बच्चों से संबंधित यूनिसेफ रैपिड (शीघ्रगामी) सर्वेक्षण (2013 − 14) (Rapid UNICEF Related To Children (Swift) Survey – Social Issues)

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महत्वपूर्ण निष्कर्ष

• किसी भी राज्य में पूर्ववर्ती अनुभवों के उलट पिछले कुछ वर्षो में अविकसित और सामान्य से कम वजन वाले बच्चों के अनुपात में वृद्धि नहीं दर्ज की गयी है।

• सभी राज्यों ने सामान्य से कम वजन वाली किशोरियों की संख्या को कम करने संदर्भ में खराब प्रदर्शन किया हैं।

• राष्ट्रीय स्तर पर अपने आयु समूह की तुलना में ऊंचाई से कम वृद्धि की समस्या शहरी क्षेत्रों (प्रतिशत 32.1) की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों (41.7 प्रतिशत) में अधिक है। यही स्थिति कम वजन वाले बच्चों के लिए भी है।

• केवल तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड और त्रिपुरा ऐसे राज्य है जिन्होंने सामान्य से कम वजन वाली किशोरियों की संख्या के अनुपात को कम किया है।

• केरल राज्य ने अविकसित बच्चों की समस्या के संदर्भ में हुई कमी के क्षेत्र में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है।

• मणिपुर और मिजोरम राज्यों में कम वजन वाले बच्चों की सबसे कम संख्या है।

• उत्तर प्रदेश में अभी भी अविकसित बच्चों की संख्या सबसे अधिक है, जिनमें से पांच वर्ष तक की उम्र वाले बच्चों का प्रतिशत 50 से अधिक है।

• झारखंड राज्य में पाँच वर्ष से कम वजन वाले बच्चों की संख्या उच्चतम स्तर पर है।

• विकसित राज्यों, केवल गुजरात ने अविकसित बच्चों के मामलों में और कम वजन वाले बच्चों की संख्या को कम करने में, राष्ट्रीय औसत से भी बदतर प्रदर्शन किया है।

• हालांकि, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने यूनिसेफ दव्ारा बच्चों के रैपिड सर्वेक्षण के लिए प्रयुक्त नमूनों के प्रकार और अपनायी जाने वाली कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाया है।