिए गये अभाव ग्रस्त परिवारों के आंकड़े तत्कालीन योजना आयोग के गरीबी के आंकड़ो से भिन्न हैं। योजना आयोग के आंकड़े आय पर आधारित थे। आयोग के अंतिम अनुमान के अनुसार वर्ष 2011-12 में भारत की 25.7 प्रतिशत ग्रामीण आबादी गरीबी रेखा के नीचे यापन कर रही थी, मतलब की उनकी प्रति व्यक्ति मासिक आय 816 रूपए से कम थी।

• जनगणना के निष्कर्ष रंगराजन समिति के निष्कर्ष के समान ही हैं समिति के अनुसार वर्ष 2011- 12 में गरीबी रेखा से नीचे यापन करने वाले लोगों का प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में 30.95 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 26.4 प्रतिशत था। रंगराजन विवरण में कहा गया था कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति दिन 32 रुपये से कम खर्च करने वाले लोगों को गरीब माना जाएगा।

• ये निष्कर्ष राज्यों और केन्द्र के लिए योजनाओं और कार्यक्रमों पर नीतिगत निर्णय लेने के लिए आधार के रूप काम करेंगे। ये निष्कर्ष लक्षित समूहों को समर्थन देने और उनके लिए नीति नियोजन के लिए आधार बनेंगे।